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Coaching Center Tragedy: ‘मुझे निशाना बनाया जा रहा’, विकास दिव्यकीर्ति बोले- हर कोई बलि का बकरा चाहता है
Wed, 31 Jul 2024 06:36 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Wed, 31 Jul 2024 06:36 AM IST
सार
दिल्ली के राजेंद्रनगर में बेसमेंट में डूबकर हुई तीन आईएएस अभ्यर्थियों की मौत के बाद हुए विवाद पर विकास दिव्यकीर्ति ने कहा है कि मुझे निशाना बनाया जा रहा है। हर कोई बलि का बकरा चाहता है, इससे प्रशासन का काम भी आसान हो जाता है।
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विकास दिव्यकीर्ति
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दिल्ली में पुराने राजिंदर नगर में तीन आईएएस उम्मीदवारों की डूबने से हुई मौत के बाद कोचिंग संस्थानों पर नगर निकाय की कार्रवाई के बीच दृष्टि आईएएस के संस्थापक और एमडी, डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
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'NOC की प्रक्रिया बहुत जटिल है'
दिव्यकीर्ती ने कहा कि 1000 से अधिक कोचिंग संस्थान हैं लेकिन दिल्ली में किसी के पास अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं है। उन्होंने कहा कि एनओसी की प्रक्रिया बहुत जटिल है। अग्निशमन विभाग का तर्क है कि इमारत व्यवासायिक है, इसलिए प्रमाण पत्र भी व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। जबकि एमसीडी शैक्षिक प्रमाणपत्र की मांग करती है।
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दिव्यकीर्ति ने कहा कि उनकी मंगलवार को दिल्ली एलजी के साथ बैठक हुई थी। उस बैठक में कुछ छात्र और कई संस्थानों के मालिक भी थे। वहां दिल्ली सरकार के शीर्ष अधिकारी, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), अग्निशमन विभाग और मुख्य सचिव भी मौजूद थे।
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दिव्यकीर्ति ने बताया, "जब हम अग्निशमन विभाग से प्रमाण पत्र मांगते हैं, तो वे हमें एमसीडी या डीडीए के माध्यम से आने के लिए कहते हैं। हमने अपनी समस्या को लेकर बैठक में चर्चा की। अग्निशमन विभाग ने हमें आश्वासन दिया है कि वे एक प्रणाली बनाएंगे जिसके माध्यम से हम उनसे सीधे प्रमाणपत्र ले सकें।भले ही हमें अग्निशमन विभाग से प्रमाण पत्र मिलता है, लेकिन इसमें यह उल्लेख किया गया है कि चूंकि इमारत वाणिज्यिक है, इसलिए एमसीडी का कहना है कि वे एक शैक्षिक प्रमाण पत्र चाहते हैं।
एक भी शैक्षणिक संस्थान के पास शैक्षणिक भवन प्रमाणपत्र नहीं है। केवल कॉलेजों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों को ही यह मिलता है। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि 2020 से पहले हम शैक्षणिक श्रेणी में नहीं थे। जीएसटी के अनुसार, अब कोचिंग संस्थान अभी भी वाणिज्यिक श्रेणी में आते हैं।"
‘मुझे निशाना बनाया जा रहा, हर कोई बलि का बकरा चाहता है’
दिव्यकीर्ति ने कहा कि मामले में उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में हर कोई बलि का बकरा चाहता है। इससे प्रशासन के लिए भी आसान हो जाता है। एक व्यक्ति को पीड़ित होने देते हैं। यहां तक की समाज को भी लगता है कि उन्हें कम से कम एक आरोपी तो मिल गया।