CDSCO: रिश्वत मामले में संयुक्त औषधि नियंत्रक के खिलाफ चलेगा मुकदमा, सरकार ने दी मंजूरी
सीबीआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक (सतर्कता) द्वारा दी गई मुकदमा चलाने की मंजूरी एक विशेष अदालत के समक्ष पेश की। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई को सहायक औषधि निरीक्षक अनिमेष कुमार के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है। अनिमेष मामले में सह-आरोपी हैं।
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केंद्र सरकार ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के संयुक्त औषधि नियंत्रक एस ईश्वर रेड्डी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बायोकॉन बायोलॉजिक्स (Biocon Biologics) के इंसुलिन इंजेक्शन की सिफारिश करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप में उनके खिलाफ मुकदमा शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
सीबीआई ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक (सतर्कता) द्वारा दी गई मुकदमा चलाने की मंजूरी यहां एक विशेष अदालत के समक्ष पेश की। इस संबंध में रेड्डी की टिप्पणी जानने के लिए उनके ऑफिस में कई बार कॉल की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई को सहायक औषधि निरीक्षक अनिमेष कुमार के खिलाफ भी मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है। अनिमेष मामले में सह-आरोपी हैं।
रेड्डी और अनिमेष कुमार के अलावा, सीबीआई ने बायोकॉन बायोलॉजिक्स के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट एल प्रवीण कुमार, सिनर्जी नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिनेश दुआ, जिन्होंने कथित तौर पर रेड्डी को चार लाख रुपये रिश्वत के रूप में दिए थे और बायोकॉन बायोलॉजिक्स के कथित माध्यम गुलजीत सेठी को भी गिरफ्तार किया है।
पिछले साल जून में कथित तौर पर टाइप एक और टाइप दो मधुमेह के उपचार के लिए कंपनी द्वारा विकसित उत्पाद इंसुलिन एस्पार्ट (Insulin Aspart) इंजेक्शन को तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षण (Clinical Trial ) से छूट देने के लिए रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तारियां की गई थीं। हालांकि, किरण मजूमदार शॉ के नेतृत्व वाली बायोकॉन की सहायक कंपनी बायोकॉन बायोलॉजिक्स ने रिश्वत देने के आरोपों से इनकार किया है।
बता दें कि रेड्डी को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले वर्ष उनका निलंबन रद्द कर दिया और उन्हें संयुक्त औषधि नियंत्रक के रूप में बहाल कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने पिछले साल अगस्त में आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था, लेकिन मुकदमा शुरू नहीं हुआ था क्योंकि अभियोजन की मंजूरी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मामले में कार्यवाही शुरू करने से पहले एक अनिवार्य आवश्यकता थी, जिसका इंतजार किया जा रहा था।
उन्होंने बताया कि पिछले साल अगस्त में दायर अपने आरोपपत्र में एजेंसी ने आरोप लगाया था कि बायोकॉन बायोलॉजिक्स के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट एल प्रवीण कुमार की मंजूरी के बाद रेड्डी को रिश्वत का भुगतान किया गया था। आरोपपत्र दायर होने के बाद कंपनी ने एक बयान में कहा था कि वह नियामक विज्ञान में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन करती है। इसी वजह से उसे अमेरिका, कनाडा, यूरोपीय संघ, जापान जैसे आईसीएच देशों में बायोसिमिलर दवा के लिए सबसे बड़ी संख्या में नियामक अनुमोदन वाली एकमात्र भारतीय कंपनी होने का गौरव प्राप्त है।
कंपनी ने बयान में कहा था कि कंपनी ने सीडीएससीओ अधिकारी को कथित रिश्वत देने के लिए बायोइनोवेट रिसर्च या नामित किसी अन्य पार्टी को कोई भुगतान नहीं किया है। हम मौजूदा प्रावधानों और प्राथमिकता के तहत इंसुलिन एस्पार्ट के लिए अनुमोदन प्राप्त करने में गलत कार्यों के अन्य आरोपों से इनकार करते हैं। हम न्यायिक प्रणाली में अपना विश्वास दोहराते हैं और जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेंगे।