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केंद्र की मुश्किलें बढ़ाएगा आरएसएस समर्थित भारतीय किसान संघ, कृषक आंदोलन में शामिल होने की तैयारी

Tue, 22 Dec 2020 05:10 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 22 Dec 2020 05:10 PM IST
सार

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की 2-3 जनवरी को बेंगलुरु में होगी राष्ट्रीय बैठक, अगर मौजूदा गतिरोध का हल नहीं निकला तो इसमें आंदोलन पर लिया जा सकता है बड़ा फैसला...

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farmers Protest: RSS backed Bharatiya Kisan Sabha will support Farmers Agitation on MSP and start a national movement
किसान प्रतिनिधियों के साथ बीच में राकेश टिकैत - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अगर केंद्र सरकार किसान आंदोलन का शीघ्र कोई हल नहीं निकालती है तो आने वाले समय में उसकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। खबर है कि आरएसएस समर्थित भारतीय किसान संघ न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर अखिल भारतीय स्तर पर एक बड़े जनांदोलन की तैयारी कर रहा है। 2-3 जनवरी को बेंगलुरु में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय किसान संघ भी कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार के रूख से काफी नाराज है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उसकी सुझाई गई बातों (न्यूनतम समर्थन मूल्य को वैधानिक बनाने और पूरे देश में किसान अदालतें गठित करने का सुझाव) को भी केंद्र सरकार ने वर्तमान कानूनों में शामिल नहीं किया है।
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दरअसल, किसान आंदोलन से भारतीय किसान संघ की दूरी उसके लिए आलोचना का केंद्र बन गई थी। इससे आहत भारतीय किसान संघ इस मुद्दे पर लड़ाई तेज कर अपनी छवि सुधारना चाहता है। यही कारण है कि भारतीय किसान संघ ने भी वर्तमान आंदोलन को अपना वैचारिक समर्थन देने की घोषणा कर दी है। भारतीय किसान संघ के कुछ किसान वर्तमान आंदोलन में शामिल भी हो सकते हैं।
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जानकारी के मुताबिक अगर किसानों और केंद्र सरकार के बीच दो जनवरी तक कोई हल नहीं निकलता है तो प्रतिनिधि सभा की बैठक में यह मुद्दा छाया रह सकता है। इसमें कृषि कानूनों और भारतीय किसान समाज पर उसके पड़ने वाले असर पर व्यापक चर्चा हो सकती है। इस बैठक में आगे की रणनीति पर विचार किया जा सकता है।

भारतीय किसान संघ का मानना है कि किसानों को उसकी पूरी फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने की वैधानिक गारंटी मिलनी चाहिए। इससे वह निजी क्षेत्र के जाल में नहीं फंसेगा और उसकी आय में वृद्धि होगी। इससे देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी जो आरएसएस के मूल विचारों में शामिल है।


अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा इस संगठन की सर्वोच्च संस्था है। इसका हर साल एक बार आयोजन किया जाता है। इसमें पूरे वर्ष भर चली गतिविधियों की समीक्षा की जाती है और आगे के लिए रणनीति तय की जाती है। कोरोना के कारण इस वर्ष बेंगलुरु की बैठक में अपेक्षाकृत काफी कम सदस्यों को आमंत्रित किया गया है।

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