हिन्दू धर्माचार्य बोले, अध्यादेश लाकर हो राममंदिर निर्माण, जानिए किसने क्या कहा
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रामजन्मभूमि / बाबरी मस्जिद विवाद मामले में एक बार फिर सुनवाई टलने से रामनगरी के संत-धर्माचार्यों सहित पक्षकार मायूस हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन माह तक के लिए सुनवाई टाल दिए जाने के बाद विहिप व संतों ने कहा कि अब कानून ही एकमात्र विकल्प है। अध्यादेश लाकर जल्द राममंदिर का निर्माण हो। हिंदू पक्षकारों का भी कहना है कि अब अध्यादेश ही एकमात्र विकल्प बचा है जबकि, मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कोर्ट स्वतंत्र वह जो भी निर्णय देगा हम मानेंगे।
वहीं राममंदिर निर्माण के लिए अनशन कर चुके महंत परमहंस दास ने एक बार फिर आमरण अनशन का एलान कर दिया है। परमहंस ने कहा कि मैंने एक अक्तूबर से राममंदिर निर्माण के लिए अनशन शुरू किया था। सरकार ने जबरन अनशन स्थल से उठाया और अनशन तोड़वा दिया। बाद में सीएम योगी से मुलाकात हुई तो मैंने मांग की कि प्रधानमंत्री से वार्ता कराई जाए। योगी के आश्वासन पर मैंने अनशन समाप्त किया। लेकिन अब तक मुख्यमंत्री ने अपना वादा नहीं निभाया है। परमहंस ने कहा कि सरकार को लग रहा है कि मैं मान गया हूं।
सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास था कि नियमित सुनवाई हुई तो मामला जल्द हल हो जाएगा लेकिन अब फिर तारीख मिलने लगी है। अब इंतजार नहीं होगा। जिस तरह एससी-एसटी पर कानून बना है उसी तरह राममंदिर पर कानून बनाकर सरकार मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं होता है तो वह छह दिसंबर से फिर आमरण अनशन पर बैठेंगे। इस बार मेरे साथ अन्याय किया जाएगा तो मैं आत्मदाह करने को मजबूर हो जाऊंगा, मैं समझ जाऊंगा कि हम हिंदू समाज को न्याय मिलने वाला नहीं है।
मोदी काल में ही होगा राममंदिर का निर्माण : महंत नृत्यगोपाल दास
मोदी काल में ही होगा राममंदिर का निर्माण : महंत नृत्यगोपाल दास
रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि न्यायालय की अपनी प्रक्रिया है। हमें पीएम मोदी व सीएम योगी पर पूर्ण विश्वास है। भगवान राम की भी अपनी अलग कोर्ट है। उनकी कृपा से जल्द राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। हमें पूर्ण विश्वास है कि मोदी एवं योगी काल में ही राममंदिर का निर्माण हो जाएगा।
राममंदिर कोर्ट का नहीं आस्था का विषय: सुरेश दास
दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि राममंदिर कोर्ट का नहीं आस्था का विषय है। अब इंतजार लंबा हो चला है, बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो रही है। कहा कि यह दुर्भाग्य है कि भगवान राम को न्याय के लिए कोर्ट में खड़ा कर दिया है। सरकार को तत्काल कानून बनाकर राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
प्रधानमंत्री स्वयं लें मामले का संज्ञान : महंत रामदास
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि राममंदिर हिंदू भावना से जुड़ा मामला है। कोर्ट का रुख देखते हुए अब यही प्रतीत हो रहा है कि कानून बनाना ही एक मात्र रास्ता है। इस मामले को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वयं संज्ञान में लेना चाहिए और राममंदिर निर्माण का मार्ग हिंदु जनभावनाओं के अनुरूप शीघ्र प्रशस्त करने की आवश्यकता है।
डगमगा रही है आस्था : राजकुमार दास
अधिकारी रामबल्लभाकुंज राजकुमार दास ने कहा कि तीन-तीन माह की तारीख पड़ना निराशाजनक है। अब सनातन धर्मावलंबियों की आस्था डगमगा रही है। हमें आशा थी कि अब सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई होगी और शीघ्र ही बहु प्रतीक्षित मामले का हल हो जाएगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रुख से अब मामले के लटने की उम्मीद बन गई है।
तारीख पड़ना कोई नई बात नहीं : इकबाल
बाबरी मस्जिद के मुद्दई स्व.हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल अंसारी ने कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि हमारे वालिद भी चाहते थे कि मामला जल्द हल हो, हम भी यही चाहते हैं। तारीख पड़ना कोई नई बात नहीं है। यह अहम फैसला है, इस पर सोच विचार कर ही कोर्ट को सबूतों के आधार पर निर्णय देना है। जब भी निर्णय आएगा हम कोर्ट का फैसला मानेंगे।
कोर्ट का जो भी निर्णय आएगा मानेंगे : हाजी महबूब
बाबरी मस्जिद के पैरोकार हाजी महबूब ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर कुछ नहीं कहना है। जो भी निर्णय लिया है, उचित ही होगा। कहा कि हम आज भी कह रहे हैं कि मामला जल्द खत्म होना चाहिए, शीघ्र ही इसका समाधान हो जाए तो बेहतर है। सुप्रीम कोर्ट का हम सम्मान करते हैं, जो भी निर्णय जब भी आएगा हम उसका सम्मान करेंगे।
अब नहीं चलेगी तारीख पर तारीख : महंत धर्मदास
हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि कोर्ट तारीख पर तारीख दे रही है यह अच्छा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का रुख निराशाजनक है। यह हिंदु-मुसलमान का नहीं प्रापर्टी का विवाद है। जमीन किसकी है इस पर फैसला आना है। कहा कि अब तो वही हाल हो गया कि जाएं तो जाएं कहां? हम इस मामले में जल्द निर्णय चाहते थे, अब तो सरकार को ही कुछ करना होगा।
राममंदिर निर्माण में अब न हो देरी : दिनेंद्र दास
निर्मोही अखाड़ा की ओर से पक्षकार महंत दिनेंद्र दास का कहना है कि राममंदिर निर्माण में अब देरी नहीं होनी चाहिए। कहा कि हमें उम्मीद थी कि नियमित सुनवाई शुरू होगी और जल्द मामले का समाधान हो जाएगा। हमें अब और तारीख नहीं चाहिए, राममंदिर निर्माण में अब देरी उचित नहीं है।
न्याय की चौखट पर याची बनकर रह गए हैं रामलला : विहिप
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से निराशा हाथ लगी है। हमारी आशाएं अब क्षीण हो चुकी हैं। आखिर हिंदू समाज कब तक न्याय की धुरी पर चक्कर काटता रहेगा। कहा कि रामलला न्याय की चौखट पर याची बनकर रह गए हैं। अब तो मात्र एक रास्ता बचा है। केंद्र सरकार संघ चालक एवं साधु-संतों की मंशा अनुसार अध्यादेश लाकर राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करे।