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हिंद देवी : अहमदाबाद के शिक्षक ने बनाई थी भारत माता की पहली तस्वीर, जानिए पूरी कहानी

Thu, 15 Aug 2019 05:20 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 15 Aug 2019 05:20 AM IST
सार

  • 1906 में अहमदाबाद के शिक्षक ने बनाई थी पहली तस्वीर, नाम दिया था 'हिंद देवी'
  • इसी तस्वीर ने अखंड भारत की संकल्पना को पहली बार दिया था साकार स्वरूप
  • आजादी की लड़ाई के दौरान राजा रवि वर्मा की प्रेस ने छापी थीं तस्वीर की हजारों प्रतियां
  • तस्वीर से प्रभावित होकर रवींद्रनाथ टैगोन ने की थी 'अयि भूवनमनो मोहिनी' की रचना

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Hind Devi was the first painting of Bharat Mata painted by a teacher Maganlal Sharma
भारत माता की पहली तस्वीर 'हिंद देवी' - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

स्कूल-कॉलेज से लेकर कई कार्यक्रमों में आपने भारत माता की तस्वीर तो जरूर देखी होगी। लेकिन, अगर यह पूछा जाए कि भारत माता की पहली तस्वीर कब बनी थी और किसने बनाई थी तो शायद की कोई इसका जवाब दे पाए।

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हम आपको बताने जा रहे हैं भारत माता की पहली तस्वीर का किस्सा... भारत माता की पहली तस्वीर बनाई थी अहमदाबाद के एक शिक्षक मगनलाल शर्मा ने साल 1306 में भारत माता की पहली तस्वीर बनाई थी। इस तस्वीर का नाम रखा गया था 'हिंद देवी'। आजादी की लड़ाई के दौरान यही तस्वीर अखंड भारत का प्रतीक बनी थी। 
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प्राथमिक शाला में शिक्षक मगनलाल शर्मा द्वारा बनाई गई भारत माता की इस तस्वीर को राजा रवि वर्मा की जर्मनी स्थित प्रेस में छापा गया था। इस तस्वीर की हजारों तस्वीरें तह प्रकाशित की गई थीं। इस तस्वीर में भारत माता यानी हिंद माता का सिर मुकुट कश्मीर में है तो पैर श्रीलंका को स्पर्श कर रहे हैं।
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दाएं हाथ में पकड़ा त्रिशूल सिंध प्रदेश से लेकर अफगानिस्तान तक जा रहा है तो साड़ी पश्चिम बंगाल तक लहरा रही है। हिंद देवी के केश हिमालय की चोटियों से लेकर पश्चिम से पूर्व की ओर लहरा रहे हैं। 

प्रभावित होकर रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था गीत

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसकी चर्चा गांवों से लेकर महलों तक होती थी। कहा जाता है कि हिंद देवी की तस्वीर से प्रभावित होकर महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने साल 1930 में प्रसिद्ध गीत 'अयि भूवनमनो मोहिनी' की रचना की थी। अरविंद घोष ने इस तस्वीर के बारे में कहा था कि हिंद देवी की यह तस्वीर आजादी की लड़ाई में प्रेरणा देती है। वहीं, गुजरात के संत स्वामी आनंद ने अपनी पुस्तक 'संतोना अनुज' में लिखा था कि क्रांतिकारी कृपाशंकर पंडित और डॉ. हरिप्रसाद देसाई की प्रेरणा से मगनलाल शर्मा ने यह तस्वीर बनाई थी। 

मगनलाल ने हिंद देवी की तस्वीर के जरिए पहली बार अखंड भारत की संकल्पना को साकार स्वरूप दिया था। हालांकि, इससे पहले साल 1873 में किरण चंद्र बनर्जी ने 'भारत माता' नामक एक नाटक तैयार किया था, लेकिन उनके पास कोई तस्वीर नहीं थी। 

'भारत माता मंदिर' का भी हुआ निर्माण, वाराणसी में बना था पहला मंदिर

भारत माता की तस्वीर की तरह ही भारत माता मंदिरों का भी निर्माण हुआ। देश के पहले भारत माता मंदिर का निर्माण साल 1936 में काशी (वाराणसी) में हुआ था। यहां पहले अभिषेक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया था। इस मंदिर का निर्माण बाबू शिव प्रसाद गुप्ता ने करवाया था। इस मंदिर के मुख्य द्वार पर पत्थरों से भारत का नक्शा बना हुआ है। 

बाबू शिव प्रसाद गुप्ता ने 1936 में काशी में भारत माता का मंदिर बनवाया था। यहां पहला अभिषेक महात्मा गांधी ने किया। इस मंदिर के मुख्य द्वार पर ही मार्बल से भारत का नक्शा बना हुआ है। वाराणसी के इंग्लिशिया लाइन और सिगरा चौराहे के बीच सिथित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के परिसर में यह मंदिर स्थित है। इसके निर्माण में करीब 10 लाख रुपये की लागत आई थी।

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