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पूर्व बैंकिंग सचिव ने कहा बैंकों में पहली बार देखा नकदी न होने का बोर्ड

Fri, 02 Dec 2016 09:22 PM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Dec 2016 09:22 PM IST
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Former banking secretary DK Mittal talk to amar ujala about demonetization

भारत सरकार के पूर्व बैंकिंग सचिव डीके मित्तल को बैंकों में नकदी न होने का सवाल खूब परेशान कर रहा है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में डीके मित्तल ने कहा कि वह अपने जीवन में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बैंकों में नकदी न होने का बोर्ड लगा हुआ देख रहे हैं।

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बैंकों की शाखाओं में इस तरह की स्थिति कहीं से भी अच्छी नहीं कही जा सकती। पूर्व बैंकिंग सचिव ने कहा कि उन्हें ऐसी कोई स्थिति याद नहीं है जब देश के बैंकों में नकदी न होने का बोर्ड लगा हो।
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लुटियन जोन में मौजूद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की मुख्य शाखाओं के कई बड़े अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने भी इस तरह की स्थिति कभी नहीं देखी थी। एक वरिष्ठ प्रबंधक का कहना था कि नकदी न होने का बोर्ड लगाना, जानकारी देना हमारे लिए शर्म की स्थिति है, लेकिन यह एक वास्तविकता है।
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यूनियन बैंक के प्रबंधक के मुताबिक 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने 5000 और 10 हजार के नोट चलन से बंद किए थे, लेकिन तब भी यह स्थिति नहीं आई थी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के अधिकारी अधिकारिक रूप से कोई भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि बैंक में आने वाले चेक का भी उसी दिन नकद भुगतान नहीं हो पा रहा है।

टोकन पर चल रही गाड़ी

Former banking secretary DK Mittal talk to amar ujala about demonetization

कई बैंकों ने साप्ताहिक नकदी निकालने के लिए लाइन में लगने वाले लोगों के लिए टोकन व्यवस्था शुरू कर दी है। इसके लिए ग्राहक बैंक के अधिकारी को चेक दे रहा है और उसका उस आधार पर नंबर लगाकर टोकन दिया जा रहा है। बाद में नकद राशि के बैंक में आने पर ग्राहक का नंबर आने पर उसे राशि का भुगतान हो रहा है।

एक बैंक के प्रबंधक के अनुसार इस तरह से 30 नवंबर को जमा किए गए कुछ चेकों का एक दिसंबर को भुगतान किया गया। सूत्र का कहना है कि मौजूदा समय में बैंक के पास कुछ हजार की करेंसी है और भुगतान लाखों रुपये के करने हैं। ऐसे कल सुबह तक बैंक में आने वाली करेंसी पर निर्भर रहना पड़ेगा।

लेकिन लोग खुश हैं
पूर्व बैंकिंग सचिव डीके मित्तल के अलावा अधिकांश बैंक अधिकारियों का कहना है कि तमाम विषम परिस्थितियों के बाद भी लोग सरकार के 500 और 1000 की करेंसी को चलन से बाहर करने के फैसले से खुश हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि लोगबाग बैंक के कर्मचारियों को तंग कर रहे हैं।

कुछ नकदी न होने के कारण परेशान ग्राहक छोटी बड़ी अभद्रता भी कर रहे हैं। कहीं-कहीं बैंक कर्मियों पर हमले की भी खबर आ रही है, लेकिन लाइन में लगी आम जनता अभी सरकार के साथ है। उसे सरकार का यह निर्णय अच्छा लग रहा है।

10-15 दिन में बहुरेंगे हालात

Former banking secretary DK Mittal talk to amar ujala about demonetization

बैंक के बड़े अधिकारियों का कहना है कि शीर्ष स्तर पर 24 घंटे प्रयास जारी है। उन्हें उम्मीद है कि 10-15 दिन के भीतर स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। नकदी के संकट से दिल्ली और आस-पास तथा महा नगरों के बैंक ऊबर सकते हैं।

जबकि स्थानीय, दूर-दराज तथा कस्बाई बैंकों की स्थिति में सुधार आने में महीना भर लग सकता है। नई दिल्ली के पटेल चौक पर स्थित पंजाब नेशनल बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार स्थानीय और कस्बाई बैंकों में करेंसी की उपलब्धता के लिए खास तौर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

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