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GoI: आपदा प्रबंधन के लिए अलग-अलग मंत्रालय होंगे जिम्मेदार, तूफान से लेकर सूखा-बाढ़ तक की करेंगे निगरानी
Tue, 23 Sep 2025 03:49 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 23 Sep 2025 03:49 PM IST
सार
अधिसूचना के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय को हिमस्खलन और तेल रिसाव जैसी आपदाओं को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कदम विशेषकर सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में समय पर बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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आपदा प्रबंधन।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्र सरकार ने आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को खास तरह की आपदाओं की जिम्मेदारी सौंपी है। यानी अब हर एक विशिष्ट आपदा की निगरानी, शुरुआती चेतावनी, रोकथाम, शमन और तैयारी की जिम्मेदारी के लिए मंत्रालय तक कर दिए गए हैं। इसके जरिए केंद्र सरकार आपदाओं के दौरान जान-माल के नुकसान को कम से कम करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 35 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए, केंद्र सरकार उन मंत्रालयों या विभागों को अधिसूचित करती है, जिन्हें अलग-अलग वजहों से पैदा हुई आपदाओं के संबंध में निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी, रोकथाम, शमन, तैयारी और क्षमता निर्माण की जिम्मेदारी दी जाएगी।"
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गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 35 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए, केंद्र सरकार उन मंत्रालयों या विभागों को अधिसूचित करती है, जिन्हें अलग-अलग वजहों से पैदा हुई आपदाओं के संबंध में निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी, रोकथाम, शमन, तैयारी और क्षमता निर्माण की जिम्मेदारी दी जाएगी।"
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रक्षा मंत्रालय को हिमस्खलन और तेल रिसाव की जिम्मेदारी
अधिसूचना के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय को हिमस्खलन और तेल रिसाव जैसी आपदाओं को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कदम विशेषकर सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में समय पर बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
UNGA: संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भारत ने रखा आपदा प्रबंधन प्रणाली का मुद्दा, वैश्विक दक्षिण के सहयोग पर जोर
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय करेगा शुरुआती चेतावनी जारी
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को शीत लहर, चक्रवात, बवंडर, भूकंप, लू, बिजली गिरने, सुनामी, ओलावृष्टि और भारी वर्षा के लिए शुरुआती चेतावनी जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिसूचना के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय को हिमस्खलन और तेल रिसाव जैसी आपदाओं को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कदम विशेषकर सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में समय पर बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय करेगा शुरुआती चेतावनी जारी
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को शीत लहर, चक्रवात, बवंडर, भूकंप, लू, बिजली गिरने, सुनामी, ओलावृष्टि और भारी वर्षा के लिए शुरुआती चेतावनी जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय करेगा शुरुआती चेतावनी जारी
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को शीत लहर, चक्रवात, बवंडर, भूकंप, लू, बिजली गिरने, सुनामी, ओलावृष्टि और भारी वर्षा के लिए शुरुआती चेतावनी जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कृषि मंत्रालय संभालेगा सूखा और कीट हमला
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को पाला, शीत लहर, सूखा, ओलावृष्टि और कीट हमले से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कदम किसानों के हित और फसल बचाव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को शीत लहर, चक्रवात, बवंडर, भूकंप, लू, बिजली गिरने, सुनामी, ओलावृष्टि और भारी वर्षा के लिए शुरुआती चेतावनी जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कृषि मंत्रालय संभालेगा सूखा और कीट हमला
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को पाला, शीत लहर, सूखा, ओलावृष्टि और कीट हमले से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कदम किसानों के हित और फसल बचाव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जल शक्ति मंत्रालय को बाढ़ की जिम्मेदारी
जल शक्ति मंत्रालय को बाढ़ और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड से निपटने का काम सौंपा गया है। वहीं, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को शहरी बाढ़ से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन शुरुआती चेतावनी का कार्य इसमें शामिल नहीं होगा।
जंगल की आग, रासायनिक और परमाणु आपदाएं
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को जंगल की आग और औद्योगिक व रासायनिक आपदाओं की जिम्मेदारी दी गई है। खनन मंत्रालय को भूस्खलन से निपटने का कार्य सौंपा गया है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा विभाग को परमाणु और विकिरण आपात स्थितियों की जिम्मेदारी दी गई है।
जल शक्ति मंत्रालय को बाढ़ और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड से निपटने का काम सौंपा गया है। वहीं, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय को शहरी बाढ़ से निपटने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन शुरुआती चेतावनी का कार्य इसमें शामिल नहीं होगा।
जंगल की आग, रासायनिक और परमाणु आपदाएं
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को जंगल की आग और औद्योगिक व रासायनिक आपदाओं की जिम्मेदारी दी गई है। खनन मंत्रालय को भूस्खलन से निपटने का कार्य सौंपा गया है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा विभाग को परमाणु और विकिरण आपात स्थितियों की जिम्मेदारी दी गई है।