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जहाज निर्माण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए सरकार ने बदले नियम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 23 Oct 2020 02:16 AM IST
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Twitter
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केंद्र सरकार ने जहाज निर्माण के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति देने के लिए अहम कदम उठाया है। सरकार ने राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल (आरओएफआर) लाइसेंसिंग नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे माल ढुलाई में स्वदेशी जहाजों को ही प्राथमिकता मिलेगी।



केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने बृहस्पतिवार को बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए यह प्राथमिकता उन जहाजों को मिलेगी, जो भारत में ही बने होंगे और उनका मालिकाना हक भी किसी भारतीय कंपनी के भारतीय मालिक के पास ही होगा।



केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, इससे ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को बढ़ावा मिलने के साथ ही घरेलू जहाजरानी उद्योग को रणनीतिक बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में नए रोजगार भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा, सरकार का लक्ष्य वैश्विक जहाजरानी उद्योग में भारत की वर्तमान एक फीसदी हिस्सेदारी को बढ़ाकर अगले पांच साल में 3 फीसदी तक पहुंचाने का है।

मंत्री ने इस नीतिगत बदलाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घरेलू उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में ‘बोल्ड कदम’ करार दिया। उन्होंने कहा, जहाजरानी मंत्रालय ने सरकार की मेक इन इंडिया नीति के हिसाब से चलते हुए टेंडर प्रक्रिया के जरिये जहाज या नौका किराये पर लेने की आरओएफआर लाइसेंसिंग कंडीशन की समीक्षा की। मंडाविया ने कहा, भारत अमूमन चार तरह के एक्जिम कार्गों अपने बंदरगाहों पर संभालता है। 

बता दें कि केंद्र सरकार पहले ही देश के भीतर ही जहाज बनाने के लिए 20 फीसदी की छूट देती है। यह छूट जहाजरानी मंत्रालय की तरफ से दीर्घकालिक  छूट अभियान में 2016 में लागू की गई जहाजरानी वित्तीय सहायता नीति के तहत मिलती है। अभी तक इस 61.05 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है। यह छूट 2026 तक देने की योजना है।


कम बोली लगाने वाली विदेशी कंपनी से ज्यादा देशी अहम
केंद्रीय मंत्री ने कहा, यदि कोई इंटरनेशनल जहाज निर्माण कंपनी टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाती है, तो भी ‘भारत में बने, भारतीय तिरंगा लगाने वाले और भारतीय मालिकाना हक वाले जहाज की महंगी बोली को आरओएफआर के तहत प्राथमिकता दी जाएगी।

ऐसे तय होगी प्राथमिकता

  • पहली प्राथमिकता पूरी तरह भारत में निर्मित भारतीय कंपनी के संचालन वाले और भारतीय मालिक वाले जहाज को मिलेगी।
  • दूसरी प्राथमिकता उसे मिलेगी, जिसमें जहाज भले ही विदेश से बना होगा, लेकिन संचालक कंपनी और मालिक भारतीय हों।
  • तीसरी प्राथमिकता भारत में निर्मित ऐसे जहाज को मिलेगी, जिसकी संचालक कंपनी मालिक विदेशी हों।


यह भी जानिए
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