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High Court: कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले का विहिप ने किया स्वागत, पूरे देश में गौहत्या पर रोक की मांग की
Sat, 23 May 2026 09:56 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Sat, 23 May 2026 09:56 PM IST
सार
कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में पशु बलि पर रोक लगाने वाले सरकारी आदेश को सही ठहराया है। विश्व हिंदू परिषद ने इस फैसले का स्वागत करते हुए पूरे देश में गौहत्या पर प्रतिबंध की मांग की।
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सुरेंद्र जैन, संयुक्त महासचिव, विहिप
- फोटो : ANI
विस्तार
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार के पशु बलि से जुड़े आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया है। यह आदेश ईद-उल-अजहा के दौरान पशु बलि को नियंत्रित करने के लिए दिया गया था। विहिप ने उन राज्यों से भी कानून बनाने की अपील की है जहां अभी तक गौहत्या पर प्रतिबंध नहीं है।
क्या बोले विहिप के संयुक्त महासचिव?
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक वीडियो संदेश में हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश से गौहत्या का पाप हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार के नोटिस में साफ कहा गया है कि बिना 'फिटनेस सर्टिफिकेट' के किसी भी जानवर की बलि नहीं दी जाएगी। इसमें गाय, बैल, बछड़े, सांड और भैंस जैसे जानवर शामिल हैं। पशु मालिकों को अधिकारियों से यह प्रमाण पत्र लेना होगा कि जानवर बलि के लिए फिट है।
जैन ने दावा किया कि कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि गौहत्या मुस्लिम समुदाय का कोई धार्मिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिन राज्यों ने गौहत्या पर रोक लगाई है, उनका फैसला सही है। उन्होंने राज्यों से पूछा कि वे गौहत्या का समर्थन करते हैं या संविधान के साथ खड़े हैं। विहिप नेता ने कहा कि भारत के लगभग तीन-चौथाई हिस्से में गौहत्या पर पहले से ही रोक है। उन्होंने पूरे देश में इसे लागू करने की मांग दोहराई ताकि हिंदू भावनाओं और संविधान का सम्मान हो सके।
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जैन समुदाय विशेष नेताओं की आलोचना की
उन्होंने कुछ समुदाय विशेष नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने समुदाय को उकसा रहे हैं। जैन के अनुसार, दुनिया में कहीं भी धर्म गौहत्या का आदेश नहीं देता, तो फिर भारत में ऐसा क्यों हो रहा है? उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन और हिंदू भावनाओं का अपमान बताया। विहिप और बजरंग दल ने कहा है कि वे कानून को पूरी तरह लागू करवाएंगे। बजरंग दल की टीमें ईद-उल-अजहा के दौरान निगरानी रखेंगी ताकि गौहत्या को रोका जा सके।
पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें बिना सर्टिफिकेट के बलि देने पर सजा की चेतावनी दी गई है। साथ ही, खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह नोटिस 2018 के एक पुराने आदेश को लागू करने के लिए है, इसलिए इस पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।
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क्या बोले विहिप के संयुक्त महासचिव?
विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने एक वीडियो संदेश में हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश से गौहत्या का पाप हमेशा के लिए खत्म होना चाहिए। पश्चिम बंगाल सरकार के नोटिस में साफ कहा गया है कि बिना 'फिटनेस सर्टिफिकेट' के किसी भी जानवर की बलि नहीं दी जाएगी। इसमें गाय, बैल, बछड़े, सांड और भैंस जैसे जानवर शामिल हैं। पशु मालिकों को अधिकारियों से यह प्रमाण पत्र लेना होगा कि जानवर बलि के लिए फिट है।
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जैन ने दावा किया कि कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि गौहत्या मुस्लिम समुदाय का कोई धार्मिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिन राज्यों ने गौहत्या पर रोक लगाई है, उनका फैसला सही है। उन्होंने राज्यों से पूछा कि वे गौहत्या का समर्थन करते हैं या संविधान के साथ खड़े हैं। विहिप नेता ने कहा कि भारत के लगभग तीन-चौथाई हिस्से में गौहत्या पर पहले से ही रोक है। उन्होंने पूरे देश में इसे लागू करने की मांग दोहराई ताकि हिंदू भावनाओं और संविधान का सम्मान हो सके।
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जैन समुदाय विशेष नेताओं की आलोचना की
उन्होंने कुछ समुदाय विशेष नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने समुदाय को उकसा रहे हैं। जैन के अनुसार, दुनिया में कहीं भी धर्म गौहत्या का आदेश नहीं देता, तो फिर भारत में ऐसा क्यों हो रहा है? उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन और हिंदू भावनाओं का अपमान बताया। विहिप और बजरंग दल ने कहा है कि वे कानून को पूरी तरह लागू करवाएंगे। बजरंग दल की टीमें ईद-उल-अजहा के दौरान निगरानी रखेंगी ताकि गौहत्या को रोका जा सके।
पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसमें बिना सर्टिफिकेट के बलि देने पर सजा की चेतावनी दी गई है। साथ ही, खुले सार्वजनिक स्थानों पर पशु बलि को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह नोटिस 2018 के एक पुराने आदेश को लागू करने के लिए है, इसलिए इस पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है।