Congress: कांग्रेस का आरोप- सरकार ने नियमों को बदलकर की कोयले की नीलामी, कैग की रिपोर्ट का दिया हवाला
Congress: विपक्षी दल ने केंद्र सरकार से पूछा कि कोयले की नीलामी को लेकर चिंता जाहिर करने वाले भाजपा के दो नेताओं के पत्रों पर सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।
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कांग्रेस ने शनिवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि केंद्र ने कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव कर कोयले की नीलामी की और इससे राजस्व का भारी नुकसान हुआ।
विपक्षी दल ने यह भी पूछा कि कोयले की नीलामी को लेकर चिंता जाहिर करने वाले भाजपा के दो नेताओं के पत्रों पर सरकार और प्रधानमंत्री ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या सरकार इस मामले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आदेश देगी।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा नेता आरके सिंह और राजीव चंद्रशेखर के पत्र दिखाए। पत्र में 2015 में कुछ कंपनियों को कोयले की नीलामी पर चिंता जताई गई थी और केवल दो कंपनियों को कोयले की नीलामी के लिए बोली लगाने की अनुमति दी गई थी। जिससे गुटबंदी हुई और राजस्व का नुकसान हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में दोनों को मंत्री बना दिया गया और उसके बाद उनकी चिंताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। पवन खेड़ा ने पूछा, क्या मोदी सरकार ईडी को छापे मारने का आदेश देगी और मिलीभगत व भ्रष्टाचार की इस घिनौनी कहानी की जांच करेगी?
वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी की बात करते हैं। उन्होंने अपने कॉर्पोरेट चंदा देने वालों को एकमात्र गारंटी दी है। वह गारंटी है- चंदा दो, कोयला लो। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का श्वेतपत्र 2014 के कथित कोलगेट घोटाले पर चर्चा के साथ शुरू हुआ। लेकिन असली घोटाला पिछले दस वर्षों के अन्याय काल में हुआ, जब मोदी सरकार ने अपने ही नेताओं की चेतावनी के बावजूद कोयले की खदानों को अपने परम मित्र और सबसे बड़े चंदा दाता को सौंप दिया था। कोयले की नीलामी में पूरी तरह धांधली हुई है।