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Home Ministry: 'तीन आपराधिक कानूनों की अधिसूचना 26 जनवरी से पहले'; पुलिस व जांच अधिकारियों को ट्रेनिंग मिलेगी
Tue, 02 Jan 2024 07:41 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 02 Jan 2024 07:41 PM IST
सार
Home Ministry: संसद के शीतकालीन सत्र में पारित तीन आपराधिक कानूनों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। अब गृह मंत्रालय ने कहा है कि 26 जनवरी से पहले इन कानूनों को अधिसूचित कर दिया जाएगा। औपचारिक रूप से अधिसूचना जारी होने के बाद अंग्रेजों के जमाने के तीन कानून- IPC, Cr.PC और भारतीय साक्ष्य अधिनियम इतिहास बन जाएंगे।
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गृह मंत्रालय
- फोटो : फाइल
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विस्तार
संसद से हाल ही में पारित तीनों कानूनों- भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य कानून (BSK) को 26 जनवरी से पहले अधिसूचित किया जा सकता है। गृह मंत्रालय तीनों आपराधिक कानूनों के लागू होने की अधिसूचना जारी कर सकती है। बता दें कि इन कानूनों के लागू होने के बाद ब्रिटिश हुकूमत के दौर से चले आ रहे 125 साल से अधिक पुराने कानून- भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.PC) और एविडेंस एक्ट को बदला गया है।
फॉरेंसिक लैब के लिए 900 गाड़ियां मिलेंगी
सरकार का दावा है कि नए कानूनों के लागू होने के बाद तीन साल के भीतर मामलों का निपटारा हो जाएगा। पीड़ित को तीन साल के भीतर न्याय दिलाना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को 90 दिनों के भीतर डिजिटल तरीके से सबूत और जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। फोकस फोरेंसिक साक्ष्य पर होगा। पुलिस और फॉरेसिंग एजेंसी को 900 FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) वैन दिए जाएंगे।
अधिकारियों को ट्रेनिंग दिलाएगी सरकार
गृह मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि गृह मंत्रालय अधिसूचना जारी करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सूत्रों के अनुसार, तीन कानूनों को अधिसूचित करने के तुरंत बाद, गृह मंत्रालय पुलिस अधिकारियों, जांचकर्ताओं और फॉरेंसिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा। प्रशिक्षण का मकसद नए कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। सभी राज्यों के पुलिसकर्मियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिए जाएंगे। आपराधिक मामलों में साक्ष्य-आधारित जांच जल्द पूरा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
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3000 अधिकारियों को ट्रेनिंग देने के लिए चुना जाएगा
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सूत्रों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि विभिन्न क्षेत्रों के 3,000 अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए नियुक्त किया जाएगा। इस प्रक्रिया को 'ट्रेनर-ट्रेनिंग' कार्यक्रम कहा जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यक्रम के बारे में गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जांच एजेंसियों और फॉरेंसिक विभागों के अधिकारियों को कानूनों की बदली गई धाराओं के अलावा अन्य अहम पहलुओं पर भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
भोपाल में होगा न्यायपालिका से जुड़ा प्रशिक्षण
सूत्रों ने कहा, देशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ने वाले लगभग 90 प्रतिशत अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें तीनों आपराधिक कानूनों के बारे में नौ महीने से एक वर्ष की अवधि के भीतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। अधिकारियों ने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े प्रशिक्षण के लिए गृह मंत्रालय परामर्श ले चुका है। ट्रेनिंग भोपाल अकादमी में होगी।
संसद के शीतकालीन सत्र में कब और कौन से विधेयक पारित हुए
गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में 21 दिसंबर को तीनों विधेयक पारित किए थे। इनके नाम- भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक हैं। अगले दिन यानी 22 दिसंबर को राज्यसभा से भी तीनों विधेयकों को मंजूरी मिल गई। करीब 72 घंटे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को विधेयकों पर अपनी सहमति दी और यह कानून लागू हो गए। तीनों नए कानून, भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.PC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की जगह लेंगे।
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फॉरेंसिक लैब के लिए 900 गाड़ियां मिलेंगी
सरकार का दावा है कि नए कानूनों के लागू होने के बाद तीन साल के भीतर मामलों का निपटारा हो जाएगा। पीड़ित को तीन साल के भीतर न्याय दिलाना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को 90 दिनों के भीतर डिजिटल तरीके से सबूत और जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। फोकस फोरेंसिक साक्ष्य पर होगा। पुलिस और फॉरेसिंग एजेंसी को 900 FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) वैन दिए जाएंगे।
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अधिकारियों को ट्रेनिंग दिलाएगी सरकार
गृह मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि गृह मंत्रालय अधिसूचना जारी करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। सूत्रों के अनुसार, तीन कानूनों को अधिसूचित करने के तुरंत बाद, गृह मंत्रालय पुलिस अधिकारियों, जांचकर्ताओं और फॉरेंसिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करेगा। प्रशिक्षण का मकसद नए कानूनों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना है। सभी राज्यों के पुलिसकर्मियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिए जाएंगे। आपराधिक मामलों में साक्ष्य-आधारित जांच जल्द पूरा करने पर भी जोर दिया जाएगा।
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3000 अधिकारियों को ट्रेनिंग देने के लिए चुना जाएगा
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सूत्रों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि विभिन्न क्षेत्रों के 3,000 अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए नियुक्त किया जाएगा। इस प्रक्रिया को 'ट्रेनर-ट्रेनिंग' कार्यक्रम कहा जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम कार्यक्रम के बारे में गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जांच एजेंसियों और फॉरेंसिक विभागों के अधिकारियों को कानूनों की बदली गई धाराओं के अलावा अन्य अहम पहलुओं पर भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
भोपाल में होगा न्यायपालिका से जुड़ा प्रशिक्षण
सूत्रों ने कहा, देशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ने वाले लगभग 90 प्रतिशत अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें तीनों आपराधिक कानूनों के बारे में नौ महीने से एक वर्ष की अवधि के भीतर ट्रेनिंग देने की जरूरत है। अधिकारियों ने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े प्रशिक्षण के लिए गृह मंत्रालय परामर्श ले चुका है। ट्रेनिंग भोपाल अकादमी में होगी।
संसद के शीतकालीन सत्र में कब और कौन से विधेयक पारित हुए
गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में 21 दिसंबर को तीनों विधेयक पारित किए थे। इनके नाम- भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक हैं। अगले दिन यानी 22 दिसंबर को राज्यसभा से भी तीनों विधेयकों को मंजूरी मिल गई। करीब 72 घंटे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को विधेयकों पर अपनी सहमति दी और यह कानून लागू हो गए। तीनों नए कानून, भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.PC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की जगह लेंगे।