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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: सात साल से डिटेंशन सेंटर में शख्स, पाकिस्तान ने वापस लेने से किया इनकार 

Mon, 28 Feb 2022 08:55 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 28 Feb 2022 08:55 PM IST
सार

अदालत ने कहा कि क्या उसे कुछ समय के लिए रिहा किया जा सकता है, ताकि वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सके। नागरिकता देना आपका फैसला होगा। 

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How long can a person be inside, SC asks Centre about Pak national lodged in detention centre
supreme court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से एक पाकिस्तानी नागरिक की स्थिति पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहा जो सात साल से एक डिटेंशन सेंटर में है, क्योंकि इस्लामाबाद ने उसे अपना नागरिक स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप एक व्यक्ति को कब तक अंदर रख सकते हैं? न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज से निर्देश मांगा कि क्या 62 वर्षीय मोहम्मद कमर को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने के लिए कुछ समय के लिए रिहा किया जा सकता है क्योंकि उनके पांच बच्चे भारतीय नागरिक हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, कब तक अंदर रखेंगे?
नटराज ने कहा, यह अजीबोगरीब मामला है। मुझे निर्देश लेना होगा। पाकिस्तान जो कह रहा है उससे हम बंधे नहीं हैं। फॉरेनर्स एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को डिटेंशन सेंटर में रखा जाना चाहिए। उसे बाहर जाने नहीं दिया जा सकता। यह वैधानिक जरूरत है। पीठ ने कहा, सवाल यह है कि उसने 3 साल छह महीने की सजा काट ली है। अब सजा काटने के बाद वह 2015 से डिटेंशन सेंटर में बंद है और अपने प्रत्यर्पण का इंतजार कर रहा है। जब पाकिस्तान ने उसे अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है, ऐसे में आप किसी व्यक्ति को कब तक अंदर रख सकते हैं?
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भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने की मोहलत का निर्देश
अदालत ने कहा, कमर ने कहा है कि वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना चाहता है क्योंकि उसके बच्चे भारतीय नागरिक हैं। आप कृपया निर्देश लें कि क्या उसे कुछ समय के लिए रिहा किया जा सकता है, ताकि वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सके। नागरिकता देना आपका फैसला होगा, हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करने जा रहे हैं। पीठ ने मामले को तीन सप्ताह के बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। 
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62 वर्षीय मोहम्मद कमर को 8 अगस्त, 2011 को उत्तर प्रदेश के मेरठ से गिरफ्तार किया गया था और यहां की एक अदालत ने उनके वीजा से अधिक समय तक रहने के लिए दोषी ठहराया था। उसे तीन साल छह महीने की जेल और 500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। छह फरवरी 2015 को अपनी सजा पूरी करने के बाद पांच बच्चों के पिता कमर को 7 फरवरी, 2015 को पाकिस्तान को निर्वासित करने के लिए नरेला के लामपुर में हिरासत केंद्र में भेज दिया गया था।  हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने उनके निर्वासन को स्वीकार नहीं किया और वह अभी भी नजरबंदी केंद्र में है।

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