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तीन तलाक : SC के फैसले पर पाक बोला-भारत हमसे पीछे
amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट
Updated Tue, 22 Aug 2017 07:59 PM IST
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भारत में तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को पूरी दुनिया के मीडिया ने अपने ऑनलाइन संस्करण में प्रमुख स्थान दिया है। अमेरिकी मीडिया ने इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताया है तो ब्रिटेन में इस फैसले को तलाक की शिकार बनी महिलाओं के लिए राहत भरी खबर बताया है।
अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। अखबार ने लिखा है कि इससे मुस्लिम औरतों के साथ न्याय हो सकेगा। जबकि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने भी इस खबर को प्रमुख स्थान दिया है।
जर्मनी की रेडियो सेवा ‘दाइचे वेले’ ने अपनी वेबसाइट पर इसे सबसे पहली खबर बनाते हुए लिखा - ‘तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का फैसला भले ही एकमत से न आया हो लेकिन यह निर्णय मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की पुष्टि करता है।’ ब्रिटेन के ‘इंडिपेंडेंट’ ने तलाक की शिकार महिलाओं के लिए निजात और राहत भरी जीत बताया।
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‘बीबीसी’ ने इतिहासकार राणा सफवी के हवाले से फैसले पर नजरिया पेश करते हुए शीर्षक दिया है - ‘तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस्लाम के हक में।’ इसके मुताबिक त्वरित तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तलाक-ए-बिद्दत पर दिया गया है, और बिद्दत का मतलब ही होता है ‘इनोवेशन’। यानी यह शब्द कुरान में नहीं था और बाद में लाया गया। बीबीसी के मुताबिक कुरान में या पैगंबर-ए-इस्लाम के समय तुरंत तलाक था ही नहीं। उसने इस्लाम के हक में यह फैसला बताया।
पाक मीडिया ने कहा कम से कम इस मामले में भारत हमसे पीछे है
पाकिस्तानी अखबारों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रमुख स्थान दिया है। ‘डॉन’ ने तीन तलाक को विवादित इस्लामिक प्रैक्टिस बताते हुए फैसले को ऐतिहासिक बताया।
‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ और ‘द नेशन’ ने 3-2 से आए शीर्ष कोर्ट के इस फैसले पर जजों के अलग-अलग नजरिये को प्रमुखता दी है। जबकि पाक उर्दू अखबार ‘नवा-ए-वक्त’ ने कहा है कि - ‘कम से कम भारत इस मामले में यह नहीं कह सकेगा कि वह पाकिस्तान से आगे है, क्योंकि पाक में यह 1956 में ही प्रतिबंधित हो गया था।’ ‘रोजनामचा’ ने सवाल उठाया कि - ‘क्या वाकई भारत में अब तक तीन तलाक हो रहे थे।’
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अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। अखबार ने लिखा है कि इससे मुस्लिम औरतों के साथ न्याय हो सकेगा। जबकि ‘वाशिंगटन पोस्ट’ ने भी इस खबर को प्रमुख स्थान दिया है।
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जर्मनी की रेडियो सेवा ‘दाइचे वेले’ ने अपनी वेबसाइट पर इसे सबसे पहली खबर बनाते हुए लिखा - ‘तीन तलाक पर शीर्ष अदालत का फैसला भले ही एकमत से न आया हो लेकिन यह निर्णय मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की पुष्टि करता है।’ ब्रिटेन के ‘इंडिपेंडेंट’ ने तलाक की शिकार महिलाओं के लिए निजात और राहत भरी जीत बताया।
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‘बीबीसी’ ने इतिहासकार राणा सफवी के हवाले से फैसले पर नजरिया पेश करते हुए शीर्षक दिया है - ‘तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस्लाम के हक में।’ इसके मुताबिक त्वरित तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तलाक-ए-बिद्दत पर दिया गया है, और बिद्दत का मतलब ही होता है ‘इनोवेशन’। यानी यह शब्द कुरान में नहीं था और बाद में लाया गया। बीबीसी के मुताबिक कुरान में या पैगंबर-ए-इस्लाम के समय तुरंत तलाक था ही नहीं। उसने इस्लाम के हक में यह फैसला बताया।
पाक मीडिया ने कहा कम से कम इस मामले में भारत हमसे पीछे है
पाकिस्तानी अखबारों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रमुख स्थान दिया है। ‘डॉन’ ने तीन तलाक को विवादित इस्लामिक प्रैक्टिस बताते हुए फैसले को ऐतिहासिक बताया।
‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ और ‘द नेशन’ ने 3-2 से आए शीर्ष कोर्ट के इस फैसले पर जजों के अलग-अलग नजरिये को प्रमुखता दी है। जबकि पाक उर्दू अखबार ‘नवा-ए-वक्त’ ने कहा है कि - ‘कम से कम भारत इस मामले में यह नहीं कह सकेगा कि वह पाकिस्तान से आगे है, क्योंकि पाक में यह 1956 में ही प्रतिबंधित हो गया था।’ ‘रोजनामचा’ ने सवाल उठाया कि - ‘क्या वाकई भारत में अब तक तीन तलाक हो रहे थे।’