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West Bengal: हाईकोर्ट के जज बोले- ऐसे फैसले देना चाहता हूं, जिन्हें हमेशा याद किया जाए
Tue, 20 Sep 2022 04:27 AM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 20 Sep 2022 04:27 AM IST
सार
जस्टिस गंगोपाध्याय को मई 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया था। उन्होंने स्कूलों में कथित भर्ती भर्ती घोटाले के संबंध में सीबीआई को जांच के आदेश दिए हैं।
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जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनके कुछ फैसलों को हमेशा याद किया जाए। बता दें कि जस्टिस गंगोपाध्याय ने ही स्कूलों में कर्मचारियों की नियुक्ति में हुई कथित अनियमतताओं की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश देते हुए कई आदेश पारित किए हैं।
एक बंगाली न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू के दौरान जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि उन्होंने कभी भी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा, मैं कुछ ऐसे फैसले पारित करना चाहता हूं, लंबे समय बाद मैं नहीं रहूंगा तो कोई शोधकर्ता सामने आएगा और बताएगा कि एक जज ऐसा भी था जिसने ऐसे फैसले किए थे।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने इमोशनल होने की बात को भी स्वीकार किया और कहा कि वह लोगों की आंखों में आंसू नहीं देख सकते। उन्होंने कहा, भ्रष्टाचार जीवन का एक तरीका बन गया है और इसे लोगों के द्वारा स्वीकार भी किया जा रहा है।
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जस्टिस गंगोपाध्याय को मई 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया था। उन्होंने स्कूलों में कथित भर्ती भर्ती घोटाले के संबंध में सीबीआई को जांच के आदेश दिए हैं।
जज ने बताया कि सीबीआई जांच में देरी का पता चलते ही उन्होंने एजेंसी के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी क्योंकि अंधेरे में दूर तक कोई रोशनी नजर नहीं आ रही थी।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने आगे कहा कि उन्होंने एजेंसी के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर उपेन विश्वास के सुझाव पर मामलों की जांच के लिए सीबीआई को एक एसआईटी बनाने का आदेश दिया था।
हत्या के मामले में 11 आरोपियों की जमानत रद्द करने का फैसला बरकरार
केरल के पलक्कड़ जिले में साल 2018 में कथित तौर पर खाद्य सामग्री चुराने के आरोप में एक आदिवासी की हत्या कर दी गई थी। विशेष अदालत ने इस मामले में 11 आरोपियों की जमानत को रद्द करने का आदेश दिया था। वहीं अब हाईकोर्ट ने मन्नारक्कड़ विशेष अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि उन्होंने (आरोपियों) जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
स्थानीय लोगों के एक समूह ने 22 फरवरी 2018 को आदिवासी व्यक्ति मधु को पकड़ा था और उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसे बांधकर पीटा था। जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। मधु अट्टापडी का रहने वाला था।
जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने आदेश में कहा, आरोपी संख्या 2 से 7, 9, 10, 12, 15 और 16 द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण अस्पष्ट प्रकृति का है और आश्वस्त करने वाला नहीं है। इसे प्रमाणित करने के लिए रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है। यह साबित करनेके लिए कई सबूत हैं कि उन्होंने गवाहों से संपर्क किया है। कई बार फोन पर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और इस तरह उन्होंने दी गई जमानत का दुरुपयोग किया।
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एक बंगाली न्यूज चैनल के साथ इंटरव्यू के दौरान जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि उन्होंने कभी भी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा, मैं कुछ ऐसे फैसले पारित करना चाहता हूं, लंबे समय बाद मैं नहीं रहूंगा तो कोई शोधकर्ता सामने आएगा और बताएगा कि एक जज ऐसा भी था जिसने ऐसे फैसले किए थे।
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जस्टिस गंगोपाध्याय ने इमोशनल होने की बात को भी स्वीकार किया और कहा कि वह लोगों की आंखों में आंसू नहीं देख सकते। उन्होंने कहा, भ्रष्टाचार जीवन का एक तरीका बन गया है और इसे लोगों के द्वारा स्वीकार भी किया जा रहा है।
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जस्टिस गंगोपाध्याय को मई 2018 में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया था। उन्होंने स्कूलों में कथित भर्ती भर्ती घोटाले के संबंध में सीबीआई को जांच के आदेश दिए हैं।
जज ने बताया कि सीबीआई जांच में देरी का पता चलते ही उन्होंने एजेंसी के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी क्योंकि अंधेरे में दूर तक कोई रोशनी नजर नहीं आ रही थी।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने आगे कहा कि उन्होंने एजेंसी के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर उपेन विश्वास के सुझाव पर मामलों की जांच के लिए सीबीआई को एक एसआईटी बनाने का आदेश दिया था।
हत्या के मामले में 11 आरोपियों की जमानत रद्द करने का फैसला बरकरार
केरल के पलक्कड़ जिले में साल 2018 में कथित तौर पर खाद्य सामग्री चुराने के आरोप में एक आदिवासी की हत्या कर दी गई थी। विशेष अदालत ने इस मामले में 11 आरोपियों की जमानत को रद्द करने का आदेश दिया था। वहीं अब हाईकोर्ट ने मन्नारक्कड़ विशेष अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि उन्होंने (आरोपियों) जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया है।
स्थानीय लोगों के एक समूह ने 22 फरवरी 2018 को आदिवासी व्यक्ति मधु को पकड़ा था और उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसे बांधकर पीटा था। जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। मधु अट्टापडी का रहने वाला था।
जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने आदेश में कहा, आरोपी संख्या 2 से 7, 9, 10, 12, 15 और 16 द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण अस्पष्ट प्रकृति का है और आश्वस्त करने वाला नहीं है। इसे प्रमाणित करने के लिए रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है। यह साबित करनेके लिए कई सबूत हैं कि उन्होंने गवाहों से संपर्क किया है। कई बार फोन पर जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और इस तरह उन्होंने दी गई जमानत का दुरुपयोग किया।