{"_id":"57e53c1d4f1c1b4f5aa82945","slug":"gst-limit-for-twenty-lakhs-rupees-yearly-business","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"20 लाख रुपये सालाना तक के कारोबार पर जीएसटी नहीं","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
20 लाख रुपये सालाना तक के कारोबार पर जीएसटी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Fri, 23 Sep 2016 07:58 PM IST
विज्ञापन
GST BILL
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साल में 20 लाख रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारी वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली (जीएसटी) के दायरे में नहीं आएंगे। हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी राज्यों के लिए यह सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है। इसका फैसला केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाले जीएसटी परिषद की पहली बैठक में लिया गया। जीएसटी प्रणाली में दर क्या होगी, इसका फैसला अगले महीने होगा।
डेढ़ करोड़ रुपये तक कारोबार करने वालों पर राज्य का नियंत्रण
जेटली ने शुक्रवार को यहां परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों को छोड़, देशभर में 20 लाख रुपये से ज्यादा का सालाना कारोबार करने वाले व्यापारी जीएसटी के दायरे में आएंगे। पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी राज्यों में यह सीमा 10 लाख रुपये है। यह भी तय हुआ कि साल में 20 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों पर राज्य सरकार का नियंत्रण होगा जबकि डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार करने वालों को केंद्र और राज्य सरकार, दोनों क्रॉस एक्जामिनेशन कर सकेंगे। हालांकि जेटली ने कहा कि डुअल कंट्रोल जैसी स्थिति से बचने के लिए इन असेसी को या तो केंद्रीय एजेंसी देखेगी या राज्य एजेंसी। सेवा कर के सभी वर्तमान असेसी केंद्र सरकार के पास ही रहेंगे। उन्होंने बताया कि अच्छी बात यह रही कि ये फैसले सर्वसम्मति से हुए, वोटिंग कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
भरपाई के लिए आधार वर्ष 2015-16
उन्होंने बताया कि राज्यों को राजस्व में घाटा होने की स्थिति में भरपाई के लिए 2015-16 को आधार वर्ष बनाने पर सहमति बनी है। राज्यों को क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान हर तिमाही होगा।
विज्ञापन
काउंसिल की अगली बैठक 30 सितंबर को
अरुण जेटली ने यह भी बताया कि काउंसिल की अगली बैठक 30 सितम्बर को होगी। उस बैठक में नियमों के मसौदे के साथ-साथ जीएसटी से छूट पाने वाली वस्तु एवं सेवाओं पर भी चर्चा होगी। इसके बाद आगामी 17, 18 और 19 अक्तूबर को परिषद की अगली बैठक होगी, जिसमें जीएसटी की दरें तय की जाएंगी।
विज्ञापन
डेढ़ करोड़ रुपये तक कारोबार करने वालों पर राज्य का नियंत्रण
जेटली ने शुक्रवार को यहां परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों को छोड़, देशभर में 20 लाख रुपये से ज्यादा का सालाना कारोबार करने वाले व्यापारी जीएसटी के दायरे में आएंगे। पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी राज्यों में यह सीमा 10 लाख रुपये है। यह भी तय हुआ कि साल में 20 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों पर राज्य सरकार का नियंत्रण होगा जबकि डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार करने वालों को केंद्र और राज्य सरकार, दोनों क्रॉस एक्जामिनेशन कर सकेंगे। हालांकि जेटली ने कहा कि डुअल कंट्रोल जैसी स्थिति से बचने के लिए इन असेसी को या तो केंद्रीय एजेंसी देखेगी या राज्य एजेंसी। सेवा कर के सभी वर्तमान असेसी केंद्र सरकार के पास ही रहेंगे। उन्होंने बताया कि अच्छी बात यह रही कि ये फैसले सर्वसम्मति से हुए, वोटिंग कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
विज्ञापन
भरपाई के लिए आधार वर्ष 2015-16
उन्होंने बताया कि राज्यों को राजस्व में घाटा होने की स्थिति में भरपाई के लिए 2015-16 को आधार वर्ष बनाने पर सहमति बनी है। राज्यों को क्षतिपूर्ति की राशि का भुगतान हर तिमाही होगा।
विज्ञापन
काउंसिल की अगली बैठक 30 सितंबर को
अरुण जेटली ने यह भी बताया कि काउंसिल की अगली बैठक 30 सितम्बर को होगी। उस बैठक में नियमों के मसौदे के साथ-साथ जीएसटी से छूट पाने वाली वस्तु एवं सेवाओं पर भी चर्चा होगी। इसके बाद आगामी 17, 18 और 19 अक्तूबर को परिषद की अगली बैठक होगी, जिसमें जीएसटी की दरें तय की जाएंगी।
उत्तर प्रदेश के चार लाख कारोबारियों को जीएसटी से राहत
जीएसटी
वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली लागू होने से उत्तर प्रदेश के चार से पांच लाख छोटे कारोबारियों को जीएसटी प्रणाली के तहत पंजीकरण कराने या रिटर्न दाखिल करने से निजात मिल जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी राज्य में वैट लागू है और इसके दायरे में आने वाले कारोबार की न्यूनतम सीमा पांच लाख रुपये है। जीएसटी प्रणाली में यह बढ़ कर 20 लाख रुपये हो जाएगी।
जीएसटी काउंसिल की पहली बैठक में भाग लेने आए उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री अभिषेक मिश्रा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि जीएसटी लागू होने से राज्य के चार से पांच लाख छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में जीएसटी लागू करने के लिए पूरी तैयारी हो रही है और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में होने वाले इस सुधार के लिए राज्य तैयार है।
उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि करीब 50 फीसदी कारोबारी जीएसटी दायरे से निकलेंगे। उन्होंने बताया कि इस समय पूरे राज्य में वैट के करीब 7.40 लाख असेसी हैं, जिनमें से 3.34 लाख असेसी पांच से 20 लाख रुपये सालाना तक के कारोबार के दायरे में आते हैं। जीएसटी लागू होने से इन्हें फायदा होगा।
पहली अप्रैल से लागू करने का लक्ष्य
अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में आजादी के बाद के सबसे बड़े कर सुधार, जीएसटी प्रणाली में पूरे देश को एक बाजार बनाने वाली कर व्यवस्था लागू की जाएगी। इसे देशभर में अगले साल एक अप्रैल से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र ने पहले ही साफ कर दिया है कि नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व में होने वाले नुकसान की शत प्रतिशत भरपाई पांच वर्षों तक की जाएगी। इसका उल्लेख जीएसटी से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक में भी किया गया है।
जीएसटी काउंसिल की पहली बैठक में भाग लेने आए उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री अभिषेक मिश्रा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि जीएसटी लागू होने से राज्य के चार से पांच लाख छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में जीएसटी लागू करने के लिए पूरी तैयारी हो रही है और अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में होने वाले इस सुधार के लिए राज्य तैयार है।
उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि करीब 50 फीसदी कारोबारी जीएसटी दायरे से निकलेंगे। उन्होंने बताया कि इस समय पूरे राज्य में वैट के करीब 7.40 लाख असेसी हैं, जिनमें से 3.34 लाख असेसी पांच से 20 लाख रुपये सालाना तक के कारोबार के दायरे में आते हैं। जीएसटी लागू होने से इन्हें फायदा होगा।
पहली अप्रैल से लागू करने का लक्ष्य
अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में आजादी के बाद के सबसे बड़े कर सुधार, जीएसटी प्रणाली में पूरे देश को एक बाजार बनाने वाली कर व्यवस्था लागू की जाएगी। इसे देशभर में अगले साल एक अप्रैल से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र ने पहले ही साफ कर दिया है कि नई कर व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यों के राजस्व में होने वाले नुकसान की शत प्रतिशत भरपाई पांच वर्षों तक की जाएगी। इसका उल्लेख जीएसटी से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक में भी किया गया है।