Manipur : मणिपुर हिंसा पर संसद में चर्चा से पहले सरकार कर रही तैयारी, PMO-NSA और गृहमंत्री रख रहे निगाह
मौजूदा समय में मणिपुर नाक का सवाल बन गया है। कांग्रेस के सांसद गौरव गगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया और यह मंजूर भी हो गया है। इस नोटिस को लेकर विपक्षी दलों में भी गजब की एकता के संकेत मिल रहे हैं।
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विपक्ष लगातार इस मांग पर अड़ा है कि संसद में मणिपुर पर चर्चा हो और प्रधानमंत्री जवाब दें। संसद में इसे लेकर कार्यवाही ठप हो रही है। लेकिन खबर है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार अपनी चुप्पी तोड़ेगी। संक्षिप्त और ठोस जवाब देगी। विपक्ष की बोलती बंद करने के पूरे प्रयास होंगे। इस पूरे आपरेशन की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यालय खुद निगरानी कर रहा है। मणिपुर के हालात को लेकर एनएसए सचिवालय संवेदनशील है और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। गृह मंत्रालय सूत्रों से आ रही जानकारी इसका संकेत कर रही है कि सरकार मणिपुर पर चर्चा से पहले राज्य में शर्मसार करने वाली स्थितियों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तथा शांति बहाली की दिशा में काफी बढ़त बना लेना चाहती है।
मौजूदा समय में मणिपुर नाक का सवाल बन गया है। कांग्रेस के सांसद गौरव गगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया और यह मंजूर भी हो गया है। इस नोटिस को लेकर विपक्षी दलों में भी गजब की एकता के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव का लोकसभा में गिरना तय है, लेकिन इस बहाने विपक्ष की योजना सरकार के माथे पर बल ला देना है। इसे इस तरह से समझा जा सकता है कि 24 जुलाई को मालवाहक रेलगाड़ी मणिपुर में जरूरी सामान के साथ पहुंची है। इसके साथ-साथ मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये केन्द्र और पांच लाख रुपये राज्य सरकार आर्थिक सहायता के रूप में दे रही है। घायलों का उपचार और उन्हें सहायता दी जा रही है। केन्द्रीय गृहमंत्री ने राज्य में माहिलाओं के साथ हुए अमानवीय अत्याचार की जांच के लिए सीबीआई से सिफारिश की है। इतना ही नहीं मणिपुर और पूर्वोत्तर के मामले में अच्छी समझ रखने वाले विनीत जोशी को डेप्युटेशन से बुलाकर राज्य का मुख्य सचिव बनाया गया है।
सुरक्षा के साये में होगी विश्वास पैदा करने की कोशिश
केन्द्र सरकार को यह कदम काफी पहले उठाना चाहिए था। गृहमंत्री अमित शाह ने मई और जून महीने में मणिपुर का दौरा किया था। पूर्वोत्तर के उग्रवाद और वहां के हालात की विशेषज्ञता रखने वाले सूत्रों का कहना है, सरकार ने समय पर कदम नहीं उठाए। मणिपुर म्यांमार और चीन की सीमा से सटा राज्य है। हालांकि अब सरकार मणिपुर में सुरक्षा की दृष्टि से मैतेई और कुकी के बीच में बफर जोन बनाने की योजना पर विचार कर रही है। राज्य में अर्ध सैनिक बलों की 124 कंपनियां तैनात की जा रही हैं। पूर्वोत्तर के उग्रवाद, वहां के हालात आदि से परिचित असम राइफल की 184 टुकडिय़ों की तैनाती वहां की जा रही है। ड्रोन से हालात पर नजर रखने और हेलीकाप्टर से निगरानी की योजना है। ताकि उपद्रवियों को नियंत्रण में लेकर उनके हथियार सरेंडर कराए जा सकें और शांति बहाली का रास्ता साफ हो सके। इसके साथ-साथ सरकार की योजना 3 मई से भड़की हिंसा, आगजनी में शिकार हुए वहां के लोगों के घावों पर मलहम लगाने की है। वार्ताकार और शांति की पहल करने वालों की भूमिका बढ़ाने की योजना है।
कौन दे रहा है मणिपुर की घटना को धार्मिक रंग?
रक्षा मंत्रालय से अवकाश प्राप्त करने वाले मणिपुर के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य को टारगेट किया जा रहा है। मैतेई और कुकी के बीच में हिंसा और टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन जिस तरह से इसे धार्मिक रंग दिया जा रहा है, वह ठीक नहीं है। गृह मंत्रालय के सूत्र भी सहमत हैं। उनका कहना है कि मणिपुर में जो हुआ वह जनजाति का दर्जा पाए कुकी नगा और इस सूची में शामिल होने की मांग कर रहे मैतेई लोगों के बीच का टकराव है। राज्य में मैतेई बहुसंख्यक (53 प्रतिशत) हैं। इंफाल और उसके आस-पास हैं। इस टकराव को धार्मिक रंग देना बिल्कुल भी ठीक नहीं है। हालांकि दिल्ली में रह रहे मणिपुर मामले के जानकारों से बात करने पर एक तथ्य और निकलकर आता है। वह इस टकराव में राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को भी जिम्मेदार ठहराते हैं। माना जा रहा है कि मणिपुर के मुख्य सचिव बन गए विनीत जोशी सूझबूझ से इस टकराव को रोकने की हर संभव कोशिश करेंगे। इसके लिए जरूरी है कि वहां के धार्मिक संगठनों, लोगों, पूजा स्थलों के प्रमुखों आदि की शांति बहाली में मदद ली जाए। इन सभी प्रयासों से वहां के हालात बदलने की पूरी उम्मीद है।
अमित शाह का दौरा, गृह राज्यमंत्री के 22 दिन और सीबीआई की जांच
मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि गृहमंत्री अमित शाह आखिरी बार 29 जून को तीन दिन के लिए मणिपुर गए थे। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय 22 दिन तक मणिपुर रहकर लौटे हैं। यह मैराथन कवायद राज्य में स्थिति को नियंत्रण में लेकर शांति बहाली के लिए ही थी। अब वहां सीबीआई ने भी जांच करके दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने में तेजी दिखाई है। 6 विशेष मामलों की जांच की जा रही है। हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी जांच कर रहा है। कुल मिलाकर कोशिश दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने की ही है। दरअसल 21 जनवरी 1972 को मणिपुर के पूर्ण राज्य का दर्जा पाने के बाद भी नगा कुकी हिंसात्मक संघर्ष समय-समय पर होते रहे। मणिपुर से नागालैंड का सीमा विवाद, म्यांमार से घुसपैठ समेत तमाम संवेदनशील मुद्दे चार-छह साल के अंतराल पर हमेशा परेशानी बढ़ाते रहे हैं।
विपक्षी दलों का प्रतिनिधि मंडल भी जाएगा मणिपुर
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी मणिपुर का दौरा करके लौटे हैं। अब विपक्ष के नेताओं का प्रतिनिधि मंडल वहां के हालात का जायजा लेने जा रहा है। इसमें कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, गौरव गगोई, जद(यू) के अनिल कुमार हेगड़े, राजीव रंजन, तृणमूल कांग्रेस की सुष्मिता देव समेत 16 दलों के नेता हैं। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि मणिपुर का दौरा करके सब वहां की जनता को संदेश देंगे कि पूरा विपक्ष उनके साथ है। विपक्ष के इस प्रयास पर भी केन्द्र सरकार की पूरी नजर है।
2 मई से शुरू हुई हिंसा,150 ने गंवाई जान और राहत शिविर में अटकी लोगों की सांसें
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2 मई से ही मणिपुर में हिंसक झड़प का सिलसिला शुरू हुआ था। अब तक 150 लोगों की जान जा चुकी है। 500 से अधिक लोग घायल हैं, 5101 मामले सामने आए और 6हजार से अधिक प्रथमिकी दर्ज हुई हैं। 250 से अधिक लोग गिरफ्तार हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखकर 12 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस बार की हिंसक झड़प के बाद राज्य से हजारों की संख्या में लोगों ने पलायन किया है। पड़ोस के राज्य मिजोरम में शरण ली है। अकेले मणिपुर में 57 हजार से अधिक लोग 360 से अधिक राहत शिविरों में हैं। इनके लिए एफसीआई ने 30 हजार मीट्रिक टन चावल आवंटित किया है। रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल, किरासन तेल आदि की आपूर्ति को लेकर भी सरकार संवेदनशील है।