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कटीले तार लगाने पर किसान बोले, जो तिरंगे का अपमान नहीं रोक पाए, वे किसानों को कैसे बचाएंगे? 

Tue, 02 Feb 2021 08:00 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 02 Feb 2021 08:00 PM IST
सार

गाजीपुर बॉर्डर पर कटीले तार लगाने से जनता की परेशानी बढ़ी, आने-जाने में भारी दिक्कतें 
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, शिवसेना नेता संजय राउत और अनिल देसाई ने गाजीपुर पहुंचकर किसान आंदोलन को दिया समर्थन
राकेश टिकैत बोले-छह फरवरी को चक्का जाम के दौरान जनता को परेशान नहीं करेंगे
 

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Farmers said on planting barbed wire, who could not stop insulting the tricolor, how will they save the farmers?
किसान आंदोलन - फोटो : SELF

विस्तार

आंदोलनकारी किसानों को दिल्ली की तरफ आगे बढ़ने से रोकने के लिए तीनों धरना स्थलों पर प्रशासन ने कटीले तारों की ऊंची बाड़ लगा दी है। सड़कों पर नुकीली कीलें ठोंक दी हैं। यूपी बॉर्डर पर एनएच-24 से आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई है। इस पर किसान नेता हरीश चंद्र पवार ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर प्रशासन तिरंगे का अपमान नहीं रोक सका, वह किसानों की क्या रक्षा कर पाएगा। वहीं किसान नेता राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि किसानों को दिल्ली नहीं जाना है। रास्ते बंद करने का कोई फायदा नहीं है। जनता की परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि 6 फरवरी को होने वाले भारत बंद के दौरान जनता को परेशान नहीं किया जाएगा।

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पंवार बोले-प्रशासन की दलील बकवास
भारतीय किसान यूनियन के नेता हरीश चंद्र पंवार ने अमर उजाला से चर्चा में कहा कि प्रशासन हमें तर्क दे रहा है कि ये कंटीली बागड़ उन्हें किसी बाहरी हमले से बचाने के लिए लगाई गई हैं, ताकि अवांछित लोग धरना स्थलों तक न पहुंच सकें। गौरतलब है कि गाजीपुर और सिंधु बॉर्डर पर किसानों पर हमले हो चुके हैं, लेकिन बकौल पंवार ये बातें बकवास हैं। देश में सबसे कड़ी सुरक्षा 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर होती है। ऐसे मौके पर भी जो प्रशासन तिरंगे का अपमान नहीं रोक पाया, वो किसानों की सुरक्षा क्या कर पाएगा? किसानों को सरकार और प्रशासन पर अब कोई भरोसा नहीं रह गया है। यही कारण है कि उनके अपने लोग आंदोलन स्थल पर आने-जाने वाले लोगों पर निगाह रख रहे हैं।

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पानी बंद करके आंदोलन में आग फूंकी

बागपत से किसान आंदोलन का समर्थन करने आए किसान वीरेश चौधरी ने कहा कि सरकार ने आंदोलनकारी किसानों को पानी नहीं देने की धमकी दी थी। वे किसानों को प्यासा मारना चाहते थे, लेकिन पानी बंद करने का एलान करके सरकार ने आंदोलन की आग में पेट्रोल झोंक दिया। अभी तक जो किसान इस आंदोलन से दूर भी थे, वे भी अब आंदोलन में कूद पड़े हैं।  पानी बंद करने की बात सुनकर हर किसान अपने साथ पानी की बोतलें, टंकी और अन्य खाने पीने का सामान लेकर लगातार गाजीपुर पहुंच रहे हैं। मंगलवार को भी राकेश टिकैत ने आगरा से पानी लेकर आए एक किसान की टंकी से पानी पिया और किसानों का इस एकजुटता और प्यार दिखाने के लिए आभार जताया।

मेधा पाटकर जमीन पर ही बैठ गईं
मंगलवार को गाजीपुर धरना स्थल पर प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के पहुचने से किसानों को नई ऊर्जा मिल गई। मंच पर भारी भीड़ होने के बाद मेधा पाटकर जमीन पर ही बैठ गईं और किसानों की बात सुनने लगीं। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की चुनी हुई सरकार को किसानों को अपनी बात सुनवाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी होती है, लेकिन सरकार अपनी इस जिम्मेदारी से बच रही है। किसानों से बात करने की बातें अवश्य कही जाती हैं, लेकिन उनकी बातें नहीं सुनी जा रही हैं।

संजय राउत के आने पर यह बोले टिकैत

दोपहर एक बजे शिवसेना नेता संजय राउत और अनिल देसाई गाजीपुर पहुंचे। उन्होंने खुलकर किसानों का समर्थन किया और कहा कि सरकार को किसानों की बात सुननी चाहिए। धरना स्थल पर नेताओं के पहुंचने पर राकेश टिकैत से सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि यह सबका आंदोलन है और जो कोई भी आ रहा है, उसका स्वागत है। राकेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बातचीत करने की बात कही है। उसके बदले में वे भी सरकार से बातचीत करने की बात कह चुके हैं। लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अगर दो-चार दिन के अंदर मामले का समाधान नहीं निकलता है तो यह आंदोलन लंबा जाएगा। उन्होंने कहा कि मेले में जो खोता है, वह मेले में ही मिलता है। यह कहकर उन्होंने संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो यह आंदोलन इस साल के नवंबर महीने तक भी जा सकता है। इस आंदोलन की शुरूआत भी पिछले वर्ष 26 नवंबर को ही हुई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि वे किसानों से बस एक फोन कॉल की दूरी पर हैं। इस पर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए किसान नेता टिकैत ने कहा कि वे भी वह मोबाइल नंबर खोज रहे हैं जिससे प्रधानमंत्री से बातचीत हो सकती है।

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