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असम: वकालत से सियासत तक और अब मुख्यमंत्री, जानें हिमंत बिस्व सरमा का पूरा राजनीतिक सफरनामा

Mon, 10 May 2021 12:18 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 10 May 2021 12:18 PM IST
सार

असम के नए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा होंगे। गुवाहाटी में भारतीय जनता पार्टी के नेताओ के बीच हुई बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए उनके नाम पर मुहर लग गई है।

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Himanta Biswa Sarma will be the new chief minister of Assam State elected as the leader of party
हिमंत बिस्व सरमा

विस्तार

असम में भारतीय जनता पार्टी की दोबारा वापसी के बाद अब मुख्यमंत्री के नाम से भी पर्दा उठ गया है। असम के नए मुख्यमंत्री भाजपा के नेता हिमंत बिस्व सरमा होंगे। गुवाहाटी में भाजपा विधायकों की बैठक में उनके नाम पर मुहर लग गई है। अब वो जल्द ही असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। हिमंत बिस्वा सरमा छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय थे। आइए शिक्षा, नौकरी से लेकर मुख्यमंत्री तक के उनके सफर के बारे में जानते हैं...

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भाजपा की जीत में हिमंत बिस्वा सरमा का योगदान
असम में भारतीय जनता पार्टी ने दोबारा अपनी सरकार बनाई लेकिन मुख्यमंत्री पद के लिए दो नेताओं के बीच कशमकश जारी रही। बाद में हिमंत बिस्वा सरमा और सर्बानंद सोनोवाल को दिल्ली बुलाया गया। दिल्ली बुलाए जाने के बाद दोनों नेताओं से अलग-अलग और फिर साथ बैठकर बात की गई। 
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बैठक के बाद से ऐसा माना जा रहा था कि हिमंत बिस्वा सरमा का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए भेजा जा सकता है। असम में भाजपा की दोबारा जीत के पीछे हिमंत बिस्वा सरमा के प्रचंड प्रचार को एक वजह माना जा रहा है। 
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हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक परिचय
हिमंत बिस्वा सरमा के राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 1980 से हुई थी। उस समय वो छठी कक्षा में थे। उन्होंने ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ज्वाइन की। इसके बाद उन्हें गुवाहाटी यूनिट का जनरल सेक्रेटरी बना दिया गया था। 1990 के दशक में वो कांग्रेस में शामिल हुए और पहली बार 2001 में जालुकबारी सीट से चुनाव लड़ा। 



अब वो लगातार पांचवीं बार जालुकबारी विधानसभा सीट से विधायक चुने जा रहे हैं। 2015 में उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी। 2016 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में हिमंत बिस्वा सरमा की अहम भूमिक रही। 2016 में असम जीतने के बाद उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का अध्यक्ष बना दिया गया था। जिसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भाजपा को सत्ता तक पहुंचाने का बड़ा काम किया था। 

वकालत से सियासत तक का सफर

कामरूप अकादमी से शुरुआती पढ़ाई करने के बाद हिमंत ने कॉटन कॉलेज गुवाहाटी में दाखिला लिया। पॉलिटिकल साइंस में स्नाकोत्तर किया और वो छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे। इसके बाद उन्होंने सरकारी लॉ कॉलेज से एलएलबी (कानून) और गुवाहाटी कॉलेज से पीएचडी की डिग्री ली। पांच साल तक उन्होंने गुवाहाटी कोर्ट में वकालत की। 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री तरूण गोगोई से विवाद के बाद उन्होंने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। 

राहुल गांधी के कुत्ते को लेकर छोड़ी थी कांग्रेस पार्टी
हिमंत बिस्वा सरमा को राहुल गांधी के कुत्ते के प्रेम को तरजीह देना कभी पसंद नहीं आया। एक बार सरमा ने खुद ट्वीट कर बताया कि जब कांग्रेस उपाध्यक्ष के साथ असम के अहम मुद्दों पर बातचीत करना चाहते थे तो वो उस वक्त अपने कुत्ते को बिस्किट खिला रहे होते थे, जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आता था, इसलिए उन्होंने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। 

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