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कंडोम पैकेट पर छपी तस्वीरों का ‘अध्ययन’ करेगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

Wed, 27 Apr 2016 05:33 AM IST
राजीव सिन्हा/ उमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/ उमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 27 Apr 2016 05:33 AM IST
government will study of printed photographs on condom packets

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह बताने के लिए कहा कि कंडोम और गर्भनिरोधक उत्पादों केपैकेट में छपी तस्वीरों पर गौर कर बताने के लिए कहा है कि क्या वे अश्लीलता को बढ़ावा दे रही हैं? शीर्ष अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल(एएसजी) मनिंदर सिंह इन पैकेटों पर छपी तस्वीरों पर गौर करने के बाद छह हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।



चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने एएसजी मनिंदर सिंह से पूछा है कि कंडोम या अन्य गर्भ निरोधक उत्पादों के पैकेट पर छपी तस्वीरों को लेकर आपत्ति उठाई जा सकती है? क्या यह अश्लीलता संबंधी कानूनी प्रावधानों के दायरे में आता है?


पीठ ने एएसजी से पूछा है कि क्या पैकेट पर छपी इस तरह की तस्वीर या विज्ञापनों पर कोई कार्रवाई हो सकती है? शीर्ष अदालत हिन्दुस्तान लैटेक्स सहित कंडोम और गर्भनिरोधक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों द्वारा मद्रास हाईकोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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वर्ष 2008 में हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि कंडोम आदि केपैकेट पर उत्तेजक और कामुक तस्वीरें नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह अश्लीलता केदायरे में आती है और भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2008 को हाईकोर्ट केफैसले पर रोक लगा दी थी। इस वर्ष फरवरी महीने में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ सर्टिफिकेशन को इस संबंध में पक्ष रखने के लिए कहा था।

सोमवार को एएसजी मनिंदर सिंह ने पीठ को बताया कि केबल या निजी सेटेलाइट चैनलों को इस तरह के विज्ञापनों के लिए केबल टेलीविजन नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट, 1995 पर खरा उतरना पड़ता है।


लेकिन  प्रिंट विज्ञापन में प्री-सेंसरशिप का कोई सरकारी प्रावधान नहीं है। हालांकि अगर विज्ञापन किसी अन्य कानून का उल्लंघन करता हो तो कार्रवाई की जा सकती है। अगली सुनवाई छह हफ्ते बाद होगी।

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