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Bombay High Court: क्या मंत्रालय और राजभवन के बाहर भी लगेंगे ठेले ? बॉम्बे हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
Mon, 22 Jul 2024 02:34 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: बशु जैन
Updated Mon, 22 Jul 2024 02:34 PM IST
सार
पिछले साल हाईकोर्ट ने शहर में अवैध फेरी वालों और ठेलों के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने बृन्हमुंबई नगर निगम और पुलिस को अवैध फेरीवालों के खिलाफ की गई कार्रवाई और समस्या दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए शपथ पत्र दाखिल करने के लिए कहा था।
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बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को अवैध हाथ ठेलों और फेरीवालों से हो रही समस्या दूर करने में असमर्थ पुलिस और अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या ठेले वालों को मंत्रालय और राजभवन के बाहर खडे़ होने की अनुमति दी जाए? हाईकोर्ट की न्यायाधीश एमएस सोनका और कमल खाता की खंडपीठ ने कहा कि अवैध फेरी वाले वाले और ठेले बड़ी समस्या बन रहे हैं। इसका स्थायी समाधान खोजने की जरूरत है। अधिकारी असहाय होने का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि इसे रोकने की जरूरत है।
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पिछले साल हाईकोर्ट ने शहर में अवैध फेरी वालों और ठेलों के मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने बृन्हमुंबई नगर निगम और पुलिस को अवैध फेरीवालों के खिलाफ की गई कार्रवाई और समस्या दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए शपथ पत्र दाखिल करने के लिए कहा था।
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कोर्ट ने कहा कि अफसोस की बात है अधिकारी और पुलिस लोगों की अवैध फेरी वालों और हाथठेला वालों की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं करते। क्या अधिकारी चाहते हैं कि लोग रोज-रोज कोर्ट आएं? यह लोगों का उत्पीड़न है और पूरी तरह से गलत है। नगर निगम, पुलिस लोगों की शिकायत पर कुछ नहीं करते, तो ऐसे में एक आम आदमी को क्या करना चाहिए? कोर्ट ने कहा कि अवैध फेरी वाले पूरी बेशर्मी से घूमते रहते हैं और पीड़ित इसे कानून के जरिये रोकना चाहते हैं। अब क्या मंत्रालय और राजभवन के सामने इनको खड़े होने दिया जाए, जहां पूरी सुरक्षा है। तब यह सब रुकेगा?
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सोमवार को बीएमसी के वकील अनिल सिंह और सरकारी वकील पूर्णिमा कंथरिया ने शपथ पत्र दाखिल करने के लिए और समय मांगा। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह गंभीर मामला है। अधिकारी अदालत के आदेश का पालन नहीं कर सकते, तो क्या अदालत को बंद कर देना चाहिए? कोर्ट ने शपथ पत्र दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का वक्त देते हुए 30 जुलाई को मामले की सुनवाई की अगली तारीख तय की।
कोर्ट ने सख्ती जताते हुए कहा कि जब पुलिस और अधिकारी अवैध फेरी वालों और हाथ ठेलों पर रोक नहीं लगा सकते तो क्या अब सेना को बुलाया जाए? पिछले महीने कोर्ट ने आदेश दिया था कि फेरी वालों और हाथ ठेलों ने सड़क और फुटपाथों को घेर लिया है। इससे लोगों के पैदल निकलने तक की जगह नहीं बचती है। लोगों को निकलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।