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तरह-तरह के रंग दिखाकर थम गया गुजरात विधानसभा चुनाव

Thu, 14 Dec 2017 02:06 AM IST
शशिधर पाठक / नई दिल्ली
शशिधर पाठक / नई दिल्ली Updated Thu, 14 Dec 2017 02:06 AM IST
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Gujarat elections get over after setting it's many colours
गुजरात चुनाव
गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार अपने बदलते रंगों के लिए याद किया जाएगा। कांग्रेस, भाजपा और भाजपा को हराने के लिए कमर कसे अनामत आंदोलन समिति के हार्दिक पटेल सब ने तरह-तरह के रंग दिखाए। संभवत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राजनीतिक जीवन में यह पहला ऐसा चुनाव था, जिसने राजनीति की प्रयोगशाला में उन्हें भी हर नये दिन नये एजेंडे के साथ आने के लिए मजबूर कर दिया।
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विकास गांदो थायो छै

कांग्रेस की विकास गांदो थायो छै (विकास पागल हो गया है) की लाइन पूरे विधानसभा चुनाव प्रचार का टर्निंग प्वाइंट बन गई। भाजपा को इस नारे की लोकप्रियता ने बदले गुजरात के मिजाज का एहसास करा दिया था। इसकी काट में भाजपा ने कई नारा दिया। अंत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद मैदान में उतर आए और खुद को ही विकास बताया। लेकिन व्यंग, तंज और नारे में हर बार पिछड़ जाने वाली कांग्रेस गुजरात विधानसभा चुनाव में इस बार काफी संभली रही। कांग्रेस आवे छै, नवसर्जन लावे छै भी खूब चला।
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नोटबंदी, जीएसटी, मंहगाई, गांव, गरीब, किसान, विकास के मुद्दे पर टिकी रही। 22 सालों से भाजपा गुजरात की सत्ता में है। इसका भी असर दिखा। पाटीदार समेत अन्य की नाराजगी का भी कांग्रेस को लाभ मिला और कई विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार पार्टी लड़ती हुई नजर आई।
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पढ़ें- जाते-जाते वाघेला ने ताने कसते हुए दी मोदी की विदाई

खूब बदले मुद्दे

Gujarat elections get over after setting it's many colours
राहुल गांधी
शुरुआत में भाजपा और कांग्रेस दोनों की होड़ विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की थी। भाजपा ने शुरुआत भी इसी से की। कांग्रेस ने सोशल इंजीनियरिंग पर काम करते हुए विकास के साथ-साथ जातिगत समीकरण का कार्ड खेला। भाजपा ने शुरू में बचने की कोशिश की। कांग्रेस ने नोटबंदी और जीएसटी पर जनता की नाराजगी को भुनाने का प्रयास किया। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने राज्य की जनता के लिए खजाना खोल दिया।

जापान के प्रधानमंत्री शिजो अबे के साथ प्रधानमंत्री ने हाई स्पीड बुलेट ट्रेन की आधारशिला गुजरात में ही रखी। तमाम उद्घाटन किए। जीएसटी के स्लैब में बदलाव हुआ। गुजरात के कारोबार तथा जनता की खरीद से जुड़े खाने के सामान तक पर जीएसटी का रेट कम किया गया। इतना ही नहीं पिछले दो दशक में पहली बार गुजरात में जातिगत समीकरण को ध्यान में टिकट बांटे गए।

नवंबर के अंत में बदला तेवर

नवंबर महीने के आखिरी सोपान में कांग्रेस और भाजपा खुलकर आमने सामने रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी प्रचार अभियान में डटे रहे। भाजपा ने आक्रामक चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई। इसके बरअक्स कांग्रेस ने मिक्स रणनीति को अहमियत दी। पूरी आक्रामकता हार्दिक पटेल की टीम स्वतंत्र प्रचार अभियान के जरिए निभाती रही। हार्दिक पटेल की सेक्स सीडी भी आई, लेकिन चुनाव प्रचार को प्रभावित नहीं कर सकी। भाजपा ने राहुल गांधी के हर रोज मंदिर जाने को मुद्दा बनाया। 

कांग्रेस उपाध्यक्ष अपने मिशन में लगे रहे। सोमनाथ मंदिर में कांग्रेस उपाध्यक्ष के गैर हिन्दू रजिस्टर में पंजीकृत होने का मुद्दा उठा, हिन्दुत्व पर सवाल उठा। जवाब में कांग्रेस ने उन्हें जनेऊधारी हिन्दू, शिव भक्त बताया। यह संदेश देने के लिए कांग्रेस ने सोमवार को राहुल गांधी के अध्यक्ष पद के नामांकन और इस पर निर्विरोध चुने जाने की घोषणा सोमवार 11 दिसंबर को करने का कार्यक्रम रखा।

प्रचार ने रचा इतिहास

Gujarat elections get over after setting it's many colours
मोदी - फोटो : SELF
राहुल गांधी का नामांकन और कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव भी मुद्दा बना। राहुल गांधी के बहनोई राबर्ट वाड्रा हैं। वाड्रा के बहनोई तहसीन पूनावाला। तहसीन पूनावाला के भाई शहजाद पूनावाला ने सवाल उठाया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके जरिए वंशवाद की राजनीति में कांग्रेस उपाध्यक्ष को घेरा। इसी समय राम मंदिर का मुद्दा भी आया। जमकर राजनीति हुई। प्रधानमंत्री पर निजी हमले भी हुए। 

मणिशंकर अय्यर ने उन्हें नीच किस्म का व्यक्ति तक कहा और जवाब में कांग्रेस ने अय्यर से माफी मांगने की अपील करते हुए उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया। इसके बाद सबसे विवादित मुद्दा उठा। पाकिस्तान के गुजरात के चुनाव में दखल देने का। अपनी ही पार्टी के एक नेता के मणिशंकर के घर पर हुई बैठक और उस बैठक के आधार पर कयास को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुद्दा बना दिया।

गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार ने सही अर्थों में इतिहास रचा है। विकास, जाति, धर्म, निजी हमले, पाकिस्तान का सीधा दखल, पाकिस्तान की इस पर भी सफाई, अदालत में दी गई दलील सब प्रचार में उछले। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने अपने चुनाव प्रचार में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को घसीट लिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वर्तमान प्रधानमंत्री पर पद की गरिमा का ध्यान रखने, झूठा प्रचार करने, भ्रम फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा नव प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। प्रचार में भी। गुजरात में उन्होंने इसे दोहराया। प्रचार के अंतिम दिन साबरमती रीवर फ्रंट से पानी में टेक ऑफ करने वाले विमान से उड़ान भरी और 100 किमी दूर धरोई बांध में पानी में ही जहाज उतरा। यहां से सड़क के रास्ते प्रधानमंत्री अंबा जी का दर्शन करने पहुंचे। गुजरात की जनता को जलमार्ग को उन्नत बनाने, सी प्लेन शुरू करने की उम्मीद दिखाई। इस तरह के किसी विमान का भारत में पहली बार चुनाव प्रचार में प्रयोग हुआ है। इस पर विपक्ष और हार्दिक पटेल भी हमलावर रहा।

गुजरात बताएगा राजनीति के रंग

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हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी
गुजरात विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान (93 सीट) 14 दिसंबर को होगा। इसके ठीक अगले दिन से संसद का शीत कालीन सत्र आरंभ हो रहा है। 16 दिसंबर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष पद की कमाल संभालेंगे। 18 दिसंबर को गुजरात और हिमाचल विधानसभा का नतीजा आएगा। दोनों राज्यों के चुनाव नतीजे में कांग्रेस हिमाचल से बहुत उम्मीद लेकर नहीं चल रही है और न ही बहुत कुछ दांव पर लगाया है। 

वहीं गुजरात में कांग्रेस का थोड़ा सा तो तुलना में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्र सरकार, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का एक तरह से काफी कुछ दांव पर लगा है। ऐसे में चुनाव नतीजे को लेकर दोनों ही राजनीतिक दलों की धड़कन बढ़ते जाना स्वाभाविक है। इसके नतीजे न केवल संसद भवन का तेवर तय करेंग बल्कि विपक्ष की आगे की राजनीति की दिशा भी तय कर देंगे।
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