कोरोना वायरस: बूस्टर डोज भारतीयों पर कितनी प्रभावी, जांच करवाए सरकार
प्रमुख वैज्ञानिकों में शुमार डॉ. कृष्णा खैरनार कहते हैं, यह एसजीटीएफ रणनीति आरटी-पीसीआर स्तर पर ही ओमिक्रॉन को जल्दी पकड़ने में मददगार होगी।
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कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन स्वरूप व तीसरी लहर की आशंका से बढ़ती चिंताओं के बीच स्वास्थ्य मामलों पर बनी संसद की स्थायी समिति ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह भारतीयों में बूस्टर डोज के उपयोग व प्रभाव पर जांच व अध्ययन करवाए।
समिति ने शुक्रवार को रिपोर्ट में कहा कि ओमिक्रॉन में प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने की क्षमता को गंभीरता से लेना चाहिए। समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करे।
वहीं ओमिक्रॉन का जल्द पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर किटों के जरिए पॉजिटिव सैंपलों की जीनोम सीक्वेंसिंग कर रहे भारतीय शोधकर्ता ‘एस’ जीन टारगेट फेल्योर (एसजीटीएफ) रणनीति अपना रहे हैं।
प्रमुख वैज्ञानिकों में शुमार डॉ. कृष्णा खैरनार का कहना है, आरटी-पीसीआर जांच वायरस के विभिन्न जीनों को निशाना बनाती है ताकि व्यापक स्वरूपों का पता लगाया जा सके। नागपुर स्थित सीएसआईआर-नीरी के शोधकर्ता खैरनार के मुताबिक ओमिक्रॉन के मामलों में एस जीन में म्यूटेशन के कारण थर्मोफिशर कंपनी की आरटी-पीसीआर जांच में यह पकड़ में नहीं आ रहा जबकि ओआरएफ और एन जीन का पता लग रहा है।
पॉजिटिव सैंपलों में एस जीन का न मिलना ‘एस’ जीन टार्गेट फेल्योर (एसजीटीएफ) कहा जा रहा है। इन सैंपलों को ओमिक्रॉन से संक्रमित मानकर फास्ट ट्रैक जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जा सकता है ताकि इस स्वरूप की पुष्टि हो सके।
415 की मौत हुई एक दिन में
8,603 संक्रमित 24 घंटे में
99,974 सक्रिय केस
26.53 करोड़ डोज अब तक दी
46.68 करोड़ को दो डोज मिली
ये भी सिफारिशें
- जांच सुविधाओं को सुधारें, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में। पीएचसी व सीएचसी को जांच केंद्रों से जोड़ें।
- संक्रमितों की निगरानी व समय पर पहचान हो ताकि उन्हें अलग रखा जा सके।
- टीकाकरण तेज हो, ज्यादा टीकों के आपात उपयोग की अनुमति मिले।
- टीका उत्पादन बढ़ाने और उन्हें पहुंचाने की व्यवस्था भी करनी होगी।
- ओमिक्रॉन पर टीकाकरण का प्रभाव मापने के लिए सरकार शोध करवाए।
- एयरपोर्ट पर यात्रियों की जांच गहनता से हो। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए बुनियादी सुविधाओं को सुधारें।
- सरकार ने 64,179.55 करोड़ के फंड की व्यवस्था की थी, इसे उपयोग करने के लिए प्लान ऑफ एक्शन तय करें।
विशेषज्ञाें की राय : बूस्टर से बेहतर होगा नागरिकों की दो डोज पूरी करवाएं
कोविड-19 टीकों की बूस्टर डोज पर विचार करने के बजाय सभी लोगों को टीके की दो डोज देने पर ध्यान देना चाहिए। इससे महामारी से बचाव में ज्यादा मदद मिलेगी। यह दावा वैज्ञानिकों ने ऐसे समय में किया है जब वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से तीसरी लहर की आशंका जताई गई है। बचाव के लिए वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर बूस्टर डोज देने की विभिन्न संस्थाएं, राज्य व वर्ग सिफारिश कर रहे हैं। जानिए इस पूरे मुद्दे के पक्ष और पहलू...
ओमिक्रॉन को देखते हुए नहीं बने थे टीके
डॉ. विनीता बल, इम्यूनोलॉजिस्ट, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च का कहना है कि टीके पुराने वायरस पर आधारित हैं, डेल्टा या ओमिक्रॉन को देखते हुए नहीं बने, तब यह वेरिएंट थे ही नहीं। इनके बूस्टर से ओमिक्रॉन पर प्रभाव होगा या नहीं, हमें नहीं पता। हमारा ध्यान टीकाकरण के पात्र लोगों को पूरे डोज देने पर होना चाहिए।
मास्क पहनो, फिर जो वेरिएंट आए, बचे रहोगे
सत्यजीत रथ, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, दिल्ली का कहना है कि हमें यह भी पता नहीं है कि क्या बूस्टर डोज का प्रभाव भी है? और किस टीके का असर कब तक रहता है? इससे तो अच्छा होगा कि सरकार नागरिकों को अच्छे स्तर के मास्क मुहैया करवाए। इन्हें पहनने के लिए सख्ती करे।
कोरोना से मौतों का असली आंकड़ा जारी करे सरकार : कांग्रेस
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर कोरोना से मौतों के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाते हुए ऑनलाइन अभियान ‘स्पीक अप फॉर कोविड न्याय’ शुरू किया। उन्होंने सरकार से महामारी में मारे लोगों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए मुआवजा देने और मौत के असली आंकड़ा जारी करने को भी कहा।