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समलैंगिकता को अपराध श्रेणी के दायरे से हटाने पर सुप्रीमकोर्ट का इनकार

Thu, 30 Jun 2016 05:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 30 Jun 2016 05:41 AM IST
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homosexuality Supreme Court denied the offense category

एलजीबीटी समुदाय का हिस्सा बताने वाले कुछ हाई-प्रोफाइल लोगों द्वारा समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी के दायरे से हटाने की गुहार संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षण से इनकार किया है। भारतीय दंड संहिता की धारा-377 के तहत समलैंगिकता अपराध है और इसके तहत दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा तक का प्रावधान है।

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न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को चीफ जस्टिस के पास याचिका ले जाने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि चीफ जस्टिस यह तय करेंगे कि क्या उनकी याचिकाओं को इस संबंध में पूर्व में दाखिल सुधारात्मक याचिकाओं के साथ सुना जा सकता है या नहीं?
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याचिकाकर्ताओं प्रसिद्ध शेफ रितु डालमिया, नामी होटल व्यवसायी अमन नाथ और डांसर एनएस जौहर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद पी दत्तार ने पीठ ने उनकी याचिकाओं को नए सिरे से सुना जाए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब वे लोग अदालत आए हैं, जिनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
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इससे पहले गैर सरकारी संगठन या अन्य समूहों द्वारा याचिकाएं दायर की गई थीं। पीठ ने कहा कि लेकिन मसला वहीं हैं। चूंकि इस मसले पर दूसरी पीठ सुनवाई कर रही है, इसलिए हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकते।

पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं को तब तक इंतजार करना चाहिए जब तक पांच सदस्यीय पीठ सुधारात्मक याचिकाओं का निपटारा नहीं कर देती। पीठ ने वरिष्ठ वकील दत्तार से कहा कि आप सुधारात्मक याचिकाओं पर फैसले का इंतजार कीजिए, तब तक हम अपनी याचिका को लंबित रखते हैं।

इस पर वरिष्ठ वकील ने कहा कि  उनकी याचिकाओं को सुधारात्मक याचिकाओं के साथ सुनवाई की इजाजत दी जाए। जवाब में पीठ ने कहा कि यह चीफ जस्टिस तय करेंगे कि इसे सुधारात्मक याचिकाओं के साथ सुना जाना चाहिए या नहीं?


मालूम हो 2 जुलाई 2009 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा-377(अप्राकृतिक यौन संबंध) को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था लेकिन वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था और धारा-377 को एक बार फिर से अपराध की श्रेणी में ला दिया था।  बाद में पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। जिसके बाद आठ सुधारात्मक याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जो फिलहाल लंबित है।

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