हर्षवर्धन के स्वास्थ्य मंत्री बनने पर एम्स में जश्न का माहौल, विवाद के कारण छिना था मंत्रालय
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आपको ध्यान होगा कि 2014 में जब मोदी सरकार बनी तो दिल्ली की चांदनी चौक सीट से भाजपा सांसद डॉ. हर्षवर्धन को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय सौंपा गया था। कुछ ही दिन बाद एम्स के तत्कालीन सीवीओ (चीफ विजिलेंस अफसर) संजीव चतुर्वेदी के मामले में उनका मंत्रालय छिन गया। हालांकि उन्होंने दबाव के चलते ही सही, लेकिन सीवीओ को उनके पद से हटा दिया था। इसके लिए मीडिया में उन्हें खासी आलोचना का शिकार होना पड़ा।
चूंकि सीवीओ को हटाने का सिफारिशी पत्र जेपी नड्डा द्वारा लिखा गया था, इसलिए पार्टी की ओर से भी डॉ. हर्षवर्धन पर दबाव था। अब दूसरी बार जब वे स्वास्थ्य मंत्री बने तो उसी एम्स में जश्न का माहौल बन गया। डॉक्टरों ने खुले मन से डॉ. हर्षवर्धन की नियुक्ति को पीएम मोदी का सराहनीय कदम बताया है।
बता दें कि जब डॉ. हर्षवर्धन मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जब स्वास्थ्य मंत्री बने तो उस वक्त एम्स में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। सीवीओ संजीव चतुर्वेदी ने एम्स में भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर कर दिए। उन्होंने सुरक्षा गार्ड भर्ती मामला, यौन शोषण, डॉक्टरों के गैर-कानूनी विदेशी दौरे, एम्स फार्मेसी में अवैध दवाइयों की बिक्री, फर्जी सर्टिफिकेट बनाना, एम्स की मार्केट किराये पर देना और नीलामी में एक ही बोली पर टेंडर देना, आदि मामलों का पर्दाफाश कर दिया था।
ऐसे कई मामलों में एक आईएएस अधिकारी का नाम सामने आया। उन्हें कथित तौर पर जेपी नड्डा का करीबी बताया गया। सीवीओ ने जब खुले तौर पर उक्त अधिकारी का नाम लेना शुरू किया तो उक्त अधिकारी को बचाने का प्रयास किया गया। बताया जाता है कि नड्डा ने सीवीओ को हटाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को पत्र लिख दिया। यह पत्र मीडिया में लिक होने के कारण सरकार में बवाल मच गया।
अरविंद केजरीवाल ने इस बाबत मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया। दूसरी ओर, अरुण जेटली ने यह कह कर जेपी नड्डा का बचाव किया कि किसी भी जनप्रतिनिधि को पत्र लिखने का अधिकार है। हालांकि डॉ. हर्षवर्धन ने सीवीओ को हटा दिया, लेकिन इसके साथ ही उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय भी छोड़ना पड़ा। पीएम मोदी ने स्वास्थ्य मंत्रालय जेपी नड्डा को सौंप दिया। हर्षवर्धन को विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्रालय दे दिया गया।
एम्स में खुशी की लहर दौड़ गई...
जिस वक्त डॉ. हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्रालय देने की सूचना आई तब एम्स के आईसीएमआर भवन में 'वर्ल्ड नो टोबैको डे-2019' पर व्हाइट पेपर रिलीज होना था। वहां आईसीएमआर के डीजी डॉ. बलराम भार्गव, डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी, डॉ. रवि मेहरोत्रा, डॉ. चंद्रशेखर और डॉ. आरएस धालीवाल सहित अनेक डॉक्टर मौजूद थे। डॉ. हर्षवर्धन को लेकर जब इन डॉक्टरों से पूछा गया तो इन्होंने पीएम मोदी के फैसले पर खुशी जाहिर की।
पीएचईएल के प्रेजीडेंट डॉ. के श्रीनाथ रेड्डी और डॉ. चंद्रशेखर सहित तकरीबन सभी डॉक्टरों का कहना था कि डॉ. हर्षवर्धन हेल्थ के विषय को बहुत गहराई से जानते हैं। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं और उनके समाधान का भी पता है। उनकी अच्छी बात यह है कि वे किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी की राय लेते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर या कर्मचारी, वो चाहे किसी भी स्तर का हो, उसका पक्ष जरुर लेते हैं। एक्सपर्ट की बात वे खासतौर से सुनते हैं। डॉ. हर्षवर्धन को स्वास्थ्य मंत्रालय मिलने का मतलब है कि देश में अब स्वास्थ्य सेवाओं का विकास तेजी से होगा। उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र की बहुत जानकारी है। एम्स की ओपीडी में भी इसका असर देखा गया।