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सरकार बना रही है ऐसे नियम, गरीब-अनपढ़ भी आसानी से पेश कर सकेंगे नागरिकता संबंधित दस्तावेज

Fri, 20 Dec 2019 07:44 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 20 Dec 2019 07:44 PM IST
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Home ministry planning to ease the rules of submitting citizenship documents checklist
NRC & CAA PROTEST IN PRAYGRAJ - फोटो : प्रयागराज
केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि 'नागरिकता संशोधन कानून' को लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इसमें एक दो नहीं, बल्कि कई देश विरोधी संगठन काम कर रहे हैं। ऐसे संगठनों पर गृह मंत्रालय की नजर है। ये संगठन एक समुदाय विशेष के लोगों को अपने साथ लेकर विरोध प्रदर्शन करा रहे हैं। नागरिकता कानून डरावना नहीं है।
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केंद्र सरकार ऐसे नियम बना रही है कि गरीब और अनपढ़ लोग भी आसानी से नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज संबंधित अथॉरिटी के समक्ष पेश कर सकेंगे। बहुत जल्दी नए नियम बना दिए जाएंगे और इन पर त्वरित गति से काम हो रहा है।
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शुक्रवार को गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उन लोगों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है, जो इस देश के निवासी हैं। नागरिकता साबित करने के लिए जो दस्तावेज मांगे जाएंगे, वे ऐसे होंगे कि अधिकांश लोग आसानी से उनका इंतजाम कर सकेंगे। इसमें किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है। कई लोग ऐसी बातें फैला रहे हैं कि 1987 से पहले के दस्तावेज वे कहां से लाएंगे। अगर किसी के मां बाप के पास कोई भी दस्तावेज न हो तो उस स्थिति में क्या होगा।

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इस पर गृह मंत्रालय के आला अधिकारी का कहना है कि हम इस दिशा में भी सोच रहे हैं। हमें पता है कि बहुत से लोग गरीब और अनपढ़ भी रहे होंगे। ऐसे लोगों के लिए कुछ इस तरह के नियम बनाए जा रहे हैं कि वे लोग बिना किसी दिक्कत के नागरिकता से जुड़े दस्तावेज जमा कर सकें।

केंद्र सरकार इस तरह के मामलों से वाकिफ हैं। नागरिकता एक्ट का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद सभी राज्यों को एक एडवाइजरी जारी की जाएगी, जिसमें वे सब नियम लिखे होंगे कि कैसे और किन लोगों को नागरिकता देनी है। कौन से दस्तावेज लिए जायें, उनका विकल्प क्या हो, यह नियमावली बनाकर जिला मजिस्ट्रेट या उसके समकक्ष किसी दूसरे अधिकारी को भेजी जाएगी। इन सभी कार्यों के लिए हर जिले में एक नोडल अधिकारी तैनात होगा।

हालांकि नागरिकता कानून से जुड़ी प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया गया है, लेकिन दस्तावेजों की जांच के लिए अलग से एक टीम रहेगी। यह टीम आवेदक के पास जाकर या अपने किसी दूसरे तरीके से दस्तावेजों की जांच करेगी। सभी राज्य नागरिकता कानून को लेकर सहयोग करेंगे, क्योंकि ये केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। फिलहाल सभी राज्यों से कहा गया है कि वे नागरिकता कानून के मामले में सहयोग करें।

पाक, बांग्लादेश तथा अफगानिस्तान से आए लोगों के लिए प्रावधान

इन तीनों देशों से आए ऐसे सभी वैध शरणार्थी, जिनके पास सभी जरूरी यात्रा दस्तावेज हैं और जो भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत निर्दिष्ट आवश्यक अहर्ताएं पूरा करते हैं, वे भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह व्यवस्था इन देशों से आने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर भी लागू होती है।अधूरे यात्रा दस्तावेज या वैधता समाप्त हो चुके यात्रा दस्तावेज रखने वाले तथा धर्म के नाम पर उत्पीड़न से बचने के लिए दिसंबर 2014 तक भारत में शरण लेने वाले ऐसे समुदायों के कुछ शरणार्थियों को ही नागरिकता संशोधन अधिनियम से लाभ हो सकता है।

ऐसे लोगों को नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत अवैध शरणार्थियों की परिभाषा से बाहर रखा गया है। वे भारत में कुल छह साल की अवधि तक रहने के बाद नागरिकता प्राप्त करने के योग्य हो जाएंगे। अन्य विदेशियों के लिए यह अवधि 12 वर्ष निर्धारित की गई है। नागरिकता संशोधन अधिनियम 1955 के तहत पाकिस्तान के बलुच, अहमदियों और म्यांमार के रोहिंग्यायों को भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करने से नहीं रोकता है। 

किसी विदेशी को निर्वासित करने से लेना-देना नहीं

भारत से किसी भी विदेशी को निर्वासित करने का सीएए से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी विदेशी की निर्वासन प्रक्रिया को विदेशी अधिनियम, 1946 अथवा पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के अध्यादेश के अनुसार लागू किया जाता है, चाहे वह किसी भी धर्म अथवा देश का हो। ये दो कानून ही सभी विदेशियों के भारत में प्रवेश, बसने, आवाजाही और भारत से उन्हें बाहर किए जाने पर लागू होते है, चाहे वे किसी भी धर्म या देश के हों। अत: सामान्य निर्वासन प्रक्रिया भारत में बसे किसी भी अवैध विदेशी व्यक्ति पर लागू होगी।

यह पूरी तरह से सोची-समझी न्यायिक प्रक्रिया है, जो किसी भी अवैध विदेशी की पहचान करने के लिए स्थानीय पुलिस या प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से की जाने वाली समुचित पूछताछ पर आधारित है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि इस तरह के अवैध विदेशी व्यक्ति को उसके देश के दूतावास की ओर से समुचित यात्रा दस्तावेज जारी किया जाएं, ताकि जब उसे निर्वासित किया जाए, तो उसके देश के अधिकारियों को उसे स्वीकार करने में कोई आपत्ति न हो। 

असम में, निर्वासन प्रक्रिया पर तभी अमल किया जाता है, जब विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत एक ‘विदेशी’ के रूप में इस तरह के व्यक्ति का निर्धारण हो जाता है। इसके बाद उसे निर्वासन किये जाने का पात्र मान लिया जाता है। अत: इस पूरी कवायद में कुछ भी स्वत: या भेदभावपूर्ण तरीके से नहीं होता है। किसी भी अवैध विदेशी व्यक्ति की पहचान, हिरासत में लेने एवं निर्वासित करने के लिए विदेशी अधिनियम की धारा 3 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 की धारा 5 के तहत राज्य सरकारों और उनके जिला स्तर के अधिकारियों को केन्द्र सरकार का अधिकार दिया जाता है। 

सीएए से भारतीयों पर असर नहीं

इस कानून से भारतीय नागरिक किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होंगे। भारतीय नागरिकों को भारत के संविधान की तरफ से प्रदान किए गए मौलिक अधिकार पूर्ण रूप से प्राप्त होंगे। सीएए सहित कोई भी कानून इन अधिकारों को नहीं छीन सकता। इसके विरूद्ध दुष्प्रचार का अभियान चलाया जा रहा है। सीएए मुस्लिम नागरिकों सहित किसी भी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करेगा। 1964 और 1974 में प्रधानमंत्री स्तर पर समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद भारत ने भारतीय मूल के 4.61 लाख तमिलों को नागरिकता प्रदान की है।



इस समय केंद्रीय और राज्य सरकार की राजसहायता और अनुदानों पर 95 हजार श्रीलंकाई तमिल, तमिलनाडु में रह रहे हैं। वे जब भी पात्र होंगे, तब भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

 

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