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आमरण अनशन पर बैठी शहीद की पत्नी-मां समेत पांच की तबीयत बिगड़ी

Sun, 21 May 2017 05:03 PM IST
amarujala.com, Presented by: विकास जांगड़ा
amarujala.com, Presented by: विकास जांगड़ा Updated Sun, 21 May 2017 05:03 PM IST
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health of martyr mother and wife fall down during strike
आमरण अनशन करता शहीद का परिवार
सीएम योगी को पनसुखा गांव बुलाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठीं शहीद की मां, पत्नी समेत पांच की तबीयत दूसरे दिन शनिवार को बिगड़ गई। दोपहर में मां और पत्नी बेहोश हो गई थीं, जबकि साथ बैठे ग्रामीण को सिरदर्द की शिकायत थी।
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सूचना के तकरीबन तीन घंटे बाद डाक्टरों की टीम गांव पहुंची। इस बीच मां को तो होश आ गया था, जबकि पत्नी बेहोश ही थी। जांच में सभी का बीपी कम निकला। लेकिन तीनों ने इलाज कराने से इंकार कर दिया। इधर, शाम तकरीबन छह बजे शहीद के पिता ब्रह्मपाल और चाचा चंद्रपाल की भी तबीयत बिगड़ गई थी।
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अक्तूबर 2016 में राजौरी में पनसुखा निवासी सुधीश कुमार शहीद हो गए थे। इसके बाद तत्कालीन सत्तारूढ़ दल सपा और विपक्षी दलों के नेताओं ने गांव के विकास और परिजनों की मदद के तमाम दावे किए थे, मगर सात माह बाद भी वादे पूरे नहीं हुए।
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शुक्रवार को सीएम योगी को गांव बुलाने की मांग को लेकर शहीद की समाधि पर परिजनों समेत 12 ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठ गए थे। दूसरे दिन शनिवार को पहले एसडीएम राशिद अली खां, सीओ बीपी सिंह बालियान, बाद में जिला पंचायत सदस्य हरेंद्र सिंह, एसपी रवि शंकर छवि, एडीएम आरपी यादव भी मौके पर पहुंचे। अफसरों ने रविवार को मुरादाबाद में शहीद के दो परिजनों की सीएम से मुलाकात कराने का प्रस्ताव दिया, लेकिन वे सीएम को गांव बुलाने की मांग पर अड़े रहे। 

इधर, दोपहर 12 बजे शहीद की पत्नी कविता देवी और मां हरवती की तबीयत बिगड़ गई। मां कुछ देर बाद होश में आ गईं, मगर पत्नी कविता को होश में नहीं लाया जा सका। वहीं एक ग्रामीण जिलेपाल को सिरदर्द की शिकायत थी।

सपा जिलाध्यक्ष फिरोज खां की सूचना पर एसडीएम ने चिकित्सकों की टीम गांव भेजी। इस पर तीन बजे के बाद उसे होश में लाया जा सका। वहीं शाम छह बजे पिता ब्रह्मपाल और चाचा चंद्रपाल की भी तबीयत बिगड़ गई थी। 

ये है पूरा मामला

health of martyr mother and wife fall down during strike
फाइल फोटो
संभल जिले के गांव पनसुखा मिलक निवासी ब्रह्मपाल सिंह के बेटे सुधीश कुमार भारतीय सेना में सैनिक थे। भारत-पाक सीमा पर राजौरी में 16 अक्तूबर 2016 को शाम को करीब 4.00 बजे शहीद हो गए थे।

इस दरम्यान परिजनों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाने की मांग को लेकर अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था, हालांकि सीएम गांव नहीं आए थे।

बाद में गांव पहुंचे भाजपाइयोंने इसे मुद्दा बनाया था। शहीद के परिवार को आर्थिक मदद दिलाने और गांव के विकास के लिए तमाम वादे किए थे, मगर वे वादे पूरे नहीं हुए। अब भाजपा की सरकार बन चुकी है पर गांव में सड़क बनवाने, गैस एजेंसी दिलाने आदि के वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं।

इन्हीं वादों को याद दिलाने को लेकर शुक्रवार को सुबह 8.00 बजे से शहीद की पत्नी कविता, मां हरवती, पिता ब्रह्मपाल, भाई अनिल, चाचा सुधीर, भाई मनोज, चाचा डा. मुनिदेव, चाचा चंद्रपाल, चाचा हेमराज, चाचा प्रमोद, दादा जागन सिंह, भाई बृजेश शहीद की समाधि पर आमरण अनशन कर रहे हैं।
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