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गुजरात: दलितों का आरोप- मंदिर के रात्रिभोज कार्यक्रम में अलग बैठाया गया, अधिकारी बोले- मामले को सुलझा रहे

Tue, 16 May 2023 07:43 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 16 May 2023 07:43 PM IST
सार

जिला सामाजिक न्याय विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि रविवार और सोमवार को एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में भोजन की व्यवस्था को लेकर विवाद पैदा हो गया।

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Gujarat Dalits claim caste bias at temple feast officials say trying to resolve issue
Gujarat - फोटो : Social Media

विस्तार

गुजरात के मेहसाणा जिले के एक गांव के अनुसूचित जाति के निवासियों ने आरोप लगाया है कि पाटीदार समुदाय की ओर से आयोजित एक धार्मिक समारोह में दावत के दौरान उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया। हालांकि, पाटीदार समुदाय के नेताओं ने इन आरोपों को खारिज किया है। वहीं, स्थानीय अधिकारी इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

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जिला सामाजिक न्याय विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि रविवार और सोमवार को एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में भोजन की व्यवस्था को लेकर विवाद पैदा हो गया। इसके बाद दोनों समुदायों के सदस्यों के बीच बैठकें आयोजित की गईं।  
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भटरिया गांव के अनुसूचित जाति के लोगों ने दावा किया कि उमिया माता और महादेव मंदिर के 'प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव' के अवसर पर पाटीदार समुदाय द्वारा आयोजित रात्रिभोज में उन्हें अलग बैठाया गया, जिसके बाद उन्होंने खाना खाने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से कुछ ही दूरी पर एक गांव के स्कूल में उनके समुदाय के 120 सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी।
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उन्होंने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर उचित कार्रवाई की मांग की है। तनाव कम करने के लिए स्थानीय पुलिस को भी बुलाया गया। दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाली गांव की मुखिया विजयाबेन परमार ने दावा किया कि ग्राम पंचायत प्रधान होने के बावजूद उन्हें दावत के दौरान अन्य ग्रामीणों से अलग बैठने के लिए भी कहा गया था। उन्होंने कहा, मैं अपने समुदाय के साथ खड़ी हूं। हम अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के खिलाफ लड़ेंगे। हम इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते।

स्थानीय कार्यकर्ता कांतिभाई नादिया ने दावा किया कि भटरिया गांव में दलितों के साथ अछूतों जैसा व्यवहार किया जा रहा है और महिला सदस्यों को गांव के आंगनवाड़ी केंद्रों में खाना बनाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा, गांव में नाई ने एक दलित व्यक्ति के बाल काटने से इनकार कर दिया। न तो हम और न ही हमारे बच्चे मंदिर जाते हैं। हम घर पर पूजा और भजन करते हैं। यह अन्याय कब तक चलेगा?

स्थानीय पाटीदार नेता नाटूभाई पटेल और राशिकभाई पटेल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दलितों के लिए भोजन की अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। सभी समुदाय यहां एक साथ रहते हैं। 


मेहसाणा के सामाजिक न्याय विभाग के उप निदेशक जेपी सोलंकी ने संवाददाताओं को बताया कि अधिकारियों ने गांव के दलित समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की और शिकायत को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा, हमने पाटीदार समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात की और उनकी दलीलों पर विचार किया। इसके बाद, हमने दोनों समुदायों की एक साथ बैठक भी की, और इस मुद्दे को सामाजिक रूप से हल करने का प्रयास किया जा रहा है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मुद्दे का समाधान हो जाएगा और भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं होगी।

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