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Gujarat High Court: गुजरात हाईकोर्ट ने आसाराम की जमानत एक महीने के लिए और बढ़ाई, कहा– यह आखिरी मौका है
Thu, 03 Jul 2025 07:42 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 03 Jul 2025 07:42 PM IST
सार
Gujarat High Court: आसाराम को जमानत देते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने साफ किया है कि आसाराम को मिली यह जमानत अंतिम बार दी जा रही है। मेडिकल आधार पर मिली यह राहत स्थायी नहीं है, और इसके बाद अगर स्थिति गंभीर नहीं होती तो उन्हें फिर से जेल लौटना पड़ेगा।
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Gujarat High Court
- फोटो : PTI
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विस्तार
गुजरात हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की अस्थायी जमानत एक और महीने के लिए बढ़ा दी है, लेकिन साफ कहा है कि यह आखिरी विस्तार होगा। 86 वर्षीय आसाराम को 2013 के एक दुष्कर्म केस में उम्रकैद की सजा मिली है और वह चिकित्सकीय आधार पर जमानत पर हैं।
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गुरुवार को न्यायमूर्ति ईलेश वोरा और पीएम रावल की पीठ ने उनकी जमानत में एक महीने की और मोहलत दी। इससे पहले कोर्ट ने 28 मार्च को उन्हें अस्थायी जमानत दी थी, जो 30 जून को समाप्त हो रही थी। कोर्ट ने पहले 7 जुलाई तक अंतरिम जमानत दी थी। सुनवाई के दौरान, आसाराम के वकील ने कोर्ट से तीन महीने का और समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि सिर्फ एक महीने की ही मोहलत दी जा रही है और यह अंतिम अवसर होगा। इस संबंध में विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है।
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सुप्रीम कोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत
आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च तक मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी थी और निर्देश दिया था कि आगे की राहत के लिए वह गुजरात हाईकोर्ट का रुख करें। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दो जजों की भिन्न राय आने पर मामला तीसरे जज को सौंपा गया था, जिन्होंने उन्हें तीन महीने की अस्थायी जमानत दी थी।
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क्या है पूरा मामला?
जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने आसाराम को एक महिला शिष्या के साथ लगातार दुष्कर्म करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पीड़िता सूरत की रहने वाली थी और 2001 से 2006 के बीच अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में रहती थी। उसी दौरान उसने आरोप लगाया कि आसाराम ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।
इन धाराओं के तहत ठहराए गए दोषी
आसाराम को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(C) (दुष्कर्म), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 342 (गैरकानूनी हिरासत), 354 (महिला की लज्जा भंग करना), 357 (हमला) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया था। आसाराम पहले से ही राजस्थान के जोधपुर जेल में एक नाबालिग लड़की के साथ 2013 में दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
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गुरुवार को न्यायमूर्ति ईलेश वोरा और पीएम रावल की पीठ ने उनकी जमानत में एक महीने की और मोहलत दी। इससे पहले कोर्ट ने 28 मार्च को उन्हें अस्थायी जमानत दी थी, जो 30 जून को समाप्त हो रही थी। कोर्ट ने पहले 7 जुलाई तक अंतरिम जमानत दी थी। सुनवाई के दौरान, आसाराम के वकील ने कोर्ट से तीन महीने का और समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि सिर्फ एक महीने की ही मोहलत दी जा रही है और यह अंतिम अवसर होगा। इस संबंध में विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है।
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सुप्रीम कोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत
आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च तक मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत दी थी और निर्देश दिया था कि आगे की राहत के लिए वह गुजरात हाईकोर्ट का रुख करें। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दो जजों की भिन्न राय आने पर मामला तीसरे जज को सौंपा गया था, जिन्होंने उन्हें तीन महीने की अस्थायी जमानत दी थी।
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क्या है पूरा मामला?
जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने आसाराम को एक महिला शिष्या के साथ लगातार दुष्कर्म करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पीड़िता सूरत की रहने वाली थी और 2001 से 2006 के बीच अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में रहती थी। उसी दौरान उसने आरोप लगाया कि आसाराम ने उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया।
इन धाराओं के तहत ठहराए गए दोषी
आसाराम को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(C) (दुष्कर्म), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 342 (गैरकानूनी हिरासत), 354 (महिला की लज्जा भंग करना), 357 (हमला) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दोषी ठहराया गया था। आसाराम पहले से ही राजस्थान के जोधपुर जेल में एक नाबालिग लड़की के साथ 2013 में दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
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