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अब योगी के यूपी में दोहराई गई ओडिशा की कहानी, एंबुलेंस नहीं मिली तो हाथों पर बेटे का शव ले गया बाप

Tue, 02 May 2017 08:06 PM IST
amarujala.com-Presented by- अकरम
amarujala.com-Presented by- अकरम Updated Tue, 02 May 2017 08:06 PM IST
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Father Wept As He Carried 15-Year-Old Son's Body

सरकारी अस्पतालों का गरीब मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ रुखा व्यवहार किसी से छिपा नहीं है। कुछ महीने पहले ओडिशा में अस्पताल द्वारा पत्नी का शव ले जाने के लिए दाना मांझी को एंबुलेंस देने से मना कर दिया गया था। इसके बाद उन्हें शव को 10 किलोमीटर अपने कंधों पर ले जाना पड़ा था। ये तस्वीरें दुनियाभर में भारत की शर्मिदंगी का कारण्‍ा बनी थीं। लेकिन शायद हुक्मरानों और इंतजामिया ने इनसे कोई सबक नहीं सीखा नतीजतन यूपी के इटावा में भी फिर ऐसी कहानी दोहराई गई और एक लाचार बाप को अपने बेटे की लाश कंधों पर ढोने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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जानकारी के अनुसार 45 वर्षीय मजदूर उदयवीर को 15 साल के बेटे के शव को अपने कंधों पर अस्पताल से सिर्फ इसलिए ले जाना पड़ा क्योंकि उन्हें स्ट्रेचर और एंबुलेंस की सुविधा नहीं दी गई। उदयवीर ने कहा कि राज्य में सबसे अच्छे अस्पतालों में से एक माना जाने वाले इटावा सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों ने मेरे बेटे पुष्पेंद्र का इलाज भी नहीं किया।
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उन्होंने बताया, डॉक्टरों ने कहा- लड़के में कुछ नहीं बचा। मेरे बेटे के सिर्फ पैरों में दर्द हो रहा था। डॉक्टरों ने मेरे बेटे को कुछ मिनट देखा और कहा कि उसे ले जाओ।' उदयवीर अपने गांव से सात किलोमीटर दूर अस्पताल में बेटे को बेहतर इलाज की उम्मीद में ले गए थे। बेहतर इलाज तो एक तरफ डॉक्टरों ने उन्हें शव ले जाने या एम्बुलेंस की भी कोई सुविधा नहीं दी, जबकि इस तरह की सुविधा गरीबों को मुफ्त में मुहैया कराई जाती है।
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अस्पताल के संवेदनहीन व्यवहार का यह मामला लोगों के सामने उस वक्त आया, जब उदयवीर की बेटे के शव को अपने कंधो पर अस्पताल से बाहर लेकर निकलते हुए किसी ने मोबाइल से वीडियो बना ली। उदयवीर ने कहा कि किसी ने भी मुझे नहीं बताया कि मैं अपने बेटे के शव को घर ले जाने के लिए परिवहन का हकदार हूं या नहीं।

जिले के शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने इसे घटना को 'शर्मनाक' बताया है। उन्होंने कहा कि सोमवार दोपहर को लड़के को  अस्पताल में मृत लाया गया था।

मुख्य चिकित्सा कार्यालय राजीव यादव ने कहा, मुझे बताया गया है कि बस दुर्घटना के एक मामले में डॉक्टर व्यस्त थे। इसी वजह से उदयवीर को परिवहन से संबंधित जरूरत  के बारे में नहीं पूछा जा सका। इस मामले में कार्रवाई होगी, इसमें कोई शक नहीं कि यह मामला इस अस्पताल की प्रतिष्ठा पर धब्बा है और इसमें गलती हमारी है।


वीडियो:

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