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पकवानों की चाह अटलजी को अक्सर खींच लाती थी ग्वालियर की गलियों में

Fri, 17 Aug 2018 06:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Aug 2018 06:52 AM IST
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fond of eating atal ji use to visit gwalior tinm to time
अटल बिहारी वाजपेई
अपनी वाकपटुता के साथ ही स्वाद को लेकर भी अटल बिहारी वाजपेयी काफी शौकीन रहे हैं। हरदिल अजीज राजनेता को पकवानों और लजीज खाने से खासा लगाव रहा।  ग्वालियर के बहादुरा के बूंदी के लड्डू हों या फिर दौलतगंज की मंगौड़ी। हर दुकान से उनकी गहरी यादें जुड़ी हुई हैं। तमाम व्यस्तताओं के बाद भी उनकी जुबां से ग्वालियर के पकवानों का स्वाद नहीं उतरा।
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झींगा मछली अटल जी को बेहद पसंद

मांसाहारी व्यंजनों में अटल जी को 'झींगा मछली' काफी पसंद थी। अक्सर वे प्रॉन डिश खाते थे। यही नहीं मदिरापान को लेकर भी कभी उन्होंने छुपाया नहीं।  अटलजी भांग के शौकीन रहे। उनके लिए उज्जैन से भांग आती थी।
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लड्डू, जलेबी और कचौड़ी थे बहुत पसंद

अटल जी को मीठी यानी मिठाई बहुत पसंद थी। शायद यही वजह है कि ग्वालियर की गलियों में लड्डू के जायके जैसी उनकी शख्सियत इस कविता की तरह है, "धरती को बौने नहीं ऊंचे कद के इंसानों की ज़रूरत है, लेकिन इतने ऊंचे भी नहीं कि कहीं कोई दूब न जमे, कोई कांटा न चुभे...मेरे प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना...ग़ैरों को गले न लगा सकूं...ऐसी रुखाई कभी मत देना।"
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प्रधानमंत्री का ओहदा मिलने के बाद भी अटल बिहारी वाजपेयी के मुंह में ग्वालियर के हलवाई के लड्डू, जलेबी और कचौड़ी का जायका बरकरार रहा। होली पर ठंडई और दिवाली पर मिठाई के बिना अटल बिहारी वाजपेयी के खाने के शौक की चर्चा अधूरी है। 

जब ठंडई के लिए तांगे से गए...

खासकर ठंडई से तो उनका लगाव जगजाहिर है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर याद करते हैं कि जब वो नेता प्रतिपक्ष थे तो इंदौर से उज्जैन कार से आए। उज्जैन में अटलजी कहने लगे कि गोपाल मंदिर ले चलो। 


गौर ने इस घटना का जिक्र करते हुए बताया, "अटल जी ने कहा तांगे में ले चलो कार में नहीं। कोई देख न पाए। तांगे बंद होते हैं। कहने लगे भांग का घोंटा तीन गिलास ले आओ। दो गिलास मैं पीयूंगा और बादाम-किशमिश डाल दो। एक ग्लास तुम पीना। मस्त आदमी, बहुत बड़े दिल के आदमी। उनसे हंसी-मजाक कुछ भी कर सकते थे आप।"
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