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1944 में गोडसे से चाकू छीनकर बचाई महात्मा गांधी की जान, 98 साल की उम्र में निधन

Thu, 20 Jul 2017 10:57 AM IST
amarujala.com, Presented by:विपुल प्रकाश
amarujala.com, Presented by:विपुल प्रकाश Updated Thu, 20 Jul 2017 10:57 AM IST
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Freedom fighter who saved Mahatma Gandhi in 1944

स्वतंत्रता सेनानी भीकू दाजी भीलारे जिन्होंने महात्मा गांधी की जान बचाई थी उनका पुणे के भीलारी में 98 साल की उम्र में निधन हो गया। भीकू दाजी को भिलारे गुरुजी के नाम से भी जाना जाता है इन्होंने 1944 में पद्मभूरी में नाथुराम गोडसे से महात्मा गांधी को बचाया था।  भीलारे का अंतिम संस्कार बुधवार को हुआ। जिसमें कई पार्टी के नेताओं और बड़ी संख्या में आए लोगों ने हिस्सा लिया।

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भीकू दाजी भीलारे का जन्म 26 नवंबर 1919 को हुआ था। भीलारे सातारा जिले में क्रांतिकारी नाना पाटिल और अन्य लोगों द्वारा संचालित "समानांतर सरकार" आंदोलन में सक्रिय थे। आजादी के बाद, भीलारे ने 18 साल तक राज्य विधानसभा में जवली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

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एक साक्षात्कार में भिल्ले ने कहा था कि "पंचगनी में महात्मा गांधी की प्रार्थना सभा में सभी को भाग लेने की अनुमति दी गई थी। उस दिन, उनके सहयोगी उषा मेहता, प्यारेलाल, अरुणा असफ अली और अन्य भी प्रार्थना सभा के लिए उपस्थित थे। गोडसे ने हाथ में चाकू लिए हुए गांधीजी से कहा कि उन्हें कुछ सवाल पूछना है, लेकिन मैंने उसे रोक दिया। अपना हाथ बढ़ाकर चाकू छीन लिया, लेकिन गांधीजी ने गोडसे को जाने दिया।"
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महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी द्वारा रखे गए रिकॉर्डों के अनुसार, गोडसे को उसके लॉल्ज के मालिक भिलेरे और मनीशंकर पुरोहित द्वारा अधिक बल मिला। हालांकि, कपूर कमिशन के अनुसार, "जुलाई 1944 की घटना का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

Freedom fighter who saved Mahatma Gandhi in 1944
भीकू दाजी भीलारे

जब पुरोहित को आयोग के समक्ष पेश किया गया तो उन्होंने कहा कि यह घटना 1944 में नहीं बल्कि जुलाई 1947 में हुई। इसके पहले भिलारे ने इसका कोई उल्लेख नहीं किया। हालांकी संयोग से आयोग ने जुलाई 1944 में पंचगनी में प्रार्थना सभा में कुछ लोगो द्वारा बाधा पहुंचाने का उल्लेख किया।

महात्मा गांधी की हत्या के पीछे की साजिश की जांच के लिए 22 मार्च 1965 को सुप्रीम कोर्ट के जज जे के कपूर को नियुक्त किया गया था। आगा खान पैलेस जहां उन्हें 1944 में जेल में रखा गया था जहां से उनकी रिहाई के तुरंत बाद मलेरिया हो गया था। डॉक्टर की सलाह पर गांधीजी आराम करने के लिए पंचगनी चले गए थे।

वृद्ध स्वतंत्रता सेनानी एंव किसानों और श्रमिक पार्टी के नेता एन डी पाटिल, जिनकी उम्र 90 वर्ष है ने बुधवार को बताया कि भीलारे उन दिनों में उनके जैसे युवाओं के लिए एक नायक बन गए थे। गोडसे से गांधी जी को गुरुजी द्वारा बचाए जाने की खबर सातारा में हर जगह फैल गई। मैं 15 साल का था। हम में से कई छात्र एक ग्रुप बनाकर गुरुजी से मिलने के लिए चले गए। वह हमारे लिए एक आदर्श बन गये थें। उन्होंने पूरे जीवन में एक साधारण जीवन जीया और गांधीवादी सिद्धांतों का पालन किया।

सिक्किम के गवर्नर और सातारा के पूर्व पूर्व सांसद श्रीनिवास पाटिल जो भिलारे के करीबी थे, उन्होने कहा, "वे एक सच्चे मार्गदर्शक और एक स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने हमेशा गांधीजी के आदर्शों को अपनाए रखा। भीलारे गुरुजी ने मेरे करियर को सही दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई।"

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