Nistar: स्वदेशी डीएसवी INS निस्तार नौसेना में शामिल, चुनिंदा देशों के पास है ये ताकत; रक्षा मंत्री ने दी बधाई
आईएनएस निस्तार की खासियत की बात करें तो यह 118 मीटर लंबा और 10 हजार टन वजनी जहाज है, जो समुद्र में गहराई तक जाने में मदद करने वाले उपकरणों से लैस है। इसकी मदद से 300 मीटर तक समुद्र की गहराई में जाया जा सकता है।
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विस्तार
'हथियार आयातक से निर्यातक बन रहा भारत'
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि 'भारतीय नौसेना का इतिहास गौरवशाली है और आईएनएस निस्तार भारत की ताकत को और बढ़ाएगा।' उन्होंने कहा कि 'भारत आज सैन्य मामले में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है और अब आयातक से निर्यातक बन रहा है। भारत ने 23,622 करोड़ रुपये हथियार निर्यात किए हैं और अब लक्ष्य 50 हजार करोड़ रुपये के हथियार निर्यात करने का है।' इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने कहा कि 'नए आईएनएस निस्तार से नौसेना की डाइविंग क्षमता और गहरे पानी में भी काम करने की क्षमता बेहतर होगी।' उन्होंने कहा कि 'पुराने जहाज कभी नहीं मरते, वे सिर्फ नए रूप में हमारे पास वापस आते हैं।'
#Nistar - India's first indigenously designed & constructed Diving Support Vessel, to be commissioned into the #IndianNavy today, #18Jul 25, in presence of Hon’ble Raksha Rajya Mantri, Shri @SethSanjayMP.@SpokespersonMoD @DefProdnIndia@IN_HQENCpic.twitter.com/lUpw8AAYyN
विज्ञापन विज्ञापन— SpokespersonNavy (@indiannavy) July 18, 2025
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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह अहम कदम है। सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, कुल 120 एमएसएमई कंपनियों ने मिलकर इस युद्धक जहाज को बनाने का काम किया। आईएनएस निस्तार के 80 फीसदी उपकरण स्वदेशी हैं। यह युद्धक जहाज आधुनिक तकनीक से लैस है और इसकी मदद से समुद्र में गहरे तक उतरा जा सकता है। इस डाइविंग सपोर्ट वेसल की मदद से राहत और बचाव कार्य चलाने, मरम्मत के काम आदि में काफी मदद मिलेगी। दुनिया के चुनिंदा देशों के पास ही अभी आईएनएस निस्तार जैसी ताकत है।
राजनाथ सिंह ने दी बधाई, बताया मील का पत्थर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने निस्तार को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी डिजाइन और भारत में ही बने डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) INS निस्तार के जलावतरण के बाद अब गोताखोरी और बचाव कार्यों को और असरदार बनाने में मदद मिलेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित आईएनएस निस्तार की मदद से संकटग्रस्त पनडुब्बी से कर्मियों के बचाव और निकासी जैसे काम भी होंगे। यह डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल (DSRV) के लिए 'मदर शिप' के रूप में कार्य करेगा। इसका नौसेना में शामिल होना, आत्मनिर्भरता के माध्यम से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की दृष्टि से भारत की यात्रा का एक और मील का पत्थर है।
Defence Minister Rajnath Singh tweets, "Congratulations to the Indian Navy and Hindustan Shipyard Limited for the commissioning of INS Nistar, the indigenously designed and constructed Diving Support Vessel (DSV). This induction of the DSV, installed with state-of-the-art… pic.twitter.com/vqpswWVbfS
— ANI (@ANI) July 18, 2025
नौसेना की बढ़ेगी ताकत
निस्तार नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका मतलब होता है आजादी या बचाव। आईएनएस निस्तार की खासियत की बात करें तो यह 118 मीटर लंबा और 10 हजार टन वजनी जहाज है, जो समुद्र में गहराई तक जाने में मदद करने वाले उपकरणों से लैस है। इसकी मदद से 300 मीटर तक समुद्र की गहराई में जाया जा सकता है। यह जहाज डीएसआरवी के लिए मदर शिप का काम करता है। अगर किसी पनडुब्बी में कोई आपात स्थिति आती है तो मरम्मत कार्य या बचाव कार्य के लिए जवानों को एक हजार मीटर की गहराई तक उतारा जा सकता है। भारतीय नौसेना को पहली बार साल 1969 में सोवियत संघ से पहला डाइविंग सपोर्ट वेसल मिला था। करीब दो दशकों की सेवा के बाद उसे रिटायर किया गया था। अब आईएनएस निस्तार स्वदेशी और भारत में ही डिजाइन किया गया है।
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