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Hindi News ›   India News ›   IAF Invites Bids to Buy 10 Anti-drone Systems from Indian Vendors After Jammu Blast

जम्मू जैसे हमलों से निपटने की तैयारी: एयरबेस की सुरक्षा में अब नहीं लगेगी सेंध, काउंटर एयरक्राफ्ट सिस्टम खरीद रही वायुसेना

Tue, 06 Jul 2021 10:48 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Tue, 06 Jul 2021 10:48 AM IST
सार

काउंटर अनआर्म्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (सीयूएएस) का उद्देश्य ड्रोन का पता लगाना, ट्रैक करना, पहचानना और फिर हमले को बेअसर करना है। लेजर डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (लेजर-डीईडब्ल्यू) अनिवार्य रूप से एक ऑप्शन के रूप में जरूरी है।

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IAF Invites Bids to Buy 10 Anti-drone Systems from Indian Vendors After Jammu Blast
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

बीते दिनों जम्मू एयरबेस पर हुए ड्रोन हमले के बाद वायुसेना सतर्क हो गई है। भविष्य में जम्मू में एयरबेस पर हुए ड्रोन हमलों जैसे धमाकों से निपटने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए भारतीय वायुसेना ने 10 एंटी-ड्रोन सिस्टम की खरीद शुरू कर दी है। वायुसेना ने इसकी खरीद के लिए बोलियां आमंत्रित कीं हैं। इसके बाद दुश्मनों को ड्रोन के जरिए से हमला करना और मुश्किल हो जाएगा।

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27 जून को हमले के बाद वायुसेना ने एंटी ड्रोन सिस्टम खरीदने के लिए भारतीय कंपनियों को रिक्वेस्ट फॉर इनफॉर्मेशन (आरएफआई) भी जारी कर दिया है। वायुसेना ने आरएफआई में बताया है कि यह काउंटर अनआर्म्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (सीयूएएस) ड्रोन का पता लगाने, उसको ट्रैक करने, पहचान करने और नष्ट करने में सक्षम होना चाहिए।
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आरएफआई के मुताबिक, सिस्टम में ग्लोबल नेविगेशन सैटलाइट जैमर सिस्टम (जीएनएसएस) और रेडियो फ्रीक्वेंसी जैमर भी होना चाहिए। बता दें कि ये फीचर्स इजरायल के ड्रोन डोम सिस्टम से मेल खाते हैं, जो कि साढ़े 3 किलोमीटर की दूरी से ही छोटे से छोटे टारगेट का पता लगाकर उन्हें लेजर तकनीक से गिरा देते हैं।
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 इसके अलावा, आसपास के पर्यावरण को कम-से-कम नुकसान पहुंचाते हुए मानव रहित विमानों के लिए प्रभावी नो फ्लाई जोन को पूरी तरह से बनाए रखने के लिए इसमें मल्टी सेंसर, मल्टी किल सॉल्यूशन होना चाहिए। इसे ऑपरेटर को बिल्कुल सही स्थिति बतानी चाहिए और कई मापदंडों के आधार पर अलर्ट भेजना चाहिए।

 

जानकारी के मुताबिक, इस मेड इंडिया ड्रोन-रोधी सिस्टम का मुख्य हथियार लेजर आधारित होगा। भारतीय वायुसेना इन एंटी-ड्रोन सिस्टमों को अलग-अलग एयरबेसों पर तैनात करेगी। 
 
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