फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Hearing of Ayodhya dispute case in supreme court, Know 10 points

अयोध्या : जो बाबर ने किया, वह अब बदल नहीं सकते: पढ़ें सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा

Wed, 06 Mar 2019 12:42 PM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अजय सिंह Updated Wed, 06 Mar 2019 12:42 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Hearing of Ayodhya dispute case in supreme court, Know 10 points
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को मध्यस्थता के जरिये सुलझाया जा सकता है या नहीं, इस पर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को संबंधित पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस पर आदेश बाद में सुनाया जायेगा। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में संविधान पीठ ने पक्षकारों की दलीलें सुनीं। कई हिंदू और मुस्लिम संस्थाएं मामले में पक्षकार हैं। आइए जानते हैं कि सुनवाई से जुड़ी अहम बातें :

 
loader
 
  • अयोध्या मामले में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
  • मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पक्षों से मध्यस्थ और मध्यस्थों के पैनल के नाम का सुझाव मांगा है। 
  • रामलला की ओर से कहा गया है कि अयोध्या का अर्थ है राम जन्मभूमि। मस्जिद किसी दूसरे स्थान पर बन सकती है। ये मामला बातचीत से हल नहीं हो सकता।
  • हिंदू महासभा ने कोर्ट में कहा है कि वह मध्यस्थता के लिए इसलिए तैयार नहीं है क्योंकि वह चाहते हैं कि मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा जाए, इससे पहले नोटिस जरूरी है। उनका कहना है कि ये उनकी जमीन है इसलिए वह मध्यस्थता को तैयार नहीं है।
  • मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील राजीव धवन ने कहा, "मुस्लिम याचिकाकर्ता मध्यस्थता और समझौते के लिए तैयार हैं।"
  • जस्टिस एसए बोबडे ने सुनवाई के दौरान कहा कि जो पहले हुआ उसपर हमारा नियंत्रण नहीं है, अब विवाद क्या है हम उसपर बात कर रहे हैं।
  • जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि जब मध्यस्थता की प्रक्रिया चल रही हो तो उसकी रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए। गोपनीयता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
  • जस्टिस एसए बोबडे ने सुनवाई के दौरान कहा कि "जो अतीत में हुआ उसपर हमारा कोई निंयत्रण नहीं है, किसने आक्रमण किया, कौन राजा था, मंदिर था या मस्जिद। हमें वर्तमान विवाद के बारे में पता है। हम केवल विवाद को सुलझाने को लेकर चिंतित हैं।"
  • सुनवाई के दौरान जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, यह केवल जमीन विवाद नहीं बल्कि भावनाओं, धर्म और विश्वास से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि इसमें मध्यस्थ नहीं बल्कि मध्यस्थों का एक पैनल होना चाहिए।
  • जस्टिस भूषण ने कहा कि अगर पब्लिक नोटिस दिया जाएगा तो मामला कई सालों तक चलेगा। वहीं जो मध्यस्थता होगी वो कोर्ट की निगरानी में होगी।
  • मुस्लिम पक्ष ने कहा कि ये कोर्ट के ऊपर है कि मध्यस्थ कौन हो? ये इन कमरा हो। जिसपर जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह गोपनीय होना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed