तेजी से कमजोर होता जा रहा है 'हाथी', पांच साल में बसपा जीत सकी सिर्फ 32 विधानसभा सीटें
बसपा ने भले ही अगले महीने से कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है, लेकिन पिछले दस सालों में उसका प्रदर्शन लगातार गिरा है। बसपा ने पिछले पांच सालों में 16 राज्यों की 2021 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 32 सीटें ही जीत पाई।
आठ राज्यों में वह खाता भी नहीं खोल पाई, जबकि चार राज्यों में केवल एक-एक सीटें मिलीं। यानी 28 सीटों में से 19 तो केवल यूपी की ही हैं। लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 503 उम्मीदवारों को टिकट दिया, लेकिन उनमें से एक भी संसद नहीं पहुंच पाया।
बसपा ने पिछले पांच सालों में बिहार, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तराखंड और केरल की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, पर सभी हार गए। उसके 99 फीसदी उम्मीदवार तो अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। मध्य प्रदेश में बसपा ने 1998 में 11 सीटें जीती थीं, लेकिन पिछले चुनाव में वह केवल चार सीटें ही जीत पाई। वोट भी 11 फीसदी से घटकर छह फीसदी रह गया।
इसी तरह राजस्थान में 2008 के चुनाव में उसे छह सीटें मिली थीं, जबकि 2013 में यह संख्या घटकर आधी रह गई। वोट भी तीन फीसदी रहा गया। इसी तरह छत्तीसगढ़ में 2008 में वह दो सीटें जीत पाई थी लेकिन पिछले चुनाव में उसे केवल एक सीट और मत प्रतिशत भी 10 से घटकर चार रह गया।
यूपी में 2007 में सरकार बनाई, पर अब केवल 19 सीटें हैं
यूपी में 206 सीटें लेकर 2007 में सरकार बनाने वाली पार्टी सात साल बाद सभी 80 लोकसभा सीटें हार गई और पिछले साल के विधानसभा चुनाव में 403 में से केवल 19 सीटें ही जीत पाई। पंजाब में पिछले साल हुए चुनाव में उसके सभी 117 उम्मीदवार बुरी तरह हारे। उसे केवल एक फीसदी वोट ही मिले। वहीं सुदूर दक्षिण के तेलंगाना और कर्नाटक में पार्टी ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और उसके हिस्से में क्रमश: दो और एक सीट ही आई।