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बदलाव: हरित फैशन का बढ़ा चलन, प्रकृति से जुड़े कपड़ों की मांग 43 फीसदी बढ़ी

Mon, 20 Oct 2025 06:55 AM IST
लव गौर अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: लव गौर Updated Mon, 20 Oct 2025 06:55 AM IST
सार

Green fashion trend: हरित फैशन का चलन बढ़ा है। ऐसे में प्रकृति से जुड़े कपड़ों की मांग 43 फीसदी बढ़ी है। भारत समेत पांच देशों ने तेजी से प्राकृतिक वस्तुओं से बने कपड़ों का फैशन अपनाया है।

 

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Green fashion trend on rise, demand for nature-inspired clothing rises 43 pec
हरित फैशन का बढ़ा चलन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

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तेजी से बदलती उपभोक्ता संस्कृति के बीच अब फैशन उद्योग में नेचर फ्रेंडली फैशन की लहर उठ रही है। दुनिया भर में ग्रीन क्लोदिंग की मांग 43% बढ़ गई है।

अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों और अध्ययनों में यह सामने आया है कि लोग अब ब्रांडेड चमक-दमक से हटकर अपने आसपास की अनावश्यक चीजों जैसे पुराने कपड़े, जूट, बांस, पत्ते, पुनर्नवीनीकृत कपड़ा और प्राकृतिक रंगों से फैशन की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। यह रुझान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम है, बल्कि रासायनिक फैब्रिक और माइक्रोप्लास्टिक से भरे कपड़ों के खिलाफ एक वैश्विक प्रतिक्रिया भी बनता जा रहा है।

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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और ग्लोबल फैशन एजेंडा कोपेनहेगन की संयुक्त रिपोर्ट द स्टेट ऑफ सर्कुलर फैशन के अनुसार सस्टेनेबल या नेचर-फ्रेंडली फैशन को सबसे तेजी से अपनाने वाले प्रमुख पांच देशों में स्वीडन, फ्रांस, जापान, कनाडा और भारत है। फैशन थ्योरी: द जर्नल ऑफ ड्रेस, बॉडी एंड कल्चर में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दस वर्षों 2014 से 2024 के दौरान इन देशों में उपभोक्ताओं की प्रकृति आधारित वस्त्रों (ग्रीन क्लोदिंग) की मांग में औसतन 43% की वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे उल्लेखनीय परिवर्तन स्वीडन में देखा गया, जहां एलेन मैकआर्थर फाउंडेशन के आंकड़ों के मुताबिक 2015 से 2024 के बीच रीसाइक्ल्ड या ऑर्गैनिक कपड़ों की बिक्री में 61% की बढ़ोतरी हुई।

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बदल रही है उपभोक्ताओं की सोच

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ सस्टेनेबल फैशन ऐंड टेक्सटाइल्स में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में रेजेनेरेटिव फैशन यानी प्राकृतिक संसाधनों को पुनर्जीवित करने और कपड़ों के पुनःप्रयोग पर आधारित मॉडल ने दुनिया के शहरी फैशन बाजारों में उल्लेखनीय पकड़ बनाई है। विश्व के 12 प्रमुख महानगरों स्टॉकहोम, पेरिस, टोक्यो, न्यूयॉर्क, सियोल, मुंबई, सिडनी, बर्लिन, एम्स्टर्डम, टोरंटो, सिंगापुर और मेलबर्न में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग 38% उपभोक्ता अब केवल पुनर्चक्रित या प्राकृतिक स्रोतों से बने परिधान खरीदना पसंद करते हैं।

पुरानी वस्तुओं को नया रूप देना बन चुका है एक फैशन ट्रेंड

रिपोर्ट के अनुसार हाल के वर्षों में ‘अपसाइक्लिंग’ यानी पुरानी या फेंकी जा चुकी वस्तुओं को नया रूप देना एक फैशन ट्रेंड बन चुका है। उदाहरण के तौर पर पेरिस, मिलान और टोक्यो के फैशन शो में डिजाइनर अब पुरानी जीन्स, बचे हुए धागे और कपड़े के टुकड़ों से नए परिधान तैयार कर रहे हैं। भारत में भी दिल्ली, जयपुर और मुंबई के युवा डिजाइनर प्राकृतिक रंगों, खादी, हैंडलूम और पुराने कपड़ों को रीक्रिएट करने की दिशा में प्रयोग कर रहे हैं। दिल्ली की डिजाइनर ऋचा खन्ना का कहना है,फैशन अब प्रदर्शन का नहीं, जिम्मेदारी का विषय बन चुका है।आज उपभोक्ता यह जानना चाहता है कि उसके कपड़े कहां और कैसे बने हैं।

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