बसपा के पूर्व विधायक हाजी शब्बन पार्टी से निष्कासित
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पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने और नसीमुद्दीन सिद्दीकी से नजदीकियों का खामियाजा बसपा के पूर्व विधायक एवं मुस्लिम भाईचारा कमेटी के मंडल प्रभारी फरहत हुसैन उर्फ हाजी शब्बन को उठाना पड़ा।
एक ओर लखनऊ में बसपा महासचिव सतीश मिश्रा ने कद्दावर नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से निकालने की घोषणा की, वहीं जिलाध्यक्ष ने मंडी धनौरा में पत्रकारों को बसपा के पूर्व विधायक एवं मुस्लिम भाईचारा कमेटी मंडल प्रभारी फरहत हुसैन उर्फ हाजी शब्बन को पार्टी से निष्कासित करने की जानकारी दी। कार्यकर्ताओं के एक धड़े की ओर से लगातार हो रहे विरोध के बाद बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी एंड पार्टी पर हाई कमान की कार्रवाई की गाज गिर ही गई। इसका अंदेशा पहले ही लगाया चुका था।
बुधवार को लखनऊ में पार्टी महासचिव सतीश मिश्रा ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके पुत्र अफजाल सिद्दीकी को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की तो कार्यकर्ताओं के बीच ये चर्चाएं आम हो गई कि देर सबेर जिले में भी नसीमुद्दीन के नजदीकियों पर गाज गिरने वाली है। देर न करते हुए बसपा के जिलाध्यक्ष डॉ. होरी सिंह ने मंडी धनौरा में पत्रकार वार्ता का आयोजन करते हुए बसपा के पूर्व विधायक एवं मुस्लिम भाईचारा कमेटी मंडल प्रभारी फरहत हुसैन उर्फ हाजी शब्बन को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
उन्होंने कहा हाजी शब्बन के पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने की रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को विधानसभा चुनावों के बाद ही भेजी गई थी। हाईकमान के निर्देश के बाद उन्हें पार्टी से निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के हर आदेश को पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगाई है। लेकिन कुछ लोगों के बहकावे में मायावती ने उनको पार्टी से निकाल दिया है।
उन्होंने बसपा सुप्रीमो द्वारा नसीमुद्दीन सिद्दीकी द्वारा पैसे लेने के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए उनको साबित करने की चुनौती दी। कहा कि वे नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगे। उन्होंने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर लगाए गए आरोपों के विरोध में बसपा से त्यागपत्र देने की घोषणा की।
बसपा जिलाध्यक्ष डॉ. होरी सिंह ने बताया कि हाजी शब्बन ने बछरायूं में मीट फैक्ट्री खोली है। इसमें नसीमुद्दीन सिद्दीकी की भी 75 फीसदी हिस्सेदारी है। स्थानीय लोग मीट फैक्ट्री से फैलने वाले प्रदूषण को लेकर लामबंद थे। विधानसभा चुनावों में पार्टी को मीट फैक्ट्री के विरोध का भी खामियाजा उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले हाजी शब्बन को मुस्लिम भाईचारा कमेटी का मंडल का प्रभारी बनाया था। इसके बाद भी हाजी शब्बन ने अमरोहा जैसे मुस्लिम बहुल विधानसभा सीट पर कमेटी की एक भी मीटिंग नहीं की। यही स्थिति अन्य विधानसभा सीटों की भी रही। इसके कारण जिले में पार्टी को मुस्लिम वोट नहीं मिले। कुल मिला कर विधानसभा चुनाव में जिले में पार्टी को मिली हार का घड़ा हाजी शब्बन के ऊपर फोड़ दिया गया।