मानसून की मेहरबानी से देश के 91 मुख्य जलाशय हुए लबालब, 10 साल में सबसे बेहतर स्थिति
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देश के प्रमुख जलाशयों से भी खबर है कि जलाशय बिल्कुल भर चुके हैं,अब तक 73.471 बीसीएम (अरब घन मीटर) पानी जमा हो चुका है। ये जलाशय अपनी क्षमता के 45% तक भर गए हैं। पिछले साल की तुलना में ये 4% ज्यादा भर चुके हैं। यह स्टोरेज पिछले साल इसी अवधि के कुल स्टोरेज का 110% और पिछले दस सालों के औसत स्टोरेज का 111% है। सेंट्रल वाटर कमीशन के मुताबिक ओवरऑल स्टोरेज की स्थिति पिछले साल से काफी अच्छी है। और बीते महीने के दो जुलाई को इन जलाशयों में महज 15% पानी ही बच गया था जो चिंता की बात थी ।
वहीं उत्तरी भारत क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश,पंजाब और राजस्थान के 6 जलाशय भी भरे हुए हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की स्टोरेज क्षमता वाले छह जलाशय हैं और 33% तक भर गये हैं जो 10 साल का औसत 52% है। वहीं पूर्वी क्षेत्र के झारखंड, ओडिशा, बंगाल और त्रिपुरा के 15 डैम इस बारिश में भर गए हैं। इन राज्यों में 18.83 बीअच्छे मानसून ने देश के प्रमुख 91 जलाशय को काफी भर दिया है और ये स्थिति पिछले 10 साल में सबसे बेहतर है।
सीएम स्टोरेज क्षमता के 15 जलाशय हैं जिनमें अभी 42% पानी है और ये 10 साल का औसत 34% है।
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दक्षिण भारत की ओर देखें तो यहां सबसे ज्यादा पानी भर चुका है, यहां आंध्र, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के डैम 62% तक भर गए हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल क्षमता वाले 31 जलाशय हैं और इनमें 31.99 बीसीएम पानी है। पिछले साल यहां 28% पानी ही था यानि अब 10 साल का औसत 41% है।
उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र के डैम में पानी कम है दूसरी तरफ पूर्वी क्षेत्र, दक्षिणी क्षेत्र में डिस्ट्रीब्यूशन बेहतर है। दक्षिण के डैम 62% तक भरे हुए हैं, जबकि उत्तरी क्षेत्र के डैम में 33% पानी भर चुका है। इन 91 जलाशयों की कुल स्टोरेज क्षमता 161.993 बीसीएम है, जो देश की कुल स्टोरेज क्षमता 257.812 बीसीएम का 63% है।
ये काफी राहत की बात है कि मानसून के रहते ही ज्यादातर जलाशय पानी से भर गए हैं जिससे किसानो को सिंचाई के लिए और घरों में इस्तेमाल के लिए पानी देने में सरकार को दिक्कत नहीं होगी। लेकिन फिर भी देश में वॉटर हॉरवेस्टिंग की काफी जरूरत है जिससे मानसून पर निर्भरता कम हो सके।