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Gujarat: गोधरा ट्रेन कांड में उम्रकैद की सजा काट रहा शख्स पकड़ा गया, पैरोल पर छूटने के बाद एक साल से था फरार

Sun, 23 Jul 2023 04:14 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, गोधरा (गुजरात)।
पीटीआई, गोधरा (गुजरात)। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 23 Jul 2023 04:14 PM IST
सार

सत्तार को 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के दो डिब्बों में आग लगाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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Gujarat: Man serving life sentence in Godhra train carnage case nabbed a year after jumping parole
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात के गोधरा में 2002 में हुए ट्रेन नरसंहार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दोषी को पैरोल से फरार रहने के एक साल बाद गुजरात के पंचमहल जिले से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।

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पंचमहल पुलिस की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पैरोल फरलो दस्ता शनिवार को लिमखेड़ा पहुंचा और भगोड़े सत्तार को गिरफ्तार कर लिया। इसमें आगे कहा गया है कि उसे सिटी बी डिवीजन पुलिस को सौंप दिया गया ताकि उसे उसकी शेष सजा काटने के लिए अहमदाबाद की साबरमती केंद्रीय जेल ले जाया जा सके।
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सत्तार को 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के दो डिब्बों में आग लगाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस कांड में 59 यात्रियों की मौत हो गई थी और राज्य में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे, जिसमें 1,200 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
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सत्तार को मार्च 2002 में गिरफ्तार किया गया था और उस पर हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाने, लोक सेवक को डराने आदि से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के साथ-साथ रेलवे अधिनियम और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान की रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप लगाया गया था।


मार्च 2011 में, ट्रेन में आगजनी की घटना के लिए एक विशेष अदालत ने कुल 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई, जबकि 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। छह साल बाद गुजरात हाईकोर्ट ने 11 दोषियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया और 20 अन्य के लिए आजीवन कारावास को बरकरार रखा।

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