लंबे समय के लिए टला योगी मंत्रिमंडल का विस्तार, सपा-बसपा गठबंधन की काट में जुटी पार्टी
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उत्तर प्रदेश में योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार को लंबे समय तक के लिए टाल दिया गया है। बीते शनिवार को लोकसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सीएम योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्रियों की बैठक में आम चुनाव में 50 फीसदी वोट हासिल करने (मिशन 50 पर्सेंट) पर चर्चा हुई। इस क्रम में शाह ने मतदाता सूची में समर्थकों के हर हाल में नाम दर्ज कराने, बूथ कमेटियों को मजबूत बनाने के लिए बूथ स्तर पर नियमित कार्यक्रम करने, जल्द से जल्द सभी 80 सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति का काम पूरा करने का निर्देश दिया।
बैठक में शामिल एक नेता ने बताया कि योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की संभावना निकट भविष्य में संभव नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह ने विस्तार के इतर संगठन की मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया है। इस क्रम में बूथ कमेटियों की लगातार समीक्षा, बूथ स्तर पर लगातार कार्यक्रम किए जाने और लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हो रही मतदाता सूची में पार्टी समर्थकों का नाम दर्ज कराने पर जोर दिया गया है। शाह ने केंद्र सरकार के साथ-साथ योगी सरकार की बेहतरीन योजनाओं के निरंतर प्रचार प्रसार की व्यवस्था के भी निर्देश दिए।
सपा-बसपा गठबंधन की चिंता
दरअसल सपा-बसपा की दोस्ती के कारण लोकसभा चुनाव के बाद उपचुनावों में लोकसभा की तीन और विधानसभा की एक सीट गंवाने के कारण पार्टी नेतृत्व चिंतित है। शाह इस गठबंधन की काट मिशन 50 पर्सेंट को अमलीजामा पहना कर करना चाहते हैं। इस मिशन के तहत पार्टी की योजना सपा और बसपा के समर्थक जातियों में सेंधमारी करने की है। कहा जा रहा है कि इनकी समर्थक जातियों में सेंधमारी के लिए पार्टी एक फार्मूला तैयार कर रही है। फार्मूला तैयार होने के बाद ही योगी मंत्रिमंडल में मिशन 50 पर्सेंट के खांचे में फिट बैठने वाले नेताओं को जगह मिलेगी, जबकि इस खांचे में फिट न बैठने वाले नेताओं की छुट्टी होगी।