गुजरात: 80 पेजों की किताब के साथ सामने आई कांग्रेस, सरकार की आलोचना की
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुजरात में कांग्रेस ने विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी के उस फैसले की आलोचना की है जिसमें उन्होंने कहा कि कोई भी विधायक प्रश्नकाल के दौरान केवल तीन ही प्रश्न पूछ सकता है। उन्होंने प्रश्नों की संख्या घटा दी है। कांग्रेस ने 80 पेजों की एक किताब जारी की है। जिसमें इस मुद्दे पर कहा गया है। किताब में उन प्रश्नों की बात की गई है जिनका मंत्रियों द्वारा लिखित जवाब दिया जाता है।
यह किताब गुजराती में लिखी गई है। जिसका शीर्षक है 'विधानसभा ना उंबरठा' (राज्य विधानसभा के द्वार पर) । इसे कांग्रेस के नेताओं और प्रवक्ता मनीष दोषी द्वारा लिखा गया है। इस किताब में कहा गया है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों की एक सीमा तय कर देना अलोकतांत्रिक है। जो भी सवाल विधायक पूछते हैं वह शासन और प्रशासन से संबंधित मुद्दों पर होते हैं। और आम जनता के हित में होते हैं। इसके साथ ही यह सरकार के प्रदर्शन के दौरान आई कमियों को दूर करने में भी मदद करते हैं।
किताब को सोमवार को विधानसभा के दो दिवसीय मानसून सत्र के दौरान जारी किया गया। इसके द्वारा कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि पिछले चार साल से जब से नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बाल विकास आदि के क्षेत्र वाले लोगों के साथ अन्याय हो रहा है।
दोषी ने किताब में कहा है कि राज्य में भाजपा से ज्यादा विकास कार्य कांग्रेस ने किया है। जो भी बड़े बांध हैं जैसे उकाई, धरोई, पनाम, कदाना आदि सभी कांग्रेस के कार्यकाल में बनाए गए हैं। वहीं अगर नर्मदा बांध की बात करें तो उसकी नींव भी भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने ही रखी थी। और गैर सरकारी संगठन नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा लाई गई बाधाओं के बावजूद भी कांग्रेस के कार्यकाल में ही अधिकतर काम हुआ है।
किताब में कहा गया है कि गुजरात में औद्यौगिक क्रांति लाने वाली सभी औद्यौगिक इकाईयां जैसे गुजरात रिफाइनरी, गुजरात नर्मदा घाटी फर्टिलाइजर कंपनी, गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर कंपनी और गुजरात मिनरल डेवेलपमेंट कॉर्पोरेशन और अन्य इकाइयां भी कांग्रेस के शासनकाल में स्थापित की गई हैं। यह सभी तब स्थापित की गईं थीं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति में कदम भी नहीं रखा था।
किताब में कहा गया है कि अमूल जैसी कंपनी जिसने दूध के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाया, वह भी कांग्रेस के कार्यकाल में ही स्थापित हुई थी। ठीक इसी तरह अधिकतर केमिकल इकाई, ऑटोमोबाइल मेन्युफैक्चरिंग इकाई और डायमंड इंजस्ट्रीज आदि भी कांग्रेस के ही कार्यकाल में स्थापित हुईं।
किताब में इसी प्रकार से कई बड़े इंस्टीट्यूट जैसे आईआईएमए, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन आदि की स्थापना भी कांग्रेस के कार्यकाल में होने की बात कही गई है। इसके साथ ही प्रवक्ता ने किताब में कहा है, 'लेकिन पीएम मोदी, जो कि पब्लिसिटी मांगने की कला में निपुण हैं, उन्हें इन सभी कामों का श्रेय खुद को देने में बिल्कुल शर्म महसूस नहीं होती, जो बीते 70 सालों में राज्य में विभिन्न सरकारों द्वारा किए गए हैं।