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High Court: 'कानून की सीमा रह कर ही दें बयान'; राज्यपाल पर ममता के बयान मामले में हाईकोर्ट का निर्देश

Fri, 26 Jul 2024 03:47 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा झा Updated Fri, 26 Jul 2024 03:47 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बारे में बयान देने की अनुमति दी है। लेकिन इस शर्त पर कि बयान कानून के दायरे में हों। दरअसल, सीएम ममता और टीएमसी नेता कुणाल घोष ने खंडपीठ के समक्ष एकल पीठ के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। 

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High Court: 'Make statements within limits of law'; HC's instruction Mamta
कलकत्ता हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल में राज्य और राज्य सरकार के बीच मतभेद चल रहा है। दरअसल राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर कथित यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। इस आरोप के बाद मुख्यमंत्री ने 27 जून को विवादित टिप्पणी की थी। यही नहीं उन्होंने विधायकों का शपथ ग्रहण विधानसभा में कराने की मांग की। जबकि राज्यपाल राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करना चाहते थे। 
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बारे में बयान दे सकती हैं, बशर्ते वे कानून के अनुरूप हों। बनर्जी और टीएमसी नेता कुणाल घोष ने एकल पीठ के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की, जिसमें बनर्जी और तीन अन्य को बोस के खिलाफ कोई अपमानजनक या गलत बयान नहीं देने का निर्देश दिया गया था। राज्यपाल ने ममता बनर्जी के विवादित बयान के बाद उन पर, टीएमसी नेता कुणाल घोष और दो विधायकों सायंतिका बनर्जी और रेयात हुसैन सरकार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। वहीं ममता बनर्जी ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी है। दरअसल कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णा राव ने मंगलवार को राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित अन्य तृणमूल कांग्रेस नेताओं को विवादित टिप्पणियों से परहेज करने को कहा था। जज ने इस मामले में ममता सहित चारों तृणमूल नेताओं को 14 अगस्त तक राज्यपाल के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कोई भी आपत्तिजनक या गलतबयानी नहीं करने का अंतरिम निर्देश भी दिए थे।
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इसको चुनौती देते हुए खंडपीठ के समक्ष अपील मुख्यमंत्री ने दायर की थी। जिसमें शुक्रवार को न्यायमूर्ति आईपी मुखर्जी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को संशोधित किया करते हुए निर्देश दिया कि बनर्जी और घोष राज्यपाल के बारे में बयान देने के लिए स्वतंत्र होंगे। लेकिन शर्ते ये है कि वह बयान देश के कानून के अनुरूप हों और अपमानजनक न हों।
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न्यायमूर्ति बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसके लिए सबसे अहम होती है। कानून उसे इसकी रक्षा करने की शक्ति देता है। वहीं दूसरी ओर, भारत के प्रत्येक नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की जाती है। जिसका हनन नहीं किया जा सकता। हालांकि इस स्वतंत्रता के लिए कुछ प्रतिबंध भी हैं। अदालत ने कहा कि जनता के प्रत्येक सदस्य को सच्चाई जानने का अधिकार है और सभी को सच्चाई सामने लाने का अधिकार है। 
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