मणिपुर: सत्ता के खेल में कहां चूक गई कांग्रेस
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अब जबकि गेंद राज्यपाल के पाले में है, सबसे बड़ा दल होने के बावजूद कांग्रेस मणिपुर सरकार बनाने का मौका खोती नजर आ रही है। 60 सदस्यों वाली मणिपुर की विधानसभा में कांग्रेस ने 28 सीटें हासिल कीं हैं जबकी भारतीय जनता पार्टी 21 सीटें जीतने में कामयाब हुई।
सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए 31 विधायकों के समर्थन की जरुरत है। मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्लाह ने राजभवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मलेन को सम्बोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस ने सबसे बड़े दल के रूप में सरकार बनाने का दावा जरूर पेश किया है। मगर समर्थन के दावे को मजबूती से साबित करने में कामायाब नहीं हुए हैं। उनका कहना है कि अपने विधायकों की सूची के साथ साथ कांग्रेस ने नेशनल पीपल्स पार्टी के दो विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी दी है।
हेपतुल्लाह का कहना था, "कांग्रेस ने एनपीपी के दो सदस्यों के समर्थन की चिट्ठी दी तो है मगर उनके साथ उस पार्टी का कोई नहीं आया। मैंने उनसे कहा कि जिनकी चिट्ठी वो दिखा रहे है वो कुछ देर पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधिमंडल के साथ व्यक्तिगत तौर पर आकर मुझसे मिले और अपने समर्थन की चिट्ठी सौंपीं।"
राज्यपाल का कहना है कि कांग्रेस से कहा है कि वो सभी समर्थन करने वाले विधायकों को व्यक्तिगत रूप से लेकर आएं। हेपतुल्लाह का यह भी कहना था कि मणिपुर के मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने अबतक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है।
'भाजपा जो कर रही है वो गलत है'
उन्होंने कहा, "मैंने उनसे कहा पहले वो इस्तीफा दें। मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।" सरकार बनाने को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भाबानंद सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उनके पास कुल मिलाकर 32 विधायकों का समर्थन है। वो कहते हैं कि इसी लिए उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कहते हैं कि सभी विधायकों को लेकर वो राज्यपाल से मिलने गए थे।
वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा जो कर रही है वो गलत है क्योंकि कांग्रेस अकेला सबसे बड़ा राजनीतिक दल है जो बहुमत से सिर्फ तीन सीटें ही कम है। बीबीसी से बात करते हुए राज्य कांग्रेस के महासचिव विक्टर केसिंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सबसे बड़ा दल होने के नाते राज्यपाल उनकी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देंगी।
केसिंग ने भारतीय जनता पार्टी पर निर्दर्लीय विधायक को एयरपोर्ट से ही अगवा करने का आरोप लगाया है। बहरहाल राज्यपाल इस मामले में संविधान के विशेषज्ञों की सलाह ले रही हैं। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सरकार बनाने के लिए किसको न्योता दिया जाए इस पर फैसला हो जाएगा।