विवादित रिटायरमेंट कानून पर मुहर: फ्रांस में जल्द लागू होगा नया पेंशन सुधार, PM मैक्रों ने दी मंजूरी
कॉन्स्टिट्यूशन काउंसिल के 9 सदस्य ने माना कि नई पेंशन योजना संविधान की नजर में सही है। इस योजना के तहत ही रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था। तब से ही सरकार के खिलाफ विरोध और हिंसा जारी है।
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फ्रांस की कॉन्स्टिट्यूशन काउंसिल (सुप्रीम कोर्ट) ने सरकार के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने वाले फैसले को मंजूरी दे दी है। इसी रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 64 हो गई है। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने इस कानून पर साइन कर दिए हैं। अब इसे जल्द लागू किया जाएगा। वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद पेरिस समेत 200 शहरों में हिंसा बढ़ गई है।
कॉन्स्टिट्यूशन काउंसिल के 9 सदस्य ने माना कि नई पेंशन योजना संविधान की नजर में सही है। इस योजना के तहत ही रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया था। तब से ही सरकार के खिलाफ विरोध और हिंसा जारी है। शुक्रवार को कोर्ट के फैसले के बाद पेरिस में पुलिस ने 112 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया।
सितंबर तक लागू हो सकता है कानून
अदालत ने नई पेंशन योजना के तहत दिए गए 6 अन्य प्रस्ताव खारिज कर दिए। इसमें एक प्रस्ताव जिसे रद्द किया गया उसमें कहा गया था कि कंपनियां 55 साल से ज्यादा उम्र वाले कितने लोगों को रोजगार देती हैं, इसकी जानकारी देगी। वहीं, रिटायरमेंट कानून को कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने बताया कि ये कानून इस साल सितंबर तक लागू किया जा सकता है। लेबर मिनिस्टर ओलिवियर डसॉप्ट का कहना है कि सरकार की योजना के अनुसार कानून एक सितंबर से लागू होगा।
देशभर में शुरू हुए प्रदर्शन
इस साल जनवरीमें राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेंशन सुधार की बात कही। इसको लेकर बनाई गई योजना के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन शुरू हुए। इसमें कहा गया कि योजना से जुड़ा एक बिल संसद में पारित होने के बाद रिटायरमेंट की उम्र को 62 से बढ़ा कर 64 कर देगा। साथ ही पूरी पेंशन के लिए जरूरी न्यूनतम सेवा काल की अवधि को भी बढ़ा देगा। यानी 2027 से लोगों को पूरी पेंशन लेने के लिए कुल 43 साल काम करना होगा। अभी तक ये न्यूनतम सेवा काल 42 साल था।
बिना वोटिंग के पास हुआ बिल
यह बिल हाल ही में 11 मार्च को सीनेट (फ्रांस की संसद का अपर हाउस) में पास हो गया। इसके बाद 16 मार्च को एक जॉइंट कमेटी ने इसे रिव्यू करके अप्रूव कर दिया। 17 मार्च को संसद को दोनों सदनों में इस पर फाइनल वोटिंग होनी थी। लेकिन नेशनल असैंबली में प्रधानमंत्री एलिजाबेथ बॉर्न ने संवैधानिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए बिना वोटिंग के ही बिल पास करवा दिया गया। पीएम ने आर्टिकल 49.3 का इस्तेमाल किया, जिसके तहत बहुमत न होने पर सरकार के पास बिना वोटिंग के बिल पास कराने का अधिकार है। इसके बाद विपक्षी नेता मरीन ले पेन ने इमैनुएल मैक्रों की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की बात कही थी।