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पहली बार किसी सीबीआई निदेशक ने लिया आधी रात को कार्यभार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 25 Oct 2018 06:08 AM IST
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के नागेश्वर राव
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किसी भी सामान्य रात को सीबीआई मुख्यालय में आपको इसकी सुरक्षा में लगे सीआईएसएफ के जवानों के जूतों की गूंजती आवाज के अलावा सन्नाटा ही सुनाई देगा, लेकिन मंगलवार की रात कुछ अलग थी। सूत्रों के अनुसार, रात में करीब 10 बजे अचानक मुख्यालय के परिसर में कारों से 15 से 16 अधिकारी पहुंचे और हलचल शुरू हो गई। थोड़ी देर बाद इन सभी के पीछे एक सफेद कार से एम. नागेश्वर राव आए, जिन्हें सीबीआई निदेशक का अंतरिम प्रभार दिया गया था। इतिहास रचा जा रहा था। सीबीआई के इतिहास में कभी इस तरह से निदेशक नहीं बदला गया था।
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1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी राव सीधे अपने दफ्तर में पहुंचे और करीब 11.30 बजे उन्होंने अंतरिम निदेशक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल ली। इस दौरान सीबीआई का पूरा स्टाफ एजेंसी में हो रहे बदलावों से पूरी तरह अनजान था। जिम्मेदारी संभालते ही राव ने सभी अधिकारियों को सभी अहम फाइलों को अपने कब्जे में लेने का आदेश दिया, जिससे उनमें किसी भी तरह की गड़बड़ी या बदलाव की आशंका को खत्म किया जा सके।
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7.30 पर घर के लिए चले वर्मा, 8 बजे तय हो गया भाग्य
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले आलोक वर्मा मंगलवार शाम को करीब 7.30 बजे अपनी नियमित दिनचर्या के हिसाब से जब कार्यालय से घर के लिए रवाना हुए थे तो वही सीबीआई निदेशक थे। लेकिन आधी रात बीतते-बीतते सबकुछ बदल चुका था। शाम के समय सतर्कता भवन में केंद्रीय सतर्कता आयोग की तरफ से एक बैठक बुलाई गई, जिसमें वर्मा और उनके डिप्टी के तौर पर तैनात विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच चल रही कलह के बाद इन दोनों अधिकारियों का भविष्य तय किया जाना था।
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उपलब्ध कागजातों का अवलोकन करने के बाद सीवीसी ने एकमत होकर वर्मा और अस्थाना को सीबीआई अधिकारी के तौर पर मिले अधिकारों से वंचित करने का निर्णय लिया। सीवीसी की तरफ से करीब 8 बजे सरकार को इन दोनों अधिकारियों को हटाने की सिफारिश भेजी गई। इस सिफारिश के आधार पर कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने संयुक्त निदेशक नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाने का आदेश जारी कर दिया।