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ईरान संकट तो सिर्फ बहाना: उज्ज्वला योजना में थी खामी, अपनी महत्वाकांक्षी योजना पर केंद्र ने क्यों चलाई कैंची?

Wed, 10 Jun 2026 05:34 AM IST
राकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Wed, 10 Jun 2026 05:34 AM IST
सार

केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत सालाना सब्सिडी वाले सिलिंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। हालांकि इसे ईरान संकट और गैस की ऊंची कीमतों से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन असली वजह आंतरिक समीक्षा में सामने आई नीतिगत खामी है। डाटा के अनुसार, गरीब परिवार पैसों की कमी से साल में औसतन 4.47 सिलिंडर ही रिफिल करा पा रहे थे, जबकि सरकार 9 सिलिंडरों पर सब्सिडी का बजट ब्लॉक करके बैठी थी।

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govt slashes ujjwala yojana subsidy cylinder quota policy flaw and refill data leak
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : @ANI

विस्तार

केंद्र ने अपनी लोकप्रिय और महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजना प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कोटे पर जो बड़ी कैंची चलाई है, उसे लेकर हर तरफ चर्चा गर्म है। लाभार्थियों को हर साल मिलने वाले सब्सिडी रसोई गैस सिलिंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी गई है। यदि आप भी इस कटौती की वजह सिर्फ ईरान तनाव, एलपीजी की वैश्विक कमी और ऊंची कीमतों को मान रहे हैं, तो यह अधूरा सच है।
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आखिर क्या है पूरा सच?  
पूरा सच तो यह है कि सरकार ने उज्ज्वला योजना की आंतरिक समीक्षा में अपनी ही एक पुरानी नीतिगत खामी को स्वीकार किया है। राजनीतिक रूप से सरकार के लिए इस गलती को खुद से सुधारना आसान नहीं था, क्योंकि इस योजना को धुआं-मुक्त भारत के बड़े क्रांतिकारी कदम के रूप में पेश किया गया था। अब, ईरान संकट ने सरकार को एक ऐसा मुफीद बहाना दे दिया है, जिसकी आड़ में उसने चुपके से अपनी पुरानी भूल को सुधारने का काम कर दिया है।
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क्यों कम हुआ कोटा
गैस की ऊंची कीमतों के कारण सरकारी तेल कंपनियों को प्रति सिलिंडर 700 रुपये का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई के लिए सरकार को तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ अलग से देने पड़े हैं, जिससे सालाना सब्सिडी खर्च 4 लाख करोड़ के पार जा रहा है। असली सच पेट्रोलियम मंत्रालय के बही-खाते में छिपा है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के सालाना सिलिंडर रिफिल कराने की औसत संख्या 2019-20 में महज तीन सिलिंडर थी, जो हाल में सुधरकर सिर्फ 4.47 सिलिंडर तक ही पहुंच पाई है।
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इसका मतलब यह है कि देश का एक बहुत बड़ा गरीब तबका पैसे की कमी के कारण सालभर में औसतन 4 या 4.5 एलपीजी सिलिंडर ही रिफिल करा पा रहा था। वे सालभर में कभी भी पूरे 9 या 12 सिलिंडर नहीं रहे थे। लेकिन, सरकार कागजों पर हर साल 9 सिलिंडरों पर 300 रुपये प्रति सिलिंडर की सब्सिडी का प्रावधान करके बैठी थी। अब सरकार ने बड़ी चतुराई से इसी जमीनी डाटा को आधार बनाया और सब्सिडी के कोटे को उसी सीमा पर लाकर लॉक कर दिया, जितनी गरीबों की वास्तविक जरूरत थी।


यह भी पढ़ें: ईरान संकट: तेल-खाद के बढ़ते बिल ने बढ़ाई सरकार की टेंशन, पेट्रोलियम कंपनियों को दी 1.23 लाख करोड़ की मदद

गलत इस्तेमाल पर भी अब लग सकेगी रोक  
इस बदलाव के पीछे एक और प्रशासनिक सच है। उज्ज्वला के तहत घरेलू सिलिंडर 642 रुपये में मिलता है, जबकि बाजार में सामान्य घरेलू सिलिंडर 942 रुपये का है और कमर्शियल की कीमत 3,113 रुपये के ऊंचे स्तर पर है। इस भारी अंतर के कारण बड़े पैमाने पर शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग गरीबों के नाम पर मिलने वाले कोटे के सिलिंडरों को व्यावसायिक जगहों पर ऊंचे दाम पर बेच रहे थे। अब कोटा तय होने से गरीब परिवारों के पास ब्लैक मार्केट में बेचने के लिए अतिरिक्त सिलिंडर नहीं बचेगा।
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