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ग्राउंड रिपोर्ट: अब तक नहीं भरे हैं बशीरहाट में हुए दंगों के घाव
Wed, 15 May 2019 03:18 AM IST
गौरव द्विवेदी
रीता तिवारी, अमर उजाला, बशीरहाट
रीता तिवारी, अमर उजाला, बशीरहाट
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Wed, 15 May 2019 03:18 AM IST
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नुसरत जहां, सायंतन बसु (फाइल फोटो)
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पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की सीमा से लगे उत्तर 24-परगना जिले के बशीरहाट इलाके में दो साल पहले बड़े पैमाने पर हुई सांप्रदायिक हिंसा के घाव अब तक नहीं भरे हैं। तब राज्य में सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर दंगों की आग में घी डालने का आरोप लगाया था। मिली-जुली आबादी वाले जिस इलाके ने पहले कभी सांप्रदायिक दंगे का नाम तक नहीं सुना था, उस हिंसा के बाद इलाके में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच खाई पैदा हो गई थी। अब तृणमूल के सामने इस खाई को पाटना ही सबसे बड़ी चुनौती है।
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तृणमूल पिछले दो लोकसभा चुनावों में बशीरहाट सीट जीत चुकी है, लेकिन अब उसकी राह आसान नहीं है। इससे निपटने के लिए ममता ने आठ साल से बांग्ला फिल्मों की शीर्ष अभिनेत्री नुसरत जहां को मैदान में उतारा है। नुसरत कहती हैं कि दीदी यानी ममता बनर्जी उनको दो समुदायों की खाई पाटने के लिए एक पुल की भूमिका में देखती हैं। एक मुस्लिम होने के बावजूद उन्होंने फिल्मों में हिंदू भूमिकाएं भी निभाई हैं।
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राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि सांप्रदायिक हिंसा और उस बहाने इलाके में भाजपा की बढ़ती पैठ को देखते हुए गैर राजनीतिक चेहरे की ममता की तलाश नुसरत पर खत्म हुई। दूसरी ओर, दो साल पहले की सांप्रदायिक खाई को हथियार बनाकर भाजपा भी नागरिकता (संशोधन) विधेयक और नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटीजंस (एनआरसी) के सहारे अबकी तृणमूल से यह सीट छीनने का दावा कर रही है। इसके लिए पार्टी ने प्रदेश महासचिव सायंतन बसु को यहां मैदान में उतारा है। इलाके में बांग्लादेशी घुसपैठ और पिछड़ापन ही सबसे बड़ा मुद्दा है।
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नुसरत जहां, तृणमूल
मैं प्यार व मानवता के सहारे दोनों समुदायों के बीच की खाई को पाटना चाहती हूं। हर तबके के लोग मुझे प्यार करते हैं।
सायंतन बसु, भाजपा
ममता की तुष्टिकरण की नीति से इलाके के हिंदुओं में भारी नाराजगी है। इसी वजह से लोगों का समर्थन भाजपा के साथ है।
क्यों भड़की थी हिंसा
मुस्लिम-बहुल बशीरहाट में वर्ष 2017 में एक किशोर ने फेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ कथित अपमानजनक पोस्ट किया था। इसके बाद इलाके में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी। इलाके में एक समुदाय की दर्जनों दुकानें जला दी गई थीं और बादुड़िया थाने में भी तोड़-फोड़ की गई थी। इलाके में उस हिंसा के निशान अब भी देखे जा सकते हैं।
माकपा की गढ़ रही है सीट
बशीरहाट संसदीय सीट लगभग तीन दशक तक भाकपा का गढ़ रही है और इंद्रजीत गुप्ता भी यहां से सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2009 में तृणमूल उम्मीदवार शेख नुरूल इस्ताम ने भाकपा के अजय चक्रवर्ती को 60 हजार वोटों से हराकर इस सीट पर कब्जा किया था। तब भाजपा उम्मीदवार स्वपन कुमार दास को महज 6.51 फीसद वोट मिले थे। वर्ष 2019 में तृणमूल उम्मीदवार इदरीस अली की जीत का अंतर तो बढ़कर 1.10 लाख तक पहुंच गया। लेकिन भाजपा को मिलने वाले वोट भी बढ़कर 18.36 फीसद तक पहुंच गए। इस संसदीय क्षेत्र में 77 फीसद हिंदू हैं और 22 फीसद मुस्लिम।