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भारत में आसानी से पढ़ सकेंगे विदेशी विद्यार्थी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 03 Dec 2018 07:24 AM IST
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- फोटो : डेमो
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हर साल करीब तीन लाख विद्यार्थी पढ़ने के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन यहां आकर पढ़ने वाले विदेशी विद्यार्थियों की संख्या सालाना महज 50,000 ही पहुंच पाती है। देश के विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थानों में यह संख्या बढ़ाने और विदेशी विद्यार्थियों के लिए यहां आकर पढ़ने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने इसी साल स्टडी इन इंडिया अभियान की शुरुआत की है। इसकी जिम्मेदारी मिनी रत्न कंपनी एडिसल इंडिया लिमिटेड को सौंपी गई है। इस दिशा में आगे के कार्यों पर शिशिर चौरसिया ने एडिसल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष और एमडी दीप्तीमान दास से खास बातचीत की।
पेश हैं अंश:
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प्रश्न- समय कम है और काम बहुत अधिक। इतनी कम अवधि में कैसे लक्ष्य पूरा होगा?
उत्तर- इस अभियान के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी और अफ्रीकी देशों सहित करीब 30 देशों को लक्ष्य किया गया है, जहां के विद्यार्थी यहां पढ़ने आते हैं। कम समय में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन 160 विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों से साझेदारी की गई है, जिन्हें नेशनल इंस्टीट्यूशन रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) से उच्च रैंकिंग मिली है। साथ ही ये नेशनल एक्रिडेशन एंड असेसमेंट काउंसिल (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त हों। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ‘स्टडीइनइंडिया डॉट जीओवी डॉट इन’ नामक वेब पोर्टल विकसित किया गया है। इसके जरिए विदेशी विद्यार्थी घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। लक्षित देशों में रोडशो करने के साथ सोशल मीडिया के जरिए विज्ञापन अभियान भी चलाया जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय मिलकर ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं, जिससे विदेशी विद्यार्थिओं को यहां आने के लिए आसानी से वीजा मिल सके। साथ ही कुछ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में फी-वेवर देने का भी खाका खींचा गया है। इसके लिए सरकार हमें दो साल तक के लिए फंड भी मुहैया करा रही है।
उत्तर- इस अभियान के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी और अफ्रीकी देशों सहित करीब 30 देशों को लक्ष्य किया गया है, जहां के विद्यार्थी यहां पढ़ने आते हैं। कम समय में इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन 160 विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों से साझेदारी की गई है, जिन्हें नेशनल इंस्टीट्यूशन रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) से उच्च रैंकिंग मिली है। साथ ही ये नेशनल एक्रिडेशन एंड असेसमेंट काउंसिल (एनएएसी) से मान्यता प्राप्त हों। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ‘स्टडीइनइंडिया डॉट जीओवी डॉट इन’ नामक वेब पोर्टल विकसित किया गया है। इसके जरिए विदेशी विद्यार्थी घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। लक्षित देशों में रोडशो करने के साथ सोशल मीडिया के जरिए विज्ञापन अभियान भी चलाया जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी), विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय मिलकर ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं, जिससे विदेशी विद्यार्थिओं को यहां आने के लिए आसानी से वीजा मिल सके। साथ ही कुछ विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में फी-वेवर देने का भी खाका खींचा गया है। इसके लिए सरकार हमें दो साल तक के लिए फंड भी मुहैया करा रही है।
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प्रश्न- केंद्र ने स्टडी इन इंडिया अभियान की जिम्मेदारी एडिसल इंडिया लिमिटेड को सौंपी है। विदेशी विद्यार्थियों को आकर्षित करने की दिशा में क्या हो रहा है?
उत्तर- सभी भारतीयों को इस बात की जानकारी है कि देश में आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, आईआईआईटी, वीआईटी, एसआरएस और जेएनयू जैसे विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान हैं। लेकिन विदेशी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को इस संबंध में कम जानकारी है। उन सभी तक इन संस्थानों और उनके शैक्षणिक कैलेंडर की जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए सरकार ने स्टडी इन इंडिया अभियान की शुरुआत की है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश से हर साल करीब तीन लाख विद्यार्थी अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में पढ़ने जाते हैं। इसके उलट हमारे यहां सालाना करीब 50,000 विद्यार्थी ही पढ़ने आते हैं। इस अभियान के जरिए सरकार की कोशिश इस संख्या को अगले पांच साल में यानी 2023 तक चार गुना यानी दो लाख तक पहुंचाने की है। इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
उत्तर- सभी भारतीयों को इस बात की जानकारी है कि देश में आईआईटी, आईआईएम, एनआईटी, आईआईआईटी, वीआईटी, एसआरएस और जेएनयू जैसे विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान हैं। लेकिन विदेशी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को इस संबंध में कम जानकारी है। उन सभी तक इन संस्थानों और उनके शैक्षणिक कैलेंडर की जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए सरकार ने स्टडी इन इंडिया अभियान की शुरुआत की है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देश से हर साल करीब तीन लाख विद्यार्थी अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में पढ़ने जाते हैं। इसके उलट हमारे यहां सालाना करीब 50,000 विद्यार्थी ही पढ़ने आते हैं। इस अभियान के जरिए सरकार की कोशिश इस संख्या को अगले पांच साल में यानी 2023 तक चार गुना यानी दो लाख तक पहुंचाने की है। इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
प्रश्न- एडिसल इंडिया लिमिटेड ने मॉरीशस सरकार संग मिलकर अर्ली डिजिटल लर्निंग परियोजना शुरू की है। इसके बारे में कुछ बताएं?
उत्तर - अर्ली डिजिटल लर्निंग परियोजना (ईडीएलपी) के पहले चरण के तहत मॉरीशस में कक्षा एक और दो के बच्चों को तकनीक के जरिए शिक्षा देने की कवायद चल रही है। इसके तहत वहां 27,000 स्मार्ट ई-टेबलेट की आपूर्ति शुरू की गई है। टेबलेट की मदद से वहां के बच्चों को कहीं भी और कभी भी (एनी टाइम एनी व्हेयर) पढ़ने में सक्षम बनाया जा रहा है। इस परियोजना के बेहतर परिणाम को देखते हुए मॉरीशस सरकार ने इसके दूसरे चरण पर काम शुरू करने का अनुरोध किया है। दूसरे चरण में कक्षा तीन के बच्चों को शामिल किया जाएगा।
उत्तर - अर्ली डिजिटल लर्निंग परियोजना (ईडीएलपी) के पहले चरण के तहत मॉरीशस में कक्षा एक और दो के बच्चों को तकनीक के जरिए शिक्षा देने की कवायद चल रही है। इसके तहत वहां 27,000 स्मार्ट ई-टेबलेट की आपूर्ति शुरू की गई है। टेबलेट की मदद से वहां के बच्चों को कहीं भी और कभी भी (एनी टाइम एनी व्हेयर) पढ़ने में सक्षम बनाया जा रहा है। इस परियोजना के बेहतर परिणाम को देखते हुए मॉरीशस सरकार ने इसके दूसरे चरण पर काम शुरू करने का अनुरोध किया है। दूसरे चरण में कक्षा तीन के बच्चों को शामिल किया जाएगा।
प्रश्न- एडिसल इंडिया लिमिटेड ने एक ऑनलाइन टेस्टिंग एंड असेसमेंट सर्विसेज (ओटीएएस) वर्टिकल शुरू किया है। इस क्षेत्र में कैसी प्रगति है?
उत्तर- मुझे लगता है कि भविष्य में ऑनलाइन टेस्टिंग और असेसमेंट का तरीका ही सर्व स्वीकार्य होगा क्योंकि इसमें पारदर्शिता है। इसके तहत केंद्र सरकार की कंपनियों, स्वायत्त संस्थाओं और सरकारी विभागों में ऑनलाइन टेस्टिंग और असेसमेंट की जाती है। हाल ही में कई राज्यों में भी इसे शुरू किया गया है। वर्तमान में परीक्षा लेने और इसके परिणाम जारी करने में जिस प्रकार से पक्षपात और भेदभाव की खबरें सामने आती हैं, ऐसी स्थिति में यह ओटीएएस बिल्कुल अलग है। इसे 2015 से शुरू किया गया है। उदाहरण के तौर पर मान लिजिए कि किसी पीएसयू में कुछ पदों पर भर्ती निकलती है, जिस पर अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को एक लिंक मुहैया कराई जाती है। उन्हें ऑनलाइन तरीके से ही कॉल लेटर भेजा जाता है। फिर ऑनलाइन टेस्ट के बाद परिणाम भी ऑनलाइन तरीके से जारी किया जाता है। परिणाम जारी करने से पहले प्रश्नों का उत्तर ऑनलाइन जारी कर दिया जाता है ताकि कोई गलती होने पर उम्मीदवार अपनी आपत्ति व्यक्त कर सकें। कुछ वर्षों में इस वर्टिकल की प्रशंसा हुई है। ओटीएएस के जरिए तीन साल में 45 लाख उम्मीदवारों का परीक्षण किया गया है।
उत्तर- मुझे लगता है कि भविष्य में ऑनलाइन टेस्टिंग और असेसमेंट का तरीका ही सर्व स्वीकार्य होगा क्योंकि इसमें पारदर्शिता है। इसके तहत केंद्र सरकार की कंपनियों, स्वायत्त संस्थाओं और सरकारी विभागों में ऑनलाइन टेस्टिंग और असेसमेंट की जाती है। हाल ही में कई राज्यों में भी इसे शुरू किया गया है। वर्तमान में परीक्षा लेने और इसके परिणाम जारी करने में जिस प्रकार से पक्षपात और भेदभाव की खबरें सामने आती हैं, ऐसी स्थिति में यह ओटीएएस बिल्कुल अलग है। इसे 2015 से शुरू किया गया है। उदाहरण के तौर पर मान लिजिए कि किसी पीएसयू में कुछ पदों पर भर्ती निकलती है, जिस पर अप्लाई करने के लिए उम्मीदवारों को एक लिंक मुहैया कराई जाती है। उन्हें ऑनलाइन तरीके से ही कॉल लेटर भेजा जाता है। फिर ऑनलाइन टेस्ट के बाद परिणाम भी ऑनलाइन तरीके से जारी किया जाता है। परिणाम जारी करने से पहले प्रश्नों का उत्तर ऑनलाइन जारी कर दिया जाता है ताकि कोई गलती होने पर उम्मीदवार अपनी आपत्ति व्यक्त कर सकें। कुछ वर्षों में इस वर्टिकल की प्रशंसा हुई है। ओटीएएस के जरिए तीन साल में 45 लाख उम्मीदवारों का परीक्षण किया गया है।
प्रश्न- एडिसल इंडिया लिमिटेड सलाहकार सेवाएं भी दे रही है?
उत्तर- जी हां, सही कहा आपने। एडिसल इंडिया लिमिटेड शैक्षिक क्षेत्र में सलाहकार सेवाएं भी दे रही है। राष्ट्रीय महत्व के किसी भी सरकारी संस्थान को देख लें, उसका ब्लू प्रिंट या डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) एडिसल इंडिया लिमिटेड ही बनाती है। इसके अलावा हम सरकार या सरकारी संगठनों के लिए भी कई काम करते हैं। हमारा एक इंफ्रास्ट्रक्चर विंग भी है, जो किसी परियोजना को धरातल पर उतारने में मदद करता है।
एमएचआरडी, विदेश और गृह मंत्रालय मिलकर ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं, जिससे विदेशी विद्यार्थिओं को भारत आने के लिए आसानी से मिल सके वीजा
दीप्तीमान दास, अध्यक्ष एवं एमडी, एडिसल इंडिया लिमिटेड
उत्तर- जी हां, सही कहा आपने। एडिसल इंडिया लिमिटेड शैक्षिक क्षेत्र में सलाहकार सेवाएं भी दे रही है। राष्ट्रीय महत्व के किसी भी सरकारी संस्थान को देख लें, उसका ब्लू प्रिंट या डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) एडिसल इंडिया लिमिटेड ही बनाती है। इसके अलावा हम सरकार या सरकारी संगठनों के लिए भी कई काम करते हैं। हमारा एक इंफ्रास्ट्रक्चर विंग भी है, जो किसी परियोजना को धरातल पर उतारने में मदद करता है।
एमएचआरडी, विदेश और गृह मंत्रालय मिलकर ऐसा वातावरण तैयार कर रहे हैं, जिससे विदेशी विद्यार्थिओं को भारत आने के लिए आसानी से मिल सके वीजा
दीप्तीमान दास, अध्यक्ष एवं एमडी, एडिसल इंडिया लिमिटेड