फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Farmers will suffers from increase in Petrol diesel prices 

पेट्रोल- डीजल की आसमान छूती कीमतों के बाद अब चूल्हा जलाना होगा मुश्किल, किसानों को भी लगेगा झटका 

Mon, 21 May 2018 09:51 PM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली 
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Mon, 21 May 2018 09:51 PM IST
विज्ञापन
Farmers will suffers from increase in Petrol diesel prices 

पेट्रोल एवं डीजल की आसमान छूती कीमतों के बीच अब चूल्हा जलाना, खेतों में खाद डालना और बिजली, सब महंगी होने वाली है। इसकी वजह प्राकृतिक गैस का महंगा होना है। पिछले एक सप्ताह में ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में स्पॉट एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) के दाम करीब 10 फीसदी बढ़ चुके हैं। इसका असर घरेलू बाजार में दिखना तय है।

विज्ञापन

 
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इस समय जो तेजी दिखी है, वह वर्ष 2014 के अंतिम महीनों के बाद की सबसे बड़ी तेजी है। इसी के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा के अन्य साधनों जैसे- एलएनजी और कोयले की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। 
विज्ञापन


पिछले सप्ताह एशियन एलएनजी स्पॉट प्राइस 10 फीसदी महंगा होकर 8.70 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) पर पहुंच गया। यह एक सप्ताह पहले के मुकाबले करीब 80 सेंट महंगा है। इसी तरह अमेरिका में हेनरी हब नेचुरल गैस फ्यूचर भी एक फीसदी महंगा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूं तो अमेरिका भारत से बेहद दूर है, लेकिन वहां गैस की कीमतों में बढ़ोतरी इसलिए मायने रखती है, क्योंकि भारतीय कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड ने वहां की एक कंपनी से 30 वर्षों के लिए गैस आपूर्ति का समझौता किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका के लुसियाना से एलएनजी का आयात शुरू भी हो गया है।

अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में दिखेगा असर

Farmers will suffers from increase in Petrol diesel prices 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस के महंगा होने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में दिखेगा। यूं तो इस समय भारतीय ऊर्जा परिदृश्य में प्राकृतिक गैस की भागीदारी महज 6.5 फीसदी की है, लेकिन इसकी भागीदारी जिस क्षेत्र में है, उसका असर जीवन के हर क्षेत्र में होगा। इस समय देश के 13 राज्यों में सिटी गैस परियोजना चल रही है।

मतलब इन राज्यों में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की खाना बनाने के लिए गैस की आपूर्ति हो रही है, वहीं सीएनजी के रूप में मोटर वाहन चलाने के लिए गैस की आपूर्ति हो रही है। सिटी गैस परियोजना के लिए घरेलू गैस की आपूर्ति करीब 25 फीसदी है। मतलब 75 फीसदी के लिए आयातित गैस पर निर्भरता है। यदि आयातित गैस महंगी होगी तो पीएनजी और सीएनजी के दाम बढ़ना तय है।
 
रासायनिक उर्वरक भी होगा महंगा
देश में इस समय प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा औद्योगिक ग्राहक उर्वरक क्षेत्र ही है। इस समय करीब 35 फीसदी गैस की खपत उर्वरक क्षेत्र में ही हो रही है। जब इसका मुख्य इनपुट (प्राकृतिक गैस) ही महंगा हो जाएगा, तो रासायनिक उर्वरकों का दाम भी बढ़ेगा। सरकार चाहे तो इसके असर से किसानों को बचा सकती है, लेकिन उस सूरत में सब्सिडी बढ़ानी पड़ेगी जो राजकोषीय घाटे को बढ़ाएगा। 

बिजली भी होगी महंगी 
उर्वरक के बाद बिजली ऐसा क्षेत्र है, जहां प्राकृतिक गैस की सबसे ज्यादा खपत है। इस समय देश में करीब 24 गीगावाट क्षमता के बिजली घर गैस से चल सकते हैं, लेकिन इनमें से 14 गीगावाट क्षमता के बिजली घर गैस के बिना बंद हैं।

शेष 10 गीगावाट क्षमता के बिजली घर भी अपनी पूर्ण क्षमता में नहीं चलते। तब भी इस क्षेत्र में देश के कुल गैस खपत का करीब 25 फीसदी हिस्सा खर्च होता है। जब गैस महंगा होगा, तो बिजली महंगी होगी और बिजली महंगी होने का असर जीवन के हर क्षेत्र में दिखेगा। 

लघु उद्योगों को भी होगी परेशानी 
देश के जिन राज्यों में सिटी गैस परियोजना चल रही हैं, वहां चरणबद्ध तरीके से लघु उद्योगों को भी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति शुरू की गई है। ऐसा इसलिए, ताकि ये उद्यमी कोयला या पेट कोक के बदले गैस का उपयोग करें और प्रदूषण पर लगाम लगे। जब गैस महंगा होगा तो इनकी इनपुट लागत बढ़ जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed