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Lockdown : खेती, हाईवे पर बने ढाबों और फार्मा उद्योग समेत इन्हें मिल सकती है राहत

Tue, 14 Apr 2020 09:23 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 14 Apr 2020 09:23 PM IST
सार

देश में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 25 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी। 14 मार्च को इस लॉकडाउन की अवधि समाप्त होनी थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में हालात को देखते हुए इस लॉकडाउन को तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया। 

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Harvesting, sowing activities, highway dhabas likely to be exempted from extended lockdown
किसानों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा लॉकडाउन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि खेती, मत्स्य पालन और फार्मा उद्योग को इस लॉकडाउन से राहत दी जा सकती है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि ऐसे जिलों में जहां कोरोना वायरस का कोई मामला नहीं है वहां हाईवे ढाबा, ट्रक रिपेयरिंग की दुकानों और स्थानीय मजदूरों को लेकर निर्माण कार्य को अनुमति दी जा सकती है।  

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बता दें कि देश में कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 25 मार्च को 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की थी। 14 अप्रैल को इस लॉकडाउन की अवधि समाप्त होनी थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने देश में हालात को देखते हुए इस लॉकडाउन को तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया। माना जा रहा है कि लॉकडाउन के दौरान दी जाने वाली राहतें 20 अप्रैल से लागू की जाएंगी। 
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी दिशानिर्देशों को तैयार करने में व्यस्त हैं जो विस्तारित लॉकडाउन के कार्यान्वयन और इस दौरान दी जाने वाली छूट के लिए व्यापक मापदंडों को पूरा करेंगे। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कटाई और बुवाई की गतिविधियों को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के पालन के साथ अनुमति दी जाएगी। अधिकारी ने कहा, फार्मा उद्योग, मत्स्य पालन, हाईवे पर स्थित ढाबा, ट्रक रिपेयर करने वाली दुकानों को भी राहत दी जाएगी। 

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शराब की दुकानों पर भी हो सकता है फैसला

वहीं, जहां असम और मेघालय जैसे कुछ राज्यों ने अपने यहां शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि बुधवार को जारी होने वाले दिशा-निर्देशों में आबकारी नीतियां तय करने की अनुमति राज्यों को दे दी जाएगी। 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्रियों की कॉन्फ्रेंस में कुछ मुख्यमंत्रियों ने शराब की दुकानें खोलने के पक्ष में आवाज रखी थी क्योंकि यह राजस्व जुटाने का एक मुख्य जरिया है।  



जानकारी के मुताबिक साल 2019-20 में असम आबकारी से करीब दो हजार करोड़ रुपये का राजस्व जुटा चुका है वहीं राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में यह राशि तीन हजार करोड़ के करीब है।

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